ईरान जंग के बाद से देश में सिलेंडर की काफी चर्चा हो रही है. एलपीजी संकट की वजह से 5 किलो के सिलेंडर की सप्लाई भी बढ़ाई जा रही है. वहीं, कुछ वीडियो बैंगनी कलर के सिलेंडर के भी वायरल हो रहे है. ये तो आप जानते हैं कि घर वाले डोमेस्टिक सिलेंडर नीले कलर के होते हैं जबकि कॉमर्शियल सिलेंडर नीले रंग के होते हैं. लेकिन, क्या आप इन बैंगनी सिलेंडर के बारे में जानते हैं कि आखिर ये किस काम के होते हैं. इनमें भी एलपीजी गैस होती है, फिर इन्हें कौन इस्तेमाल करता है... तो आज इन बैंगनी सिलेंडर के बारे में जानते हैं.
क्या ये कॉमर्शियल सिलेंडर से अलग है?
आमतौर पर घरेलू इस्तेमाल के लिए लाल रंग का सिलेंडर होता है, जिसमें करीब 14 किलो गैस होती है. इसके अलावा नीले रंग का सिलेंडर कॉमर्शियल यूज के लिए होता है, जिसमें करीब 19 किलो गैस होती है. इनके अलावा इंडेन यानी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की ओर से एक्स्ट्रा तेज नाम का एक सिलेंडर भी आता है, जिसका रंग बैंगनी होता है. इंडेन का एक्स्ट्रा तेज सिलेंडर 19 किलो, 47.5 किलो और 425 किलो की कैटेगरी में आता है.
ये सिलेंडर भी कॉमर्शियल या इंडस्ट्रीयल इस्तेमाल के लिए होते हैं. इसे भी होटल या फैक्ट्रियों में इस्तेमाल किया जाता है. इंडेन की ओर से शुरू किए गए इस सिलेंडर की सुविधा देश के कई शहरों में मिल रही है. हालांकि, एक्स्ट्रा तेज नीले रंग में भी आता है.
फिर कॉमर्शियल सिलेंडर से कितना अलग है?
अगर कॉमर्शियल सिलेंडर से फर्क समझें तो इसकी एलपीजी में नैनो-एडिटिव भी होता है. इसकी वजह से एलपीजी क्वालिटी बढ़ जाती है और नॉर्मल एलपीजी से इसकी खपत काफी कम होती है. इससे एलपीजी की खपत में करीब 5 फीसदी की बचत होती है. अगर इस गैस से प्रेशर कुकर में खाना बनाया जाए तो 14 फीसदी तक कम गैस खपत होती है. इसकी फ्लैम यानी आग 65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होती है. ऐसे में कम वक्त में ज्यादा खाना बनाया जा सकता है.
कितने का आता है?
इसके और कॉमर्शियल रेट में ज्यादा फर्क नहीं होता है और ये कॉमर्शियल सिलेंडर से थोड़ा महंगा होता है. अभी कॉमर्शियल सिलेंडर की रेट 2048 रुपये है.