गर्मी का मौसम आते ही एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है. लेकिन कई बार पड़ोसी के AC का आउटडोर यूनिट दूसरों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है. किसी की खिड़की या बालकनी की तरफ लगातार गर्म हवा आना, तेज आवाज होना या रात में नींद खराब होना आम शिकायतें हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है? जवाब है- हां.
सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट गौतम सिंह इस बारे में बताते हैं कि भारतीय कानून में इस तरह की स्थिति को 'प्राइवेट न्यूसेंस' (Private Nuisance) यानी निजी उपद्रव माना जा सकता है, अगर इससे किसी व्यक्ति के शांतिपूर्वक रहने के अधिकार का उल्लंघन हो रहा हो.
क्या पड़ोसी के खिलाफ केस किया जा सकता है?
यदि पड़ोसी के AC का आउटडोर यूनिट इस तरह लगाया गया है कि उसकी गर्म हवा सीधे आपकी खिड़की, दरवाजे या बालकनी में आ रही है और इससे आपको लगातार असुविधा हो रही है, तो आप कानूनी मदद ले सकते हैं. शोर, गर्म हवा या अन्य परेशानियों के कारण जीवन की सामान्य सुविधाएं प्रभावित होने पर मामला अदालत तक पहुंच सकता है.
सबसे पहले बातचीत से निकालें समाधान
कानूनी प्रक्रिया शुरू करने से पहले विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पड़ोसी से सीधे बात की जाए. कई बार लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनके AC की वजह से दूसरों को परेशानी हो रही है. आप मौखिक या लिखित रूप से उनसे यूनिट की दिशा बदलने या दूसरी जगह लगाने का अनुरोध कर सकते हैं.
नहीं माने पड़ोसी तो भेज सकते हैं लीगल नोटिस
अगर बातचीत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो अगला कदम कानूनी नोटिस भेजना हो सकता है. किसी वकील के माध्यम से भेजे गए नोटिस में यह बताया जाता है कि AC की वजह से हो रही परेशानी 'न्यूसेंस' की श्रेणी में आती है और यदि समस्या दूर नहीं की गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सिविल कोर्ट में भी जा सकते हैं
नोटिस के बावजूद राहत न मिलने पर पीड़ित व्यक्ति सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है. कोर्ट में 'मैंडेटरी इंजंक्शन' (Mandatory Injunction) की मांग की जा सकती है. यदि अदालत को शिकायत सही लगती है, तो वह पड़ोसी को AC हटाने, उसकी स्थिति बदलने या हवा की दिशा बदलने का आदेश दे सकती है.
SDM या मजिस्ट्रेट से भी कर सकते हैं शिकायत
कुछ मामलों में स्थानीय प्रशासन भी हस्तक्षेप कर सकता है. सीआरपीसी की धारा 133 के तहत एसडीएम या कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. यदि मामला सार्वजनिक असुविधा या गंभीर उपद्रव से जुड़ा पाया जाता है, तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है.
सोसाइटी या RWA की मदद भी लें
अगर आप किसी अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, तो पहले सोसाइटी प्रबंधन समिति या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से संपर्क करें. अधिकांश सोसाइटी में AC यूनिट लगाने को लेकर नियम और बाय-लॉज़ बने होते हैं. शिकायत मिलने पर प्रबंधन समिति जांच कर उचित कार्रवाई कर सकती है.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक पहुंच सकता है मामला
यदि AC की वजह से अत्यधिक शोर हो रहा है या पर्यावरण संबंधी किसी नियम का उल्लंघन हो रहा है, तो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अधिकारी मामले की जांच कर आवश्यक निर्देश जारी कर सकते हैं.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हर असुविधा अदालत में मामला बनने लायक नहीं होती. लेकिन यदि परेशानी लगातार, गंभीर और साबित की जा सकने वाली हो, तो कानून प्रभावित व्यक्ति को राहत पाने का अधिकार देता है. इसलिए सबूत के तौर पर फोटो, वीडियो और लिखित शिकायतों का रिकॉर्ड संभालकर रखना फायदेमंद हो सकता है. तो अगर पड़ोसी के AC की गर्म हवा या शोर आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो चुप रहने की जरूरत नहीं है. बातचीत से लेकर कोर्ट और प्रशासनिक शिकायत तक, आपके पास कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं.