दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी आग की वजह से 21 लोगों की मौत हो गई. जब जांच हुई तो पता चला कि होटल मालिक ने उस जगह की फायर एनओसी नहीं ले रखी थी. लेकिन, जब राजकोट के एक गेमिंग जोन में आग लगी थी, उस वक्त भी फायर एनओसी ना होने की बात सामने आई थी. इसके अलावा दिल्ली के विवेक विहार में बेबी केयर सेंटर में लगी आग, मुखर्जी नगर कोचिंग सेंटर में लगी आग, मुंडका में एक बिल्डिंग में लगी आग, करोल बाग के एक होटल में लगी आग, अनाज मंडी में लगी आग में भी एक ही बात सामने आई थी कि फायर एनओसी नहीं थी.
ऐसे में सवाल है कि होटल मालिक या फिर अन्य बिल्डिंग के मालिक फायर एनओसी क्यों नहीं लेते हैं. तो समझते हैं कि आखिर फायर एनओसी की कौन-कौन सी शर्ते हैं, जिनकी वजह से फायर एनओसी नहीं ले पाते हैं.
आखिर मिलती कैसे है ये फायर एनओसी?
अगर दिल्ली की बात करें तो दिल्ली फायर सर्विस और यूनिफाइड बिल्डिंग बाय-लॉज (UBBL 2016) के तहत 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले या विशेष श्रेणी (बहुमंजिला, व्यावसायिक, अस्पताल आदि) के बिल्डिंग के लिए सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य हैं. दिल्ली फायर सर्विस विभाग से लेनी होती है और अब इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जा सकती है.
किन बिल्डिंग के लिए जरूरी है फायर एनओसी?
डीएफएस की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, इन जगहों के लिए एनओसी जरूरी है.
- अगर कोई आवासीय भवन (होटल और गेस्ट हाउस को छोड़कर) 15 मीटर से ऊपर हो, जिनमें मेजेनाइन फ्लोर सहित भूतल और चार ऊपरी मंजिलें हों.
- अगर होटल और गेस्ट हाउस की ऊंचाई 12 मीटर से ज्यादा हो तो जरूरी है.
- अगर 9 मीटर से ऊंची एजुकेशन बिल्डिंग हो.
- सभी सभा भवन, 15 मीटर से ऊंचे व्यावसायिक भवन, स्टोरेज आदि.
किन शर्तों को पूरा करना होगा?
- बिल्डिंग तक फायर ब्रिगेड के पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ता होना चाहिए.
- हर बिल्डिंग में इमरजेंसी में निकलने के लिए एक्जिग की व्यवस्था होनी चाहिए.
- फायर चेक डोर भी होने चाहिए.
- इन बिल्डिंग में स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम लगा होना चाहिए.
- फायर एक्सटिंग्विशर बिल्डिंग के हिसाब से रखे होने चाहिए.
- ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम भी होना चाहिए.
- पब्लिक एड्रेस सिस्टम, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर पंपिंग व्यवस्था भी होनी चाहिए.
- एग्जिट साइनेज, स्टैंडबाय पावर सप्लाई, रिफ्यूज एरिया, फायर कंट्रोल रूम को लेकर भी नियम तय किए गए हैं.
क्या जानकारी देनी होती है?
- कैसी बिल्डिंग है?
- कितनी ऊंचाई है?
- कितनी मंजिल हैं?
- ग्राउंड फ्लोर का क्षेत्रफल कितना है?
- प्रत्येक मंजिल का क्षेत्रफल कितना है?
- बेसमेंट है या नहीं और उसका क्षेत्रफल कितना है?
- पूरे भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल कितना है?
- फायर ब्रिगेड की पहुंच है या नहीं?
- बिल्डिंग तक पहुंचने वाली सड़क की चौड़ाई कितनी है?
- एंट्री ग्रेट की चौड़ाई कितनी है?
- परिसर के अंदर की सड़क की चौड़ाई कितनी है?
- बिल्डिंग और सड़क के बीच की दूरी कितनी है?
- इमरजेंसी एग्जिट है या नहीं?
- कितनी सीढ़ियां हैं?
- सीढ़ियों की चौड़ाई कितनी है?
- बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों के लिए अलग निकास हैं या नहीं?
- फायर टावर है या नहीं?
- रैंप है या नहीं?
- एग्जिट गेट कैसा है?
- फायर चेक डोर लगा है या नहीं?
- कॉरिडोर की चौड़ाई कितनी है?
- दरवाजों का आकार कितना है?
- आग फैलने से रोकने की व्यवस्था क्या है?
- फायर रेसिस्टेंट दीवार है या नहीं?
- फायर कर्टेन है या नहीं?
- धुआं निकालने की व्यवस्था कैसी है?
- नैचुरल वेंटिलेशन कैसा है?
- फ्रेश एयर सप्लाई कैसी है और कहां से है?
- आग बुझाने के उपकरण क्या क्या हैं?
- हर मंजिल पर कितने अग्निशमन यंत्र हैं?
- अलार्म और डिटेक्शन सिस्टम है या नहीं?
- स्मॉक डिटेक्टर्स है या नहीं?
- फॉल्स सीलिंग कैसी है?
- पब्लिक एड्रेस सिस्टम है या नहीं?
- स्प्रिंकलर सिस्टम है या नहीं?
- बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों में कितने स्प्रिंक्लर हैं और उनकी डिजाइन कैसी है?
- हाइड्रेंट सिस्टम कैसा है?
- फायर पंप, पंप हाउस, मेन पंप, जॉकी पंप कहां है?
- अग्निशमन के लिए पानी की क्या व्यवस्था है?
- अंडरग्राउंड वाटर टैंक है या नहीं, उसकी क्षमता कितनी है, वो कितना गहरा है?
- ओवरहेड टैंक है या नहीं, उसके लिए सीढी लगी है या नहीं?
- कितनी लिफ्ट है, फायर लिफ्ट है या नहीं, पावर सप्लाई का क्या सिस्टम है?
- फायर कंट्रोल है या नहीं, सेफ्टी ऑफिसर है या नहीं?
- क्या काम होता है, इलेक्ट्रिक पैनल का क्या सिस्टम है?
- और भी बहुत कुछ.
इसके अलावा अगर कहीं ज्वलनशील पदार्थों से जुड़ा काम होता है तो उसके लिए नियम और भी सख्त हैं. इन सवालों के जवाब के बाद डिपार्टमेंट एनओसी को लेकर फैसला लेता है और उसके बाद फायर एनओसी जारी की जाती है.