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House Rent Rules: मकान किराए पर दिया है? किराएदार से इस कागज पर साइन करवा लें

अगर आप अपना मकान, फ्लैट या कमरा किराए पर देने जा रहे हैं, तो जल्दबाजी बिल्कुल न करें. किराएदार का पुलिस वेरिफिकेशन कराना, आधार, पैन, पहचान पत्र और नौकरी से जुड़े डॉक्यूमेंट लेना, साथ ही लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाना बेहद जरूरी है.

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छोटी-छोटी सावधानियां आपको भविष्य की कानूनी और आर्थिक परेशानियों से बचा सकती हैं. ( Photo: ITG)
छोटी-छोटी सावधानियां आपको भविष्य की कानूनी और आर्थिक परेशानियों से बचा सकती हैं. ( Photo: ITG)

आज के समय में एक्स्ट्रा इनकम के लिए बड़ी संख्या में लोग अपना मकान, फ्लैट या घर का एक कमरा किराए पर देते हैं. यह कमाई का एक अच्छा जरिया है, लेकिन अगर किराएदार चुनते समय थोड़ी भी लापरवाही बरती जाए, तो यही फैसला आगे चलकर बड़ी कानूनी और आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है. कई बार लोग जल्दबाजी में या बिना पूरी जांच-पड़ताल किए किसी भी व्यक्ति को किराए पर रहने की अनुमति दे देते हैं. बाद में यदि वही किराएदार किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाया जाए, समय पर किराया देना बंद कर दे, मकान खाली करने से इनकार कर दे या पड़ोसियों के लिए परेशानी खड़ी करे, तो मकान मालिक को भी पुलिस, कोर्ट और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है. 

इसलिए किसी भी व्यक्ति को किराए पर रखने से पहले उसकी पहचान की सही तरीके से जांच करना, जरूरी दस्तावेज लेना, पुलिस वेरिफिकेशन कराना और लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाना बेहद जरूरी माना जाता है. थोड़ी-सी सावधानी आपको भविष्य की बड़ी से बचा सकती है. किसी भी नए किराएदार को घर देने से पहले उसमुसीबतों का पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएं. कई राज्यों और शहरों में यह अनिवार्य भी है. पुलिस वेरिफिकेशन के जरिए किराएदार की पहचान और उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाती है. इससे भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी परेशानी से बचने में मदद मिलती है. अगर किसी कारण से किराएदार के खिलाफ कोई मामला सामने आता है और मकान मालिक ने पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया होता, तो कई मामलों में उसे भी पूछताछ या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए इस प्रक्रिया को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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किराएदार से कौन-कौन से डॉक्यूमेंट लें?
किराएदार को घर देने से पहले आधार कार्ड की कॉपी, पैन कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट साइज फोटो, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी, स्थायी पते का प्रमाण, जहां नौकरी करते हैं, वहां की कंपनी का नाम, ऑफिस का पता और आईडी कार्ड की कॉपी (यदि नौकरीपेशा हैं), यदि छात्र हैं तो कॉलेज या संस्थान का पहचान पत्र और स्थानीय अभिभावक का संपर्क नंबर अपने पास रखें.  इन सभी दस्तावेजों की फोटोकॉपी लेकर अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखें.

रेंट एग्रीमेंट जरूर बनवाएं
सिर्फ मौखिक बातचीत के आधार पर मकान किराए पर देना बड़ी गलती हो सकती है. हमेशा स्टाम्प पेपर पर लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाएं. इसमें किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, किराया देने की तारीख, बिजली-पानी का बिल, मकान खाली करने का नोटिस पीरियड और अन्य शर्तें साफ-साफ लिखी होनी चाहिए. एग्रीमेंट पर मकान मालिक, किराएदार और दो गवाहों के हस्ताक्षर होना बेहतर माना जाता है. कई राज्यों में रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन भी कराया जाता है.

किराएदार की पूरी जानकारी रखें
सिर्फ डॉक्यूमेंट लेना ही काफी नहीं है. कोशिश करें कि किराएदार के परिवार के सदस्यों, इमरजेंसी कॉन्टेक्ट और उसके स्थायी पते की भी जानकारी अपने पास रखें. यदि वह नौकरी बदलता है या नया मोबाइल नंबर लेता है तो रिकॉर्ड अपडेट कर लें.

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बिना जांच के घर देना पड़ सकता है भारी
कई बार अपराधी या फर्जी पहचान वाले लोग भी किराए पर मकान लेने की कोशिश करते हैं. ऐसे मामलों में अगर मकान मालिक ने पहचान की जांच नहीं की होती, तो पुलिस जांच के दौरान उसे भी परेशानी झेलनी पड़ सकती है. इसलिए जल्दबाजी में किसी को भी मकान किराए पर देने से बचें.

इन बातों का भी रखें ध्यान
किराया हमेशा बैंक ट्रांसफर, UPI या किसी रिकॉर्ड वाले माध्यम से लें. समय-समय पर किराएदार से संपर्क बनाए रखें. एग्रीमेंट खत्म होने पर उसे समय पर रिन्यू कराएं. यदि नया किराएदार आए तो दोबारा पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएं. थोड़ी-सी सावधानी भविष्य की बड़ी कानूनी और आर्थिक परेशानियों से बचा सकती है. इसलिए मकान किराए पर देने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन कराना, जरूरी दस्तावेज लेना और लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाना हर मकान मालिक के लिए सबसे जरूरी कदम माना जाता है.

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