भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से 24 मार्च को एक आदेश जारी किया गया है. इसके तहत खाड़ी देशों से आने वाली गैस सप्लाई को लेकर जो समस्या हो रही है, उसका समाधान सुझाया गया है.
यह आदेश ऊर्जा क्षेत्र में आने वाले सुधारों का एक संकेत है. खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संकट भारत के लिए एक अवसर साबित हो सकता है. इसके तहत घर-घर घरेलू गैस सप्लाई को लेकर नए सिरे से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.
ऊर्जा संकट की क्या है वजह
पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ जाने की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) बंद हो गया है. यह वह संकरा जलमार्ग है जिससे दुनिया की LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का एक बड़ा हिस्सा भारत पहुंचता है.खाड़ी क्षेत्र में लिक्विफैक्शन की सुविधाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं या उन्हें रोक दिया गया है.
खाड़ी देशों में गैस प्रोसेसिंग ठप
इसका मतलब है कि भले ही भारतीय जहाज होर्मुज से से गुजर पा रहे हों, लेकिन खाड़ी देशों से निर्यात के लिए गैस की प्रोसेसिंग कम हो रही है.इससे भारत में LPG और नेचुरल गैस, दोनों की आपूर्ति में गंभीर बाधाएं पैदा हो गई हैं, जिनके लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद है.सीधे शब्दों में कहें तो मिडिल ईस्ट से भारत की गैस सप्लाई बाधित हो गई है, और सरकार ज्यादा घरेलू पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर इंपोर्टेड गैस पर निर्भरता कम करने की पूरी कोशिश कर रही है. इसको लेकर कई आवश्यक कदम उठाए गए हैं.
किन इंफ्रास्ट्रक्चरल सुधारों पर हैं जोर
1. हर जगह, तेजी से गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है. सरकार प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों के नेटवर्क का तेजी से विस्तार करना चाहती है, जो बड़े ट्रांसमिशन लाइनों से लेकर घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचते हैं. सरकार इसे बड़े ट्रांसमिशन लाइनों से लेकर हर एक घर के कनेक्शन तक पहुंचाना चाहती है.
2. वर्तमान में, पाइपलाइन बिछाने की कोशिश कर रही कंपनियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसमें विभिन्न अधिकारियों से कई तरह के एप्रूवल लेना, बहुत अधिक फी और चार्जेज जैसी चीजें शामिल होती हैं. इसके अलावा
जमीन, रेसिडेंशियल इलाकों और हाउसिंग सोसाइटियों (RWA) तक गैस कंपनियों को पाइप लाइन बिछाने से रोक दिया जाता है. नए आदेश के मुताबिक, राष्ट्रीय हित में अब इन सभी बाधाओं को दूर किया जा रहा है.
3. LPG इस्तेमाल करने वालों को भी पाइप वाली गैस (PNG) कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. देश में ऐसे इलाकों में भी LPG सिलेंडर का इस्तेमाल करते किया जाता है, जहां पाइपलाइन वाली गैस उपलब्ध है. यह या तो आदत की वजह से हो रहा है या फिर इसलिए क्योंकि पाइपलाइनें उन तक पहुंची ही नहीं हैं. ऐसे में सरकार लोगों को LPG (जो आयातित सप्लाई पर ज्यादा निर्भर है) से हटाकर, देश के भीतर ही वितरित होने वाली प्राकृतिक गैस (PNG) की ओर ले जाना चाहती है.
4. अलग-अलग राज्यों और शहरों में अलग-अलग नियमों के बजाय, यह आदेश पूरे भारत में गैस पाइपलाइन बिछाने, बनाने, चलाने और उनका विस्तार करने के लिए एक केंद्रीय कानूनी ढांचा तैयार करता है.
इससे क्या फायदा होगा?
हाउसिंग सोसाइटी/RWA अब किसी गैस पाइपलाइन कंपनी को पाइप बिछाने से नहीं रोक सकेगी. पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के कनेक्शन अब ज़्यादा घरों तक तेजी से पहुंच सकेंगे. सरकार एनर्जी एफिसिएंशी की तरफ आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है, ताकि खाड़ी देशों में किसी संकट की स्थिति में भारत के पास खाना पकाने के लिए गैस की कमी न हो.लंबे समय के लिहाज़ से, यह भारत को मिडिल ईस्ट से होने वाली सप्लाई में आने वाली रुकावटों के प्रति कमजोर होने से बचाने की एक पहल है.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से इम्पोर्ट करता है. होर्मुज में रुकावट ने यह साफ कर दिया है कि गैस और तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कितनी नाज़ुक है. यह उपाय असल में सरकार की ओर से यह कहने जैसा है कि हमें घरेलू गैस डिस्ट्रिब्यूशन का बुनियादी ढांचा तुरंत बनाने की जरूरत है और इसे मुमकिन बनाने के लिए हम लालफीताशाही से आने वाली रुकावटों को खत्म कर रहे हैं.
LPG और PNG में क्या फर्क है?
LPG (Liquefied Petroleum Gas) - LPG घर में रखे लाल/नीले सिलेंडर में आती है. यह प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों से बनी होती है, जो प्रेशराइज्ड कर लिक्विड फॉर्म में सिलेंडरों में भरा जाता है. सिलेंडर में भरकर इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है. इसका उत्पादन कहीं और होता है, फिर इसे सिलेंडरों में भरकर, ट्रकों पर लादा जाता है, और हमारे घरों तक पहुंचाया जाता है. चूंकि, यह सिलेंडर में भरा रहता है, इसलिए इसे कहीं भी स्टोर करके रखा जा सकता है. इसका डिस्ट्रिब्यूशन वैसे दूर-दराज के गांवों में भी होता है, जहां कोई गैस पाइपलाइन नहीं है.
LPG कैसे बन रही समस्या
यह ज्यादातर खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE, कुवैत) से आती है. कभी यह सीधे LPG के रूप में भारत पहुंचती है, तो कच्चे तेल के रूप में. कच्चे तेल के रूप में यहां आने पर इसे रिफाइन करके फिर LPG बनाया जाता है. यह पीएनजी की तुलना में थोड़ी महंगी होती है.
PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस)
यह मीथेन गैस है जो सीधे हमारे घरों तक जमीन के नीचे बिछी पाइपों के जरिए पहुंचती है. इसकी सप्लाई ठीक वैसे ही की जाती है, जैसे नल से पानी आता है. बस यह गैस होती है. घरों के किचन में दीवार पर एक मीटर लगा होता है, और इससे निकला एक पाइप स्टोव से जुड़ा होता है. यह कभी भी घर में स्टोर नहीं की जाती. यह अपने सोर्स से सीधे पाइपलाइनों के नेटवर्क के ज़रिए लगातार हमारे घरों तक पहुंचती रहती है.प्रति यूनिट की दर से इसकी खपत का हिसाब रखा जाता है.
PNG का इस्तेमाल क्यों सुविधाजनक है?
सबसे पहली बात कि यह प्रति यूनिट खपत के हिसाब से LPG से काफी सस्ती पड़ती है. इसका अधिकांश उत्पादन भारत में ही होता है. इसके लिए दूसरे देशों पर निर्भरता नहीं होती है. यह LPG के मुकाबले ज्यादा साफ तरीके से जलती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है.
LPG के दो सोर्स हैं
1. तेल रिफाइनरियां - जब कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और केरोसिन बनाया जाता है, तो LPG एक बायप्रोडक्ट के तौर पर अलग हो जाती है. भारत की अपनी रिफाइनरियां (IOC, BPCL, HPCL) इसी तरह कुछ LPG बनाती हैं.
2. प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग - जब जमीन से प्राकृतिक गैस निकाली जाती है, तो उसमें प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे भारी तत्व मिले होते हैं. इन्हें अलग कर लिया जाता है और फिर इससे LPG बनाए जाते हैं.
दूसरे देशों से आती है LPG
भारत घरेलू तौर पर पर्याप्त LPG नहीं बनाता है. यह ज्यादातर LPG आयात करता है .मुख्य रूप से सऊदी अरब (Saudi Aramco) से, जिसे 'ऑटोगैस/LPG कार्गो' कहा जाता है. यह जहाजों से कांडला, कोच्चि और हल्दिया जैसे बंदरगाहों पर पहुंचता है, और फिर इसे सिलेंडर में भरकर बांटा जाता है.
PNG का उत्पादन कैसे होता है?
1. घरेलू गैस क्षेत्र
भारत के अपने गैस भंडार हैं, जिनमें सबसे मशहूर आंध्र/ओडिशा तट के पास स्थित KG बेसिन (रिलायंस, ONGC) हैं. इसके अलावा राजस्थान, गुजरात के खंभात बेसिन और पूर्वोत्तर में भी गैस क्षेत्र हैं. हालांकि, घरेलू उत्पादन कई सालों से घट रहा है या स्थिर बना हुआ है, और यह मांग को पूरा नहीं कर पाता.
2. आयातित LNG
यह खाड़ी देशों से जुड़ा हुआ है. कतर, UAE और अन्य देश प्राकृतिक गैस को बहुत ज्यादा ठंडा करके (-162°C तक) उसे लिक्विड गैस (LNG) में बदल देते हैं, जिससे उसका वॉल्यूम घटकर 1/600वां हिस्सा रह जाता है. इस लिक्विड को विशेष LNG टैंकर जहाजों में भरा जाता है और फिर भारत पहुंचाया जाता है.इस LNG को रीगैसिफिकेशन टर्मिनलों (दाहेज, हजीरा, कोच्चि, दाभोल) पर उतारा जाता है और वापस गैस में बदला जाता है. फिर पाइपलाइनों में पंप कर दिया जाता है.
खाड़ी देशों में ठप हो गए हैं लिक्विफिकेशन संयंत्र
अब जब खाड़ी देशों में लिक्विफिकेशन फैसिलिटीज जंग की वजह से बंद हो गए हैं तो उसका सीधा यही मतलब होता है कि सप्लाई के लिए गैस को लिक्विड फॉर्म में नहीं बदला जा रहा.
सरकार PNG नेटवर्क क्यों बना रही है?
1. ऊर्जा सुरक्षा- मौजूदा संकट इस बात को साबित करता है कि अगर आप उन सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं जो जहाज से एक चोकपॉइंट (होर्मुज) से होकर आते हैं, तो किसी भी रुकावट की वजह से लाखों लोग खाना पकाने के ईंधन से वंचित रह जाते हैं. एक पाइपलाइन नेटवर्क जिसे कई स्रोतों (घरेलू फ़ील्ड, अलग-अलग इंपोर्ट टर्मिनल, अलग-अलग देश) से सप्लाई मिल सकती है, वह कहीं ज़्यादा मज़बूत होता है.
2. कम कीमत - PNG उपभोक्ताओं के लिए काफी सस्ती है. LPG में सिलेंडर, ट्रक, बॉटलिंग प्लांट और डीलर शामिल होते हैं और इन सभी से लागत बढ़ जाती है. PNG में, एक बार जब पाइप आपके घर तक पहुंच जाता है, तो सप्लाई चेन के ज़्यादातर हिस्से की जरूरत ही नहीं पड़ती. दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद के कई घरों में लोग बाज़ार दर वाली LPG के मुकाबले PNG पर पहले से ही 30–40% कम खर्च करते हैं.
3. सुविधा और सुरक्षा- पीएनजी कनेक्शन लग जाने से सिलेंडर की डिलीवरी का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी. खाना बनाते समय गैस खत्म होने की चिंता नहीं, और न ही अपनी रसोई में दबाव वाले सिलेंडर रखने की जरूरत होगी.
4. LPG सब्सिडी का बोझ कम करना - सरकार करोड़ों परिवारों को सब्सिडी पर LPG देती है (जैसे उज्ज्वला योजना और घरेलू सिलेंडर की कीमतें). लोगों को PNG पर शिफ्ट करने से, समय के साथ सरकार पर पड़ने वाला यह आर्थिक बोझ कम हो जाता है.
5. स्वच्छ ऊर्जा - प्राकृतिक गैस, LPG की तुलना में अधिक स्वच्छ रूप से जलने वाला ईंधन है और कोयले या लकड़ी की तुलना में कहीं अधिक स्वच्छ है. PNG के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना, भारत के प्रदूषण को कम करने के व्यापक लक्ष्य का भी एक हिस्सा है.
क्या PNG दूसरे देशों पर निर्भरता को कम करेगी?
भारत की खाड़ी देशों से होने वाले गैस आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी. लेकिन यह मामला थोड़ा पेचीदा है.
- PNG नेटवर्क को घरेलू गैस क्षेत्रों जैसे KG बेसिन, राजस्थान, गुजरात से गैस की आपूर्ति की जा सकती है. पाइपलाइन के बुनियादी ढांचे में विस्तार से घरेलू गैस की खोज और उत्पादन को बढ़ावा मिलता है.
- भारत खाड़ी देशों के अलावा अन्य सोर्स से गैस सप्लाई के सौदे करने में सक्रिय रूप से जुटा हुआ है. जैसे अमेरिका (सबाइन पास और फ्रीपोर्ट टर्मिनलों से अमेरिकी LNG), ऑस्ट्रेलिया (गॉर्गन, इचथिस), रूस (आर्कटिक LNG), और मोजाम्बिक. एक मजबूत पाइपलाइन ग्रिड का मतलब है कि आप किसी भी आयात टर्मिनल से गैस प्राप्त कर सकते हैं, न कि केवल खाड़ी देशों के सोर्स से.
- LPG सिलेंडरों का इस्तेमाल कम करने से सऊदी अरब और UAE से होने वाले LPG आयात पर निर्भरता सीधे तौर पर कम हो जाती है.
घरेलू गैस जरूरतों को पूरा करने की चुनौतियां और सीमाएं
भारत के घरेलू गैस भंडार सीमित हैं. नई खोजों के बावजूद भी, भारत आने वाले समय में गैस का शुद्ध आयातक ही बना रहेगा. पूरे देश में PNG नेटवर्क बनाने में दशकों का समय और बहुत ज़्यादा निवेश लगता है. 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' यानी हर घर, हर गांव तक पाइप पहुंचाना बेहद मुश्किल काम है.
समुद्री मार्ग पर निर्भरता
LNG आयात टर्मिनलों के लिए अभी भी जहाजों और समुद्री रास्तों की जरूरत होती है. भले ही गैस अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया से आए, वह समुद्र के रास्ते LNG के रूप में ही पहुंचती है. यह एक अलग तरह की समुद्री कमजोरी है, हालांकि यह होर्मुज जितनी गंभीर नहीं है.
ग्रामीण भारत के कई हिस्से इतने ज़्यादा फैले हुए हैं कि वहां पाइपलाइन बिछाना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है. इसलिए, इन इलाकों में LPG सिलेंडर लंबे समय तक जरूरी बने रहेंगे.भारत में गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है. भले ही घरेलू उत्पादन में सुधार हो, लेकिन कुल मिलाकर आयात बढ़ने की ही संभावना है, भले ही प्रतिशत के हिसाब से हिस्सेदारी में बदलाव आ जाए.
फिर भी PNG नेटवर्क का विस्तार होगा फायदेमंद
PNG नेटवर्क एक स्मार्ट और जरूरी सुधार है, लेकिन यह एक बड़ी पहेली का सिर्फ एक हिस्सा है. यह खाड़ी देशों पर निर्भरता को कम करता है. खासकर सऊदी अरब से आने वाले LPG सिलेंडरों पर निर्भरता कम होती है और ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करता है जिसे अलग-अलग सोर्स से गैस मिल सके.
फिर भी भारत आयातित गैस पर निर्भर रहेगा. इसका मकसद इस निर्भरता को पूरी तरह से खत्म करना नहीं, बल्कि इसे कम केंद्रित, कम नाज़ुक बनाना और कई सप्लायर्स और रास्तों में फैलाना है.होर्मज संकट ने असल में भारत को उस इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बनाने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसे उसे कई साल पहले ही तेजी से बना लेना चाहिए था.