scorecardresearch
 

जब AC नहीं थे तो कैसे होते थे दुबई के शेखों के घर? भयंकर गर्मी में ऐसे रहते थे एकदम ठंडे

दुबई में काफी तेज गर्मी पड़ती है और जब एसी नहीं होते थे तो वहां के अमीर लोग कैसे घरों में रहते थे और कैसे उनके घर ठंडे रहते थे.

Advertisement
X
दुबई में पहले कोरल के इस्तेमाल से घर बनाए जाते थे. (Photo: Pexels)
दुबई में पहले कोरल के इस्तेमाल से घर बनाए जाते थे. (Photo: Pexels)

जब भी गर्मी की बात होती है तो दुबई और अरब के देशों की बात जरूर होती है. दरअसल, वहां गर्मी में तापमान आसमान में रहता है और रेगिस्तानी इलाकों में हालात बहुत ज्यादा खराब हो जाते हैं. अब तो दुबई जैसे देशों में एसी के सहारे गर्मी से बच जाते हैं, लेकिन सोचिए उस वक्त क्या होता होगा जब एसी इतनी चलन में नहीं था. 

ऐसे में सवाल है कि फिर उस वक्त दुबई के शेख और अमीर लोग किस तरह गर्मी से बचा करते थे. एसी ना होने पर गर्मी में उनके घर कैसे ठंड रहते थे और इतनी प्रचंड गर्मी का कैसे सामना करते थे. तो समझते हैं उनके घरों के उस सीक्रेट के बारे में, जिसके जरिए दुबई के शेखों के घर ठंडे रहते थे...

वहां कैसे होते थे घर?

अगर रेगिस्तान में रहने वाले लोगों की बात करें तो 1800 के आसपास सर्दी में खानाबदोश बेदुइन आबादी का अधिकांश हिस्सा जानवरों की खाल से बने तंबुओं में रहता था, जो आमतौर पर उन जगहों के पास होते थे जहां उनके ऊंट चर सकते थे. लेकिन, गर्मी आने पर वे ताड़ के पत्तों से बने घरों का निर्माण करते थे ताकि गर्मी से बचाव हो सके. इन ताड़ के पत्तों से बने घरों को बैत अरीश कहा जाता था और गर्मी में लू और तेज पारे से बचाते थे, काफी हवादार भी थे. साथ ही इन्हें थोड़ा ऊंचाई पर बनाया जाता था ताकि हवा आसानी से आ सके. इन्हें ताड़ के तनों से बनाया जाता था.

Advertisement

फिर जब लोग पक्के मकानों में रहने लगे तो वहां बैत मोरजान नाम के घर बनाते थे. ये घर कोरल या समुद्री पत्थरों से बने थे. इसमें चूना पत्थर, मिट्टी और सीपियों से बना गारा भी मिलाया जाता था. इससे घर ठंडे रहते थे. कोरल और चूना पत्थर से बने इन घरों को बैत मोरजान कहा जाता था. उस वक्त दुबई में पैसे वाले लोग इस तरह के घर ही बनाए करते थे, जिसमें कई परतों में कोरल आदि के लेप भी किया जाता था. 

क्या होता है कोरल?

कोरल छोटे-छोटे जीव होते हैं जो समुद्र में समूह बनाकर रहते हैं. ये अपने चारों ओर कैल्शियम कार्बोनेट का कठोर ढांचा बनाते हैं. लंबे समय बाद ये पत्थर की शेप ले लेता है. ऐसे में वहां के लोग इन कोरल को जुटाकर घर बनवाते थे या फिर अपने घरों पर इसका लैप करते थे. इससे घर ठंडे रहते थे.

जमीन में दबे हुए घर 

इस वजह से यूएई के पारंपरिक रेगिस्तानी घरों में एयर कंडीशनिंग के बिना भी ठंडक बनी रहती थी. ये ठंडी हवा को इन रेगिस्तानी घरों के अंदर रोककर रखते थे और एक अनुकूल तापमान बनाए रखने में मदद करते थे. इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी थे, जो इन घरों को आधा जमीन में भी बनाया जाता था, ताकि वे ठंडे रहें. 

Advertisement

जब आगे तकनीक और आयात थोड़ा आसान हुआ तो यहां विंड टावर का इस्तेमाल किया जाने लगा. इन्हें बरजिल भी कहा जाता था. ये खास तरह की मीनारें होती थीं, जिनसे हवा को घर में प्रवेश करवाया जाता था और घर ठंडा रहता था. दरअसल, घर के अंदर कुछ  मीनारें बनाई जाती थी और उन मीनारों को ऐसे बनाया जाता था कि उनके बीच में आने वाली हवाएं सीधे घर में घुसती थीं और वो ठंडी होती थी. इससे तापमान 15 से 20 डिग्री तक कम हो जाता था. जिन लोगों के पास पैसे ज्यादा नहीं थे, वो लकड़ी से मीनारें बनवाते थे जबकि जिनके पास थे वो कोरल के लैप वाली मीनारें बनवाते थे. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement