scorecardresearch
 

देश में पहली बार! उत्तराखंड हाई कोर्ट ने खोला अधीनस्थ जजों पर शिकायतों का डेटा

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जानकारी सार्वजनिक की है. इस कदम से न्याय प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि अन्य उच्च न्यायालयों ने ऐसी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था.

Advertisement
X
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मिसाल कायम की. (Photo: ITG)
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मिसाल कायम की. (Photo: ITG)

उत्तराखंड हाई कोर्ट (नैनीताल) ने पारदर्शिता की दिशा में एक ऐतिहासिक मिसाल कायम की है. अब आम जनता 'सूचना का अधिकार' (RTI) के तहत उन न्यायिक अधिकारियों के बारे में जानकारी ले सकेगी जिनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं. ऐसा करने वाला ये देश का पहला हाई कोर्ट बन गया है.

उत्तराखंड हाई कोर्ट के सतर्कता प्रकोष्ठ की उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, 1 जनवरी 2020 से 15 अप्रैल 2025 के बीच राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों और जजों के खिलाफ कुल 258 शिकायतें दर्ज हुईं. इनमें से चार मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है. हालांकि किसी भी अधिकारी का नाम या व्यकितगत डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की गई है.

इससे पहले दूसरे हाई कोर्ट ने इस तरह की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था. ऐसे में नैनीताल हाई कोर्ट का ये कदम देश भर में एक नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.

ये जानकारी हल्द्वानी के मुख्य वन संरक्षक (रिसर्च) संजीव चतुर्वेदी के दायर RTI आवेदन के बाद सामने आई. उन्होंने न्यायिक अधिकारियों पर लागू नियमों, शिकायतों की संख्या, कार्रवाई और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: आंध्र प्रदेश के सांसद को RTI के जरिए किया ब्लैकमेल, चाकू की नोक पर पीए को लूटा

पहले 'गोपनीय' बताकर रोकी गई थी सूचना 

लोक सूचना अधिकारी ने शुरुआत में शिकायतों को संवेदनशील और गोपनीय बताते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था. उन्होंने इसके लिए मुख्य न्यायाधीश की अनुमति जरूरी बताई थी. इसके बाद मामला राज्य सूचना आयोग में पहुंचा. राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सिर्फ 'गोपनीय' कहकर सूचना रोकी नहीं जा सकती.

आयोग ने माना कि शिकायतों की संख्या और उनके निस्तारण की प्रक्रिया सार्वजनिक हित से जुड़ी है. आयोग ने एक माह के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. इसके बाद 11 फरवरी को लोक सूचना अधिकारी और संयुक्त रजिस्ट्रार एच.एस. जीना की ओर से अपीलकर्ता को सूचना दे दी गई.

पारदर्शिता की दिशा में अहम पहल

सीनियर एडवोकेट और याचिकर्ता के वकील सुदर्शन गोयल ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी और इसे उत्तराखंड हाई कोर्ट की एक सराहनीय पहल बताया. उनका कहना है कि न्याय प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में ये एक अहम कदम है. उन्होंने कहा कि जहां कई दूसरे उच्च न्यायालयों ने इस तरह की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया, वहीं उत्तराखंड हाई कोर्ट ने खुलापन दिखाते हुए नई मिसाल पेश की है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: नैनीताल हाई कोर्ट की शिफ्टिंग को लेकर उत्तराखंड में बवाल क्यों है? समझिए पूरा मामला

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, दिल्ली और चेन्नई जैसे उच्च न्यायालयों ने ऐसी सूचनाएं देने से मना किया था. हालांकि उत्तराखंड हाई कोर्ट संभवतः देश का पहला उच्च न्यायालय बन गया है जिसने इस तरह की जानकारी सार्वजनिक की है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement