scorecardresearch
 

उत्तराखंड में फॉरेस्ट स्टाफ को मिलेगी इजरायली सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग, हिंसक हमलों से निपटने की तैयारी

उत्तराखंड में पिछले 3 दशकों में ड्यूटी के दौरान करीब 60 फॉरेस्ट कर्मियों की जान जा चुकी है. इसी खतरे को देखते हुए फील्ड स्टाफ को फिजिकल अटैक और हथियारों से लैस हमलावरों का सामना करने के लिए तैयार करने का फैसला किया गया है.

Advertisement
X
करीब 170 फॉरेस्टर और फॉरेस्ट रेंजर को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई जा रही है. (Photo: ITG)
करीब 170 फॉरेस्टर और फॉरेस्ट रेंजर को ट्रेनिंग देने की योजना बनाई जा रही है. (Photo: ITG)

उत्तराखंड के जंगलों में अवैध कटाई, रेत खनन, शिकार और वन अतिक्रमण में शामिल लोगों का सामना करते समय हिंसक हमलों से निपटने के लिए फॉरेस्ट स्टाफ को इजरायली कॉम्बैट सिस्टम 'क्राव मागा' (Krav Maga) की स्पेशल सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग दी जाएगी. 

उत्तराखंड फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग एकेडमी (UFTA) इसे करिकुलम में शामिल कर नवंबर से ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रही है. एकेडमी दो महीने के प्रोग्राम के दौरान करीब 170 फॉरेस्टर और फॉरेस्ट रेंजर को ट्रेनिंग देने की योजना बना रही है. 

बताया जा रहा है कि राज्य में पिछले 3 दशकों में ड्यूटी के दौरान 60 फॉरेस्ट कर्मियों की जान जा चुकी है. इसी खतरे को देखते हुए एकेडमी ने अपने फील्ड स्टाफ को फिजिकल अटैक और हथियारों से लैस हमलावरों का सामना करने के लिए तैयार करने का फैसला किया है.

UFTA के डायरेक्टर संजीव चतुर्वेदी ने कहा, 'इस प्रोग्राम में उत्तराखंड और पंजाब के 130 फॉरेस्टर शामिल होंगे, जो अभी एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहे हैं. जम्मू-कश्मीर, मेघालय, मिजोरम और मध्य प्रदेश के 40 फॉरेस्ट रेंजर के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है.'

Advertisement

चतुर्वेदी ने कहा, 'ट्रेनिंग नवंबर से शुरू होकर दो महीने तक चलेगी.'

ये सेशन सर्टिफाइड'क्राव मागा' इंस्ट्रक्टर कराएंगे, जिन्होंने पहले हैदराबाद में नेशनल पुलिस एकेडमी और मुंबई में पुलिस और कस्टम कर्मियों को ट्रेनिंग दी है. अधिकारियों के मुताबिक, भारत में अभी इस तकनीक के केवल 5-6 सर्टिफाइड इंस्ट्रक्टर ही मौजूद हैं.

UFTA के डायरेक्टर संजीव चतुर्वेदी के बताए गए आंकड़ों के अनुसार, तस्करों और अन्य असामाजिक तत्वों के साथ मुठभेड़ में 20 फॉरेस्ट पर्सनल की जान गई. भीषण जंगल की आग में 18 और लोगों की मौत हुई, जबकि पेट्रोलिंग के दौरान जंगली जानवरों के हमलों में भी इतनी ही संख्या में लोगों की जान गई. तीन और मौतें प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी थीं.

इन आंकड़ों में कुल 59 मौतें शामिल हैं, जो पिछले 3 दशकों में उत्तराखंड में ड्यूटी के दौरान मारे गए लगभग 60 फॉरेस्ट पर्सनल के एकेडमी के अनुमान से काफी हद तक मेल खाते हैं. ये आंकड़े फ्रंटलाइन स्टाफ के सामने आने वाले अलग-अलग खतरों को उजागर करते हैं, इनमें हिंसक टकराव और जंगली जानवरों से मुठभेड़ से लेकर जंगल की आग और प्राकृतिक आपदाओं जैसी मुश्किल स्थिति शामिल है.

IFS अधिकारी चतुर्वेदी ने  बताया, 'ये आंकड़े दिखाते हैं कि हमारे फील्ड स्टाफ के लिए जोखिम कितने गंभीर हैं.' उन्होंने कहा कि दो महीने का यह कोर्स पार्टिसिपेंट्स को प्रेशर में सही रिस्पॉन्स देने में मदद करेगा.

Advertisement

बता दें, 1979 में एस्टेब्लिश हुई उत्तराखंड फॉरेस्ट्री ट्रेनिंग एकेडमी दशकों से फॉरेस्ट पर्सनल को ट्रेनिंग दे रही है. क्राव मागा को शामिल करने का यह फैसला एनफोर्समेंट वर्क के दौरान सामने आने वाले खतरों से निपटने के लिए स्टाफ को बेहतर तरीके से तैयार करने की एक कोशिश है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement