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1915 में काबुल में खुद को क‍िया था राष्ट्रपति घोषित, जान‍िए राजा महेंद्र प्रताप सिंह के क‍िस्से

1915 में काबुल में खुद को क‍िया था राष्ट्रपति घोषित, जान‍िए राजा महेंद्र प्रताप सिंह के क‍िस्से

अद्भुत और अलबेले राजा थे महेंद्र प्रताप. उनके तमाम किस्से मशहूर हैं. उनका विवाह जींद रियासत की राजकुमारी से हुआ था. दो स्पेशल ट्रेनों से उनकी बारात गई थी. जब भी राजा साहब ससुराल जाते थे तो उन्हें 11 तोपों की सलामी दी जाती थी. राजा महेंद्र प्रताप ने स्कूल-कॉलेज के लिए दिल खोलकर जमीनें दान कीं. क्रांतिकारी इतने कि 1915 में काबुल में उन्होंने भारत के अंतरिम सरकार का ऐलान कर दिया और खुद को घोषित कर दिया राष्ट्रपति. हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप सिंह की बहादुरी और दिलदारी की कहानियां कही जाती हैं. जान‍िए राजा महेंद्र प्रताप सिंह के क‍िस्से.

Raja Mahendra Pratap Singh who was born into a royal family in the Hathras district of Uttar Pradesh in 1886, Singh was a social reformer. He was a great freedom fighter and Marxist revolutionary and an alumnus of the Muhammadan Anglo-Oriental Collegiate School, later called Aligarh Muslim University (AMU), he was active in the political arena from a young age. Influenced by the speeches of Dadabhai Naoroji and Bal Gangadhar Tilak, Raja Mahendra Pratap Singh became deeply involved with the Swadeshi movement. He also participated in the 1911 Balkan War with his fellow students at the college. In 1925 he declared himself as the President of Kabul. Watch this video.

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