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9 साल, 3 सरकार, 3 डिजाइन, काशी को जाम फ्री करने वाला पुल यूं बना जानलेवा

काशी को जाम से निजात दिलाने के लिए 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने चौकाघाट लकड़ी टॉल से लहरतारा कैंसर हॉस्पिटल के बीच फ्लाई-ओवर का शिलान्यास किया था.

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वाराणसी में घटनास्थल की तस्वीर
वाराणसी में घटनास्थल की तस्वीर

उत्तर-प्रदेश के वाराणसी में मंगलवार को निर्माणाधीन पुल का बीम गिरने से जानलेवा हादसा हो गया, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई. जबकि 11 लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं.

यूपी सरकार ने हादसे के लिए जिम्मेदार मानते हुए प्रोजेक्ट मैनेजर समेत 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है. साथ ही एक जांच कमेटी भी गठित कर दी है. लेकिन इस हादसे के पीछे सिस्टम के साथ सरकारों की सुस्ती भी नजर आ रही है.

2009 में हुआ था पुल का शिलान्यास

काशी को जाम से निजात दिलाने के लिए 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार ने चौकाघाट लकड़ी टॉल से लहरतारा कैंसर हॉस्पिटल के बीच 2680 मीटर के करीब लंबाई वाले फ्लाई-ओवर का शिलान्यास किया था.

हिंदी अखबार हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक, यह फ्लाई-ओवर अंधरापुल-रोडवेज-कैंट स्टेशन चौराहा होते हुए कैंसर अस्पताल तक बनना था. लेकिन निर्माण एजेंसी ने रोडवेज व पिलर स्टेशन के सामने पिलर खड़ा करने में समस्या का हवाला देते हुए फ्लाई-ओवर को रोडवेज के सामने ही उतार दिया और इस तरह प्रस्तावित दूरी से कम फ्लाई-ओवर का निर्माण 2013 तक पूरा कर लिया गया.

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2012 में यूपी में सपा की सरकार आई और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने. सितंबर 2015 में तत्कालीन पीडब्लूडी मंत्री शिवपाल यादव ने अंधरापुल-कैंट होते हुए कमलापति इंटर कॉलेज से आगे तक 1629 मीटर लंबा फ्लाई-ओवर बनाने का शिलान्यास किया. इसका निर्माण दिसंबर 2018 यानी इसी साल के आखिर तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन यूपी में योगी सरकार आने के बाद पुल का काम जून महीने तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया.

यानी 2009 में बसपा सरकार के बाद 2012 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा सरकार और 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सरकार बनी. लेकिन अब तक इस पूरे पुल को बनाया नहीं जा सका है. हालांकि, अभी जिस पुल पर हादसा हुआ है, उसका निर्माण कार्य अक्टूबर 2015 में ही शुरु हुआ था. फ्लाई-ओवर के निर्माण का अधिकतर काम पूरा हो चुका है और अब आखिरी चरण का काम चल रहा था.

डिजाइन पर भी उठे सवाल

बताया जा रहा है कि इस निर्माणाधीन पुल के डिजाइन को लेकर जुलाई, 2017 में ही सवाल किए गए थे. ऐसा कहा गया कि फ्लाई-ओवर का डिजाइन भारी वाहनों के मुफीद नहीं है और बड़ी मुसीबत बन गया है.

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