कोरोना के दौरान हुआ लॉकडाउन कभी वरदान भी साबित हो सकता है, यह शायद ही किसी ने सोचा हो. लेकिन यूपी के बाराबंकी में दूसरे राज्यों से लौटे प्रवासी मजदूरों ने मृतप्राय हो चुकी कल्याणी नदी को अपने मेहनत से पुनर्जीवित कर दिया. यानि जो नदी अपना दम तोड़ रही थी, वह पुनर्जीवित होकर कल-कल करते हुए बह रही है.
बाराबंकी के मवैया गांव से गुजरने वाली इस नदी के 2.6 किलोमीटर इलाके में जहां नदी लगभग खत्म हो रही थी, वहां कल्याणी नदी अपने पुराने स्वरूप में लौट आई है. लॉकडाउन में लौटे प्रवासी मजदूर और मनरेगा के तहत काम कर रहे दूसरे मजदूरों ने मिलकर इसे 80 दिनों में पुनर्जीवित कर दिया है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कल्याणी नदी के पुनर्जीवित होने की चर्चा की थी.
बाराबंकी और सीतापुर के बॉर्डर से निकलकर अयोध्या तक जाने वाली 173 किलोमीटर लंबी कल्याणी नदी इस इलाके में दम तोड़ चुकी थी, लेकिन बाराबंकी प्रशासन ने पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए इसका कायाकल्प कर दिया. अब पूरे नदी के प्रवाह को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो रही है.
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बाराबंकी के मवैया गांव में कल्याणी नदी के किनारे काम करते मनरेगा के मजदूर सुबह से शाम तक दिखाई देंगे. दरअसल इन मजदूरों में एक बड़ी तादाद उन प्रवासी लोगों की है जो लॉकडाउन में अपने गांव आए, लेकिन जब सब तरफ लॉकडाउन था, काम बंद था तब प्रशासन ने उन्हें इस नदी को पुनर्जीवित करने का काम सौंपा. नतीजा यह हुआ कि 80 दिनों के बाद यह नदी अपने प्रवाह में बह चली है. आज तक टीम ने उन प्रवासी मजदूरों से भी बातचीत की जो केरल, सूरत, मुंबई, कानपुर, बिजनौर ऐसे जगहों से लॉकडाउन में अपने गांव लौटे और जिन्होंने अपनी मेहनत से इस नदी को फिर से पुनर्जीवित कर दिया.