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शिया वक्फ का घंटाघर, सुन्नी प्रदर्शनकारी दे रहे धरना, वसीम रिजवी ने लिखी चिट्ठी

वसीम रिज्वी ने कहा है कि घंटाघर हुसैनाबाद ट्रस्ट के अधीन आता है, जो शिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति है. इस संपत्ति पर सुन्नी प्रदर्शनकारी धरना कर रहे हैं, इसलिए धरना खत्म कराना चाहिए.

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रिजवी ने घंटाघर में विरोध प्रदर्शन खत्म करने की अपील की है (फाइल फोटो)
रिजवी ने घंटाघर में विरोध प्रदर्शन खत्म करने की अपील की है (फाइल फोटो)

  • विरोध प्रदर्शन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताया
  • घंटाघर में कई दिनों से CAA के खिलाफ प्रदर्शन जारी

लखनऊ के घंटाघर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है. इस बीच शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर धरना प्रदर्शन को खत्म कराने की अपील की है. शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने तर्क दिया कि घंटाघर हुसैनाबाद ट्रस्ट के अधीन आता है, जो शिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति है. इस संपत्ति पर सुन्नी प्रदर्शनकारी धरना कर रहे हैं, इसलिए धरना खत्म कराना चाहिए.

वसीम रिजवी ने मीडिया से बात करते हुए कहा "शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के तहत हुसैनाबाद ट्रस्ट से संबंधित भूमि सुन्नी समुदाय के प्रदर्शनकारियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है. प्रदर्शनारी कुछ दिनों से सीएए के खिलाफ विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री , गृह मंत्री अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देकर राजनीति कर रहे हैं. यह सब कांग्रेस और 'टुकड़े टुकड़े गैंग' के सदस्यों की सोची समझी साजिश का हिस्सा है."

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प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग करते हुए रिजवी ने कहा, हुसैनाबाद ट्रस्ट से जुड़ी जमीन कोई विरोध स्थल नहीं है और इसे खाली कराने के लिए डीएम को पत्र लिखा गया है. उस भूमि पर इस तरह के विरोध की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जो कि हुसैनाबाद ट्रस्ट की संपत्ति है और जमीन से संबंधित मामला उच्च न्यायालय में भी लंबित है. हमने ठाकुरगंज पुलिस स्टेशन में एक लिखित दी है ताकि इस अवैध प्रदर्शन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सके.

लखनऊ के घंटाघर को दूसरा '' कहा जा रहा है क्योंकि यहां कई दिनों से सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है. यूपी पुलिस ने इसे बंद कराने की काफी कोशिश की है और इस बाबत अपील भी की गई है लेकिन प्रदर्शन जारी है. बता दें, दिल्ली के शाहीन बाग में पिछले कई दिनों से सीएए के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

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