गुजरात के सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई और जलस्तर का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. बांध का जलस्तर बढ़ाने के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है. नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े संगठनों की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि अगर जलस्तर बढ़ाया जाता है तो मध्यप्रदेश में 178 और गांव जलसमाधि ले सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट याचिका पर सुनवाई को तैयार है.
इस बार सरदार सरोवर का जलस्तर पहली बार 137.37 मीटर तक पहुंच गया है. गुजरात सरकार चाहती है कि सरदार सरोवर बांध को 138 मीटर तक भरा जाए जो उसका आखिरी स्तर है. कई सामाजिक संगठन इसके विरोध में हैं. नर्मदा बचाओ आंदोलन इसमें अग्रणी है जिसकी अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई है.
गुजरात सरकार की ओर से सरदार सरोवर बांध की उंचाई बढ़ाने के बाद जलस्तर को 138 मीटर से ऊपर ले जाने की चल रही कोशिशों से मध्य प्रदेश के 192 गांव और एक नगर के हजारों परिवार संकट से घिरते जा रहे हैं. 100 गांव तो ऐसे हैं, जहां बांध का बैक वाटर भर रहा है और उन गांवों का अन्य हिस्सों से संपर्क टूट गया है. मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित सरदार सरोवर बांध में 138.68 मीटर तक पानी का जल भराव किया जाना है. जल स्तर के 131 मीटर से ऊपर जाने के बाद से धार, अलिराजपुर और बड़वानी के गांवों में पानी पहुंचने लगा है.
आंदोलनकारियों ने नर्मदा ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि डूब के पहले संपूर्ण पुनर्वास करने की सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है, साथ ही यह सुनिश्चित करना प्रभावितों का हक भी है. बांध में पानी का स्तर 134 मीटर से ऊपर पहुंच चुका है और केंद्र और गुजरात सरकार की ओर से लगातार 32,000 परिवारों को अनदेखा किया जा रहा है.