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Ground Report: अपनी कार-बाइक छोड़ मेट्रो में शिफ्ट हो रही दिल्ली? PM मोदी की अपील के बाद दिखा ऐसा असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद दिल्ली में 'मंडे मेट्रो डे' अभियान शुरू हुआ. दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है. आम जनता ने अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल कम कर मेट्रो को तरजीह दी है, जिससे प्रदूषण और ईंधन की बचत हो रही है.

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दिल्ली में मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ रही है. (Photo- ITGD)
दिल्ली में मेट्रो यात्रियों की संख्या बढ़ रही है. (Photo- ITGD)

देश में बढ़ते ईंधन संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील की थी. इस अपील का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है. सोमवार को राजधानी दिल्ली में 'मंडे मेट्रो डे' की शुरुआत हुई.

इस खास अभियान के तहत आम जनता के साथ-साथ दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और बड़े अधिकारी भी अपनी लग्जरी गाड़ियां छोड़कर मेट्रो में सफर करते नजर आए.

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद जनता को जागरूक करने के लिए मेट्रो से सफर किया. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भी यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सोमवार से 6 नई मेट्रो ट्रेनें पटरियों पर उतार दी हैं. मेट्रो के फेरों में 24 अतिरिक्त चक्कर भी बढ़ाए गए.

आम तौर पर दिल्ली मेट्रो में रोजाना 65 लाख से 70 लाख लोग सफर करते हैं. दिल्ली मेट्रो के बेड़े में कुल 339 ट्रेनें हैं, जो रोजाना 4,472 फेरे लगाती हैं. लेकिन सोमवार से इसमें 24 और अतिरिक्त फेरे जोड़ दिए गए हैं. 

प्रधानमंत्री की इस अपील और दिल्ली सरकार के मंत्रियों के जमीन पर उतरने के बाद दिल्ली की जनता का मूड क्या है, ये जानने के लिए आजतक की टीम ने दिल्ली के कुछ बड़े मेट्रो स्टेशनों का रियलिटी चेक किया. आइए जानते हैं दिल्ली के अलग-अलग कोनों से हमारे संवाददाताओं की ये खास ग्राउंड रिपोर्ट.

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1. नवादा मेट्रो स्टेशन: 'देशहित में अपनी गाड़ी घर छोड़ी'

संवाददाता: मनोरंजन कुमार

पश्चिमी दिल्ली के नवादा मेट्रो स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भारी चहल-पहल देखी गई. यहां हमें कई ऐसे कामकाजी लोग मिले जो पहले अपनी निजी गाड़ियों से चलते थे, लेकिन अब वो मेट्रो का रुख कर चुके हैं.

यात्री विजय ने प्रधानमंत्री के बयान का पूरी तरह समर्थन करते हुए कहा, 'मेरे पास अपनी गाड़ी है, लेकिन अब मैंने उसका इस्तेमाल बहुत कम कर दिया है. ईंधन की बचत और देशहित को ध्यान में रखते हुए मुझे लगता है कि हम सभी को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही इस्तेमाल करना चाहिए.'

गौतम ने बताया, 'जब से प्रधानमंत्री का बयान आया है, लोग बहुत ज्यादा संख्या में मेट्रो की तरफ आ रहे हैं. पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर आम जनता का रुझान वाकई बढ़ा है.'

राम कृष्ण नाम के एक यात्री ने बताया कि वो तो पहले से ही मेट्रो का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री जब खुद इस तरह की अपील करते हैं, तो आम लोगों के दिमाग पर उसका बहुत बड़ा और गहरा असर पड़ता है. हाल के दिनों में मेट्रो यात्रियों की संख्या में जो बढ़ोतरी हुई है, वो इसी का नतीजा है.

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सुरेश ने कहा, 'पीएम मोदी का बयान काफी असरदार साबित हुआ है. मेट्रो के अंदर अब पहले से कहीं ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है. लोगों पर इस अभियान का असर साफ दिखाई दे रहा है.'

यह भी पढ़ें: दिल्ली सरकार के 'मंडे मेट्रो डे' का रियलिटी चेक: मंत्री-अफसर मेट्रो में, दफ्तर के बाहर गाड़ियों की कतार

2. निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन: होंडा सिटी छोड़ मेट्रो की सवारी

संवाददाता:
अमरजीत सिंह

पूर्वी दिल्ली के विकास मार्ग पर स्थित निर्माण विहार मेट्रो स्टेशन पर भी यात्रियों का उत्साह देखने लायक था. यहां मिडिल-क्लास और हाई मिडिल-क्लास नौकरीपेशा लोगों ने अपनी गाड़ियां घरों में खड़ी कर दी हैं.
यात्री राजीव शर्मा ने कहा, 'मैं पहले हर जगह अपनी गाड़ी से ही जाना पसंद करता था. लेकिन जब से मोदी जी ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अपनाने की भावुक अपील की है, तब से मैंने अपनी कार को घर पर ही खड़ा कर दिया है. अब मैं रेगुलर मेट्रो से सफर कर रहा हूं. इससे देश का ईंधन भी बच रहा है और मेरे पैसे भी. यानी देश और आम लोग, दोनों का फायदा है.'

यात्री दीपक दुबे ने कहा, 'मेरे घर पर होंडा सिटी कार खड़ी है. लेकिन मैं उसे निकालकर सड़क पर जाम बढ़ाने और तेल फूंकने के बजाय मेट्रो से ही सफर कर रहा हूं. मेट्रो से चलने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे समय की भी भारी बचत होती है और ईंधन की भी.'

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3. धौला कुआं मेट्रो स्टेशन (साउथ दिल्ली)

संवाददाता: अमरदीप कुमार

दक्षिण दिल्ली का धौला कुआं मेट्रो स्टेशन एक बहुत बड़ा इंटरचेंज हब है, जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के छात्र और भारी संख्या में कॉर्पोरेट कर्मचारी आते हैं. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद लोगों को जागरूक करने के लिए आज मेट्रो का सफर किया.
 
साउथ कैंपस की छात्रा रुचिका ने बताया, 'दिल्ली में जिस तरह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है, उसे देखते हुए लोगों को ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही सहारा लेना चाहिए. प्रदूषण की वजह से दिल्ली वालों को सांस की परेशानी हो रही हैं. ऐसे में अगर हम अब भी नहीं संभले और अपनी गाड़ियों से प्रदूषण फैलाते रहे, तो स्थिति और खराब हो जाएगी.'

मेट्रो यात्री सुकांत ने कहा, 'मेट्रो सफर के लिए यकीनन बहुत अच्छी और आरामदायक है. इससे फ्यूल तो बचता ही है, साथ ही भीषण गर्मी से भी राहत मिलती है. लेकिन मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने के बाद आगे जाने के लिए कनेक्टिंग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा पूरी दिल्ली में अच्छी नहीं है.'

सुकांत ने उदाहरण देते हुए बताया, 'अगर आप कीर्ति नगर मेट्रो स्टेशन से मायापुरी मेट्रो स्टेशन जाना चाहें, तो बीच में कोई सीधी कनेक्टिविटी नहीं मिलती. अगर आप पूरी दिल्ली का चक्कर लगाएंगे, तो आपको कई ऐसे पॉइंट मिलेंगे जहां मेट्रो से उतरने के बाद आगे जाने के लिए सरकारी बसें या कोई सुलभ साधन नहीं मिलता. सरकार को इस लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को सुधारना होगा.'

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साउथ कैंपस में काम करने वाली सुनीता ने मुख्यमंत्री की कोशिशों को तो सराहा, लेकिन नेताओं के इस अंदाज पर थोड़ा तंज भी कसा. उन्होंने कहा, 'हम लोग तो शुरू से ही मिडिल-क्लास हैं और हमेशा मेट्रो से ही सफर करते आ रहे हैं. हमारे लिए ये कोई नई बात नहीं है. कई बार नेता लोग सिर्फ दिखावे के लिए साइकिल, ई-रिक्शा या मेट्रो में बैठ जाते हैं.'

उन्होंने आगे कहा, 'अगर सच में बदलाव लाना है, तो ये दिखावा नहीं बल्कि एक परमानेंट आदत होनी चाहिए. वैसे, दिल्ली में जिस तरह प्रदूषण बढ़ रहा है, जिनके पास बड़ी गाड़ियां हैं, उन्हें भी अपनी शान छोड़कर मेट्रो में आना चाहिए.'

4. राजीव चौक, आईटीओ और मंडी हाउस: दफ्तर जाने वालों का रियलिटी चेक

संवाददाता: मनीषा लाड्डा

सेंट्रल दिल्ली के तीन सबसे व्यस्त स्टेशनों- राजीव चौक, ITO और मंडी हाउस पर हमारी टीम ने दफ्तर जाने वाले यात्रियों और बाहर खड़े ऑटो चालकों से बात की.

पहले तीन यात्रियों ने साफ कहा कि वो रोजाना और रेगुलर मेट्रो से ही सफर करते हैं. गर्मी के इस मौसम में मेट्रो से बेहतर और आरामदायक कोई दूसरा साधन नहीं है, जिससे समय और ईंधन दोनों बचता है.

चौथे यात्री ने एक बेहद दिलचस्प बात बताई, उन्होंने कहा, 'मैं वैसे रोजाना अपनी बाइक से दफ्तर आता हूं. लेकिन हमारे प्रधानमंत्री साहब ने जब खुद देशहित में अपील की है, तो उनकी बात तो माननी ही होगी. आखिर ये देश का सवाल है. जब तक ये विशेष अभियान चल रहा है, तब तक मैं अपनी बाइक घर पर रखकर सिर्फ मेट्रो से ही दफ्तर आऊंगा.'

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पांचवें यात्री ने बताया कि वो प्रधानमंत्री की अपील से प्रभावित होकर आज मेट्रो के बजाय बस से सफर करके दफ्तर पहुंचे हैं. छठे यात्री ने कहा, 'मेरी कंपनी ने मुझे आने-जाने के लिए गाड़ी और स्कूटी दे रखी है. लेकिन आज मेरे बॉस ने खुद मुझसे कहा कि तुम प्रदूषण और तेल संकट को देखते हुए स्कूटी से मत आओ, बल्कि दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करो. अब मैंने तय किया है कि मैं रोजाना ऐसे ही मेट्रो से ट्रैवल करूंगा. ये वाकई पीएम की अपील का असर है.'

सातवें यात्री ने बताया कि पीएम की अपील का पूरे देश में गहरा असर दिख रहा है. लोग ज्यादा से ज्यादा पेट्रोल-डीजल बचाना चाहते हैं, इसलिए वे या तो मेट्रो में आ रहे हैं या फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल और बसों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: PM मोदी की अपील के बाद दिल्ली सरकार की ‘मेट्रो डे’ पहल, कार से दफ्तर नहीं आएंगे सरकारी कर्मचारी

5. मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन की प्रतिक्रियाएं

मंडी हाउस स्टेशन पर युवाओं और कला जगत के लोगों की भारी भीड़ रहती है. यहां मिले 8 यात्रियों ने एक सुर में कहा कि वो किसी अपील की वजह से नहीं, बल्कि अपने रोजमर्रा के जीवन में हमेशा से ही मेट्रो का इस्तेमाल करते आ रहे हैं और उनके लिए मेट्रो ही लाइफलाइन है.

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वहीं, एक यात्री ने बताया कि वो पहली बार दिल्ली आया है, इसलिए वो रास्ते और सुगमता को देखते हुए मेट्रो से सफर कर रहा है. हालांकि एक यात्री ने जोर देकर कहा, 'ये पूरी तरह से हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अपील का ही जादू है. लोग देश के लिए अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं और मैं खुद भी अब रोजाना इसी तरह मेट्रो से सफर करने वाला हूं.'

ऑटो चालकों का दर्द और जमीनी हकीकत

मेट्रो स्टेशनों के बाहर खड़े ऑटो चालकों के धंधे पर इस अभियान का मिला-जुला असर पड़ा है. पहले ऑटो चालक ने बताया, 'अब लोग पैसे और ईंधन बचाने के लिए शेयरिंग में चल रहे हैं. एक ही ऑटो में 3-4 लोग साथ में बैठकर सफर कर रहे हैं. इस वजह से हमारा काम अब थोड़ा कम हो गया है.'

दूसरे ऑटो चालक ने कहा, 'काम कम होने की असली वजह यही है कि ईंधन बचाने के चक्कर में लोग अब लंबी दूरी के लिए अपनी गाड़ियों के बजाय सीधे मेट्रो का सफर ज्यादा कर रहे हैं.' तीसरे ऑटो चालक ने बताया, 'हमारा काम पूरी तरह मेट्रो पर ही निर्भर है. जो लोग मेट्रो से उतरकर बाहर आते हैं, वही आगे की छोटी दूरी के लिए हमारा ऑटो लेते हैं. लेकिन अब कई लोग जागरूक हो गए हैं, वो ऑटो करने के बजाय छोटी दूरियों को पैदल ही तय कर लेते हैं, जिससे हमारा थोड़ा नुकसान हो रहा है.'

चौथे और पांचवें ऑटो चालकों ने बताया कि वa खुद भी अपनी व्यस्तता के आधार पर कभी-कभी या रोजाना मेट्रो का सफर करते हैं.

6. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन का नजारा

दिल्ली मेट्रो के दिल कहे जाने वाले राजीव चौक पर यात्रियों का समंदर उमड़ा हुआ था. यहां मिले ज्यादातर यात्रियों ने कहा कि वो रेगुलर कम्यूटर्स हैं. हालांकि, एक यात्री ने कहा, 'हम रोज मेट्रो से ही सफर करते हैं, ये सच है. लेकिन मोदी जी की अपील के बाद अब हम और ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. अब हम कोशिश करते हैं कि परिवार के बाकी लोग भी जो अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे, वो भी मेट्रो की तरफ शिफ्ट हो जाएं.'

7. गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन: दोपहर में भी नहीं मिल रही सीट

संवाददाता: आशुतोष कुमार

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के औद्योगिक और रिहायशी इलाके में स्थित गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन पर हमारी टीम ने एक विस्तृत रियलिटी चेक किया. यहां प्रधानमंत्री की अपील का असर बहुत गहरा दिखाई दिया.

रोहित (यात्री) ने कहा, प्रधानमंत्री ने जो अपील की है, वो बहुत ही तारीफ के काबिल और दूरदर्शी कदम है. मैं इस अपील के बाद अब पहले से कहीं ज्यादा मेट्रो का इस्तेमाल कर रहा हूं. हालांकि मैं पहले भी कभी-कभी मेट्रो से चलता था, लेकिन अब मैंने इसे अपनी पहली तरजीह बना ली है.'

रोहित के साथ खड़े एक अन्य यात्री ने कहा कि मेट्रो सबसे बेस्ट है, लेकिन अभी भी समाज का एक ऐसा वर्ग है जिसके पास गाड़ी है और वो अपनी आदत की वजह गाड़ी से ही जा रहा है. फिर भी, मेट्रो में आम लोगों की संख्या काफी बढ़ी है.

ट्विंकल ने कहा, 'पीएम की अपील बिल्कुल सही है और हमने इसे पूरे दिल से माना है. मैंने अपनी स्कूटी से जाना छोड़ दिया है और अब मेट्रो से सफर कर रही हूं. लेकिन इसके साथ ही मेरा सरकार और कंपनियों से एक सुझाव भी है. ईंधन संकट से निपटने के लिए कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम को दोबारा बढ़ावा देना चाहिए.'

ट्विंकल ने आगे कहा, 'अगर 5 दिनों की ड्यूटी में से 2 दिन ऑफिस बुलाया जाए और 3 दिन वर्क फ्रॉम होम करा दिया जाए, तो सड़कों से गाड़ियों का बोझ और तेल की खपत अपने आप आधी हो जाएगी.'

आशीष नाम के एक यात्री) ने कहा, 'प्रधानमंत्री जी की ये अपील पूरे देश के भविष्य के लिए अच्छी है. जैसे हमारे बुजुर्ग कहते हैं कि बूंद-बूंद से ही तालाब भरता है, वैसे ही अगर हम सब थोड़ा-थोड़ा सहयोग करेंगे, तो देश इस ईंधन संकट से आसानी से बाहर निकल जाएगा. हमने अपना सहयोग देना शुरू भी कर दिया है'

उन्होंने कहा, 'हम अपनी प्राइवेट गाड़ी छोड़कर मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं. चूंकि मेट्रो बिजली से चलती है, इसलिए देश का कच्चा तेल और ईंधन बचता है, साथ ही सड़कों पर प्रदूषण भी कम होता है. मैं सुबह फरीदाबाद गया था, वहां भी मेट्रो में अच्छी-खासी भीड़ नजर आई.'

चयन ने कहा, 'क्रूड ऑयल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी बढ़ रही हैं. कई राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमत 100 रुपये के पार जा चुकी है. ऐसे समय में प्रधानमंत्री की ये अपील बेहद जरूरी थी. हम अपनी गाड़ी छोड़कर मेट्रो में सफर कर रहे हैं और यह देशहित में उठाया गया एक बेहतरीन कदम है.'

यह भी पढ़ें: 6 और ट्रेन, 24 अतिरिक्त फेरें... दिल्ली में अब दौड़ेंगी ज्यादा मेट्रो, PM मोदी की अपील के बाद DMRC का ऐलान

कृष्ण और सक्षम ने बताया कि वो अब रोजाना मेट्रो से ही सफर कर रहे हैं. इस अपील के बाद बड़ी संख्या में लोग मेट्रो की तरफ शिफ्ट हुए हैं. अगर दिल्ली का हर नागरिक दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करना शुरू कर दे, तो शहर में प्रदूषण की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी और डीजल-पेट्रोल की खपत कम होने से देश आर्थिक संकट से भी बाहर आ जाएगा.

सुरभि ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सही समय पर सही कदम उठाया है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मेट्रो से अच्छा और सुरक्षित विकल्प कोई दूसरा नहीं है. जब से ये अपील हुई है, लोग अपने प्राइवेट व्हीकल छोड़ रहे हैं. इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि अब दोपहर के समय में भी मेट्रो के अंदर पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है और सीटें खाली नहीं मिल रही हैं.'

उन्होंने आगे कहा, 'पहले दोपहर के वक्त मेट्रो खाली रहती थी और आसानी से सीट मिल जाती थी. हालांकि सीट नहीं मिलने से हमें कोई शिकायत या दिक्कत नहीं है. हमें उल्टा ये देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि देश की जनता प्रधानमंत्री की बात को मान रही है और उसका असर जमीन पर दिख रहा है.'

8. द्वारका मोड़ मेट्रो स्टेशन: पैर में चोट फिर भी मेट्रो का सहारा

संवाददाता: ओपी शुक्ला

द्वारका मोड़ मेट्रो स्टेशन पर हमारी टीम को पारिवारिक स्तर पर आए बदलाव की दो बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक कहानियां देखने को मिलीं, जो ये साबित करती हैं कि ये अभियान अब एक जनांदोलन का रूप ले चुका है.

महिला यात्री संजीत शर्मा ने एक मिसाल पेश करते हुए बताया, 'मेरे पैरों में गंभीर चोट लगी हुई है, जिसके कारण मुझे चलने में काफी तकलीफ होती है. इस स्थिति में भी मैं अपनी कार का इस्तेमाल नहीं कर रही हूं और मेट्रो से सफर कर रही हूं'

उन्होंने आगे कहा, 'हमारे घर में कुल तीन गाड़ियां हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की अपील के बाद अब मेरे पति ने भी अपनी कार घर पर खड़ी कर दी है. वो भी अब दफ्तर और बिजनेस के काम के लिए सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.'

यात्री नीतू ने अपने पूरे परिवार की कहानी साझा की. उन्होंने बताया, 'मेरे परिवार में पांच सदस्य हैं, जिनमें से तीन लोग अलग-अलग जगहों पर नौकरी करते हैं. इस अभियान से पहले, हमारे घर के तीनों कामकाजी सदस्य अपने-अपने अलग वाहनों (बाइक और कार) से दफ्तर जाते थे. लेकिन जब प्रधानमंत्री ने देश के सामने मौजूद ईंधन संकट को लेकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने का आह्वान किया, तो हमारे पूरे परिवार ने बैठकर इस पर चर्चा की.'

यह भी पढ़ें: दिल्ली मेट्रो में यात्रा करते दिखे मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव, शिवाजी स्टेडियम से एरोसिटी तक किया सफर, देखिए वीडियो

नीतू ने कहा, 'अब हमारे परिवार ने निजी वाहनों को पूरी तरह अलविदा कह दिया है और तीनों सदस्य रोजाना पब्लिक ट्रांसपोर्ट और मेट्रो से ही अपने-अपने काम पर जा रहे हैं. इससे हमारे घर के बजट में भी बड़ी बचत हो रही है.'

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