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Modi@4: सोच बदलने की जरूरत, सिर्फ सरकारी नौकरी रोजगार नहीं: जावड़ेकर

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पंचायत आजतक के मंच से कहा कि देश को और खासतौर पर विपक्ष को यह समझने की जरूरत है कि रोजगार का मतलब सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं है.

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प्रकाश जावड़ेकर
प्रकाश जावड़ेकर

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पंचायत आजतक के मंच से कहा कि देश को और खासतौर पर विपक्ष को यह समझने की जरूरत है कि रोजगार का मतलब सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं है. जावड़ेकर ने कहा कि मुद्रा लोन के तहत करोड़ों लोगों को रोजगार का नया साधन शुरू करने का मौका मिला है और इसे भी रोजगार की गणना में देखा जाना चाहिए. जावड़ेकर ने दावा किया कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 9 करोड़ से ज्यादा नौकरी देने का काम किया है.

जावड़ेकर के इस बयान पर कांग्रेस मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि केन्द्र   मुद्रा लोन के आंकड़ों को अपनी सफलता में दिखा रही है लेकिन यह बताने से कतरा रही है कि आखिर इस योजना के तहत किसी को कारोबार शुरू करने के लिए कितना पैसा दिया गया. सुरजेवाला ने कहा कि मुद्रा योजना में सरकार ने 27,000 रुपये बांटने का काम किया है और इतनी रकम से तो देश में पकौड़े की दुकान तक नहीं लगाई जा सकती. लिहाजा, मुद्रा योजना के तहत सरकार देश में रोजगार की क्या परिभाषा देना चाह रही है?

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इस देश में लेबर ब्यूरो का आंकड़ा पूरे   का चित्र नहीं दिखाता. देश में स्वाभिमान के साथ किया जाने वाला व्यवसाय भी रोजगार है. सिर्फ सरकारी नौकरी रोजगार नहीं है. खेती भी एक तरह का रोजगार है. जावड़ेकर ने कहा कि आज मोदी सरकार के कार्यकाल में 27 किलोमीटर सड़क बनती है जबकि कांग्रेस सिर्फ 11 किलोमीटर सड़क बनाती थी. इससे भी रोजगार बढ़ा है. वहीं जावड़ेकर ने कहा कि बीते 4 साल के दौरान खुद कांग्रेस की राज्य सरकारों ने लाखों रोजगार पैदा करने का दावा किया है. क्या इस दावे से देश में रोजगार नहीं बढ़ा है, इन सभी को देखने के बाद साफ है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 9 करोड़ से अधिक रोजगार पैदा हुआ है.

इस सत्र के दौरान केन्द्रीय एचआरडी मंत्री जावड़ेकर ने दावा किया कि   ने अपने कार्यकाल में सबसे बड़ा काम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का किया है. जावड़ेकर ने कहा कि खुद राजीव गांधी ने दावा किया था कि उनके कार्यकाल में कांग्रेस सरकार द्वारा आम आदमी तक 100 रुपये भेजने की कोशिश में 85 रुपये गायब हो जाते थे और महज 15 रुपये जनता तक पहुंचते थे. लेकिन मोदी सरकार के कार्यकाल में जब 100 रुपये भेजे जाते हैं तब आम आदमी तक डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए पूरे 100 रुपये पहुंचते हैं.

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