केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मेनका गांधी के उस बयान का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि कुपोषण की समस्या को दूर करने वाले बजट में सरकार द्वारा कटौती की वजह से विकास में बाधा आ रही है.
मंत्रालय की ओर से जारी किए गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि जिस इंटरव्यू के हवाले से के बयान का दावा किया जा रहा है वह गलत है.
हर साल हो रही है 15 लाख बच्चों की मौत
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने इंटरव्यू के दौरान बाल विकास के मुद्दे पर बातचीत करते हुए कहा था कि बच्चों में कुपोषण की समस्या को दूर करने वाले कार्यक्रम के की वजह से लाखों स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन देने में समस्या आ रही है, साथ ही इससे अभियान प्रभावित हो रहा है. दुनिया के 10 कमजोर बच्चों में से 4 भारत से हैं और पांच साल की उम्र से पहले ही करीब 15 लाख बच्चे हर साल मौत का शिकार भी हो रहे हैं.
सरकार ने की थी बजट में कटौती
एजेंसी ने मुताबिक, था मौजूदा बजट बस इतना ही है कि जनवरी तक 27 लाख स्वास्थ्यकर्मियों को ही वेतन दिया जा सकता है.
बता दें कि मोदी सरकार ने फरवरी में अर्थव्यवस्था में सुधार और विकास की रफ्तार तेज करने के नाम पर सामाजिक क्षेत्र के बजट में कटौती की ताकि बुनियादी ढांचे पर खर्च को बढ़ाया जाए.
'गलत ढंग से पेश किया गया बयान'
मीडिया में केंद्रीय मंत्री का बयान सामने आने के बाद इसे की किरकिरी माना गया. जिसके बाद मंत्रालय ने बयान जारी करके कहा कि एजेंसी की ओर से जो भी दावा किया गया है वह गलत है. मंत्रालय के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री के बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है.