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इसरो जासूसी केस: 24 साल बाद मिला न्याय, पर फैसला आने से पहले पूर्व वैज्ञानिक की मौत

सुबह से ही के. चंद्रशेखर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बाट जोह रहे थे. वह जानते थे कि आज फैसला आएगा और उन्हें विश्वास था कि सभी लोगों की जीत होगी, लेकिन दो दशक से ज्यादा के लंबे इंतजार के बाद जब फैसला आया तो सुनने के लिए वह नहीं थे. चंद्रशेखर ने भारतीय प्रतिनिधि के तौर पर रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ग्लोवकोस्मोस में काम किया.

पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. चंद्रशेखर पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. चंद्रशेखर

पूर्व अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. चंद्रशेखर दशकों से सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का बेहद बेकरारी से इंतजार कर रहे थे, लेकिन तनाव, प्रताड़ना और हजारों दिक्कतों से भरे ढाई दशक काटने के बाद जब शुक्रवार को उनके पक्ष में फैसला आया तो वह सुनने के लिए नहीं थे. वह कोमा में चले गए थे. बाद में उनकी मौत हो गई.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जासूसी कांड पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1994 के जासूसी मामले में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन को 'गैरजरूरी तौर पर गिरफ्तार किया और सताया गया और मानसिक क्रूरता से गुजारा' गया.

शीर्ष अदालत ने नारायणन को मानसिक क्रूरता के एवज में 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया था. इसरो जासूसी कांड के छह आरोपियों में नारायणन के साथ चंद्रशेखर भी शामिल थे. उच्चतम न्यायालय का दीर्घप्रतीक्षित फैसला शुक्रवार को 11 बजे आया, लेकिन तब तक चंद्रशेखर कोमा में जा चुके थे.

डबडबाई आंखों से उनकी पत्नी केजे विजयम्मा ने मंगलवार को बताया, 'वह शुक्रवार को सुबह सवा सात बजे कोमा में चले गए और रविवार को कोलंबिया एशिया अस्पताल में रात 8.40 बजे अंतिम सांस ली.' उन्होंने बताया कि सुबह से ही वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बाट जोह रहे थे. वह जानते थे कि आज फैसला आएगा और उन्हें विश्वास था कि सभी लोगों की जीत होगी, लेकिन दो दशक से ज्यादा के लंबे इंतजार के बाद जब फैसला आया तो सुनने के लिए वह नहीं थे. चंद्रशेखर ने भारतीय प्रतिनिधि के तौर पर रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ग्लोवकोस्मोस में काम किया.

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