भारतीय एजेंसियों को बड़ा झटका देते हुए इंटरपोल ने विवादित इस्लामिक प्रचारक डॉक्टर जाकिर नाईक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है. इंटरपोल के इस फैसले पर जाकिर नाईक ने खुशी जताते हुए कहा है, 'मुझे ज्यादा खुशी होती अगर भारतीय एजेंसियां भी मुझे आरोपों से मुक्त कर देतीं. वो दिन जल्द ही आएगा.'
जाकिर के खिलाफ NIA की चार्जशीट
वहीं सीबीआई ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. सीबीआई ने कहा कि इस मामले में भारतीय जांच एजेंसी ही कुछ कह सकती है. ने जाकिर के वकील को खत के जरिए सूचना दी है कि सबूत के अभाव में जाकिर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के आग्रह को रद्द कर दिया गया है.
NIA ने बताई नोटिस ना जारी होने की वजह
NIA के प्रवक्ता आलोक मित्तल ने बयान दिया है कि इंटरपोल ने जाकिर के नाईक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस इसलिए नहीं जारी किया क्योंकि जब अपील की गई थी, तब जाकिर पर चार्जशीट फाइल नहीं हुई थी. अब एनआईए नए सिरे से नोटिस जारी करने की अपील करेगा क्योंकि एजेंसी की मुंबई कोर्ट में जाकिर के खिलाफ चार्जशीट दायर है.
NIA's request for Red Notice against was not accepted by Interpol as chargesheet had not been filed when request was submitted to the Interpol HQ. Will now submit fresh request to Interpol as chargesheet has already been filed in the concerned NIA court in Mumbai: NIA
— ANI (@ANI)
भारतीय एजेंसियों ने जाकिर के प्रत्यर्पण हेतु इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की दर्ख़्वास्त की थी, ताकि उसे भारत लाया जा सके. बता दें कि भारतीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक आतंकी घटना में जाकिर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.
बांग्लादेश में आतंकी हमले से जुड़े तार
के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड विधान की धारा 20 (b), 153 (a), 295 (a), 298 and 505 (2) के तहत आरोप तय किए गए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक जाकिर शरण लिए हुए है. बांग्लादेश में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों ने जब जाकिर से प्रभावित होने की बात कबूली, तो वो 1 जुलाई, 2016 को भारत से भाग गया. इसके बाद नवंबर, 2016 में जाकिर के खिलाफ केस दर्ज किया गया और दिसंबर, 2016 में जाकिर के एनजीओ को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बैन कर दिया.
कई देशों में बैन है नाईक का पीस टीवी
NIA ने जाकिर पर देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया है. आतंकी संगठन ISIS में शामिल होने के लिए देश छोड़ने वाले भारतीय युवकों ने भी भारतीय एजेंसियों को बताया था कि वे जाकिर के भाषण से प्रभावित थे. जाकिर नाईक के पीस टीवी को कई देशों में बैन किया गया है.