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इंडिया टुडे-एक्सिस के ओपिनियन पोल में अखिलेश और बीजेपी यूपी की पसंद

अगर बीजेपी यूपी में जीती, तो 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ये उसकी सबसे बड़ी जीत होगी.– मोदी लहर की सबसे बड़ी परीक्षा यूपी में ही होनी है. सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी जैसे फैसलों की वजह से नतीजे और भी रोचक हो गए हैं. ये चुनाव मायावती और उनकी पार्टी बीएसपी के लिए 'करो या मरो' वाला साबित होने वाला है

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इंडिया टुडे और एक्सिस सर्वे इंडिया टुडे और एक्सिस सर्वे

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. यूपी में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में मतदान होना है. इंडिया टुडे और एक्सिस ने मिलकर यूपी में अब तक का सबसे बड़ा चुनावी सर्वे किया है जिसके मुताबिक मुख्यमंत्री के तौर पर मतदाताओं की पहली पसंद अखिलेश यादव ही हैं. लेकिन बीजेपी राज्य के मतदाताओं की सबसे पंसदीदा पार्टी साबित हुई है. सर्वे में कई पैमानों पर बीएसपी, सपा को पछाड़ते हुए दूसरे नंबर पर आती दिख रही है. वहीं कांग्रेस पूरी तरह मैदान से बाहर नजर आ रही है. आपको बता दें कि 12 से 24 दिसंबर के बीच 8,480 लोगों की राय इस सर्वे में जानी गई है.

एक नजर में देखते हैं कि यूपी का ओपिनियन पोल क्यों जरूरी है.
भारत का सबसे बड़ा राज्य, जहां से 80 सांसद आते हैं.
– अगर बीजेपी यूपी में जीती, तो 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ये उसकी सबसे बड़ी जीत होगी.
– मोदी लहर का सबसे बड़ी परीक्षा यूपी में ही होनी है. सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी जैसे फैसलों की वजह से नतीजे और भी रोचक हो गए हैं.
– ये चुनाव मायावती और उनकी पार्टी बीएसपी के लिए 'करो या मरो' वाला साबित होने वाला है.
– समाजवादी पार्टी की आंतरिक कलह का उसके भविष्य पर क्या असर पड़ेगा, ये भी इस चुनाव में साफ हो जाएगा.
– इस चुनाव अगर अखिलेश जीतते हैं, तो वो एक सशक्त राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित हो जाएंगे.
– पार्टी में नई जान फूंकने और राहुल गांधी की छवि मजबूत करने के लिए कांग्रेस के लिए ये चुनाव बहुत अहम है.

किस पार्टी को कितनी सीटों पर मिलेगी जीत
यूपी में 75 जिलों की 403 सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें बीजेपी को सबसे ज्यादा, 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं. अगर चुनाव तक यही लहर बनी रहती है और बीजेपी इतनी सीटें हासिल कर लेती है, तो गठबंधन को लेकर किसी कवायद की जरुरत ही नहीं पड़ेगी. जानकारों का भी मानना है कि अगर बीजेपी सबसे आगे रहती है तो सरकार बनाने के लिए उसे गठबंधन की जरूरत नहीं होगी. ये परेशानी सपा और बीएसपी के सिर पर है.
बीजेपी- 206-216
बीएसपी- 79-85
सपा- 92-97
कांग्रेस- 5-9
अन्य- 7-11

किस पार्टी को मिलेंगे कितने वोट
वोट फीसद की बात करें, तो यहां भी बीजेपी सबसे आगे दिख रही है. सर्वे के मुताबिक वो एक तिहाई वोट हासिल करेगी, जबकि बीएसपी और सपा, दोनों को 26-26% वोट मिलेंगे और ये दोनों पार्टियां दूसरे नंबर पर दिख रही हैं. कांग्रेस को तो निर्दलीय उम्मीदवारों से भी कम वोट मिलते दिख रहे हैं.
सर्वे में वोट%
बीजेपी-33%
बीएसपी 26%
सपा 26%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

मुख्यमंत्री के तौर पर कौन है पहली पसंद
यूपी में बीजेपी आगे रहती दिख रही हो लेकिन बतौर मुख्यमंत्री लोगों की पहली पसंद अखिलेश यादव ही हैं. पार्टी की अंदरूनी कलह से जूझ रहे अखिलेश के लिए ये बड़ा चुनाव है. बीजेपी ने मैदान में कोई सीएम उम्मीदवार नहीं उतारा है. ऐसे में अखिलेश के पास इसका फायदा उठाने का पूरा मौका है. सीएम की पसंद में दूसरे नंबर पर मायावती हैं.
अखिलेश यादव- 33%
मायावती- 25%
राजनाथ सिंह- 20%
योगी आदित्यनाथ- 18%
प्रियंका गांधी-1%
मुलायम सिंह- 1%
वरुण गांधी- 1%

किसके शासन में बेहतर कानून-व्यवस्था
बीजेपी और सपा के मुकाबले लोग बीएसपी को वोट भले ना देना चाहते हों, लेकिन कानून-व्यवस्था के मामले में उनकी पहली पसंद मायावती हैं. मतदाता ये बात खुले दिल से कहते हैं कि सूबे में कानून व्यवस्था संभालने के मामले में मायावती सबसे बेहतर हैं. हालांकि अखिलेश यादव यहां दूसरे नंबर पर आते हैं.
मायावती- 48%
अखिलेश यादव- 28%
राजनाथ सिंह- 23%
मुलायम सिंह- 1%

क्षेत्र के हिसाब से कौन-किसके साथ
विधानसभा चुनाव के परिणाम सबसे ज्यादा स्थानीय मुद्दों और समीकरणों पर आधारित होते हैं. जब इंडिया टुडे और एक्सिस ने इलाकों के आधार पर लोगों का रुझान जानने की कोशिश की, तो वहां भी बीजेपी ही सबसे आगे नजर आई. बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाके से लेकर मध्य यूपी तक, मतदाता की पहली पसंद बीजेपी ही है. यहां सपा हर जगह तीसरे नंबर पर नजर आ रही है. दूसरे पर बीएसपी काबिज है.

क्षेत्र के हिसाब वोट%
पश्चिमी यूपी (136 सीट)
बीजेपी 34%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 5%
अन्य 9%

मध्य यूपी (81 सीट)
बीजेपी 36%
बीएसपी 23%
सपा 24%
कांग्रेस 8%
अन्य 9%

पूर्वी यूपी (167 सीट)
बीजेपी 32%
बीएसपी 28%
सपा 27%
कांग्रेस 5%
अन्य 9%

बुंदेलखंड (19 सीट)
बीजेपी 38%
बीएसपी 28%
सपा 19%
कांग्रेस 5%
अन्य 10%

जाति/धर्म के आधार पर किसे मिलेंगे कितने वोट

आम तौर पर चुनावों में जातिगत समीकरण सबसे अहम भूमिका निभाते हैं. यूपी के चुनाव में इस फैक्टर को अलग नहीं रखा जा सकता. सर्वे के मुताबिक सवर्णों की पहली पसंद बीजेपी, जबकि मुस्लिमों को सपा के अलावा कोई पार्टी नहीं दिख रही है. ओबीसी बीजेपी की ओर झुकते दिख रहे हैं, जबकि यादव वोट पर भी सपा को मिलने का अनुमान है.

सवर्ण
बीजेपी 61%
बीएसपी 10%
सपा 9%
कांग्रेस 8%
अन्य 12%

मुस्लिम
बीजेपी 3%
बीएसपी 14%
सपा 71%
कांग्रेस 6%
अन्य 6%

ओबीसी
बीजेपी 53%
बीएसपी 15%
सपा 13%
कांग्रेस 7%
अन्य 12%

यादव
बीजेपी 14%
बीएसपी 4%
सपा 72%
कांग्रेस 3%
अन्य 7%

एससी/एसटी
बीजेपी 15%
बीएसपी 68%
सपा 7%
कांग्रेस 3%
अन्य 7%

किस आय का मतदाता कौन सी पार्टी के साथ

किसी भी जगह स्थानीय समीकरण जैसे भी हों, लेकिन लोगों की आय के मसले को नजरअंदाज नहीं कर सकते. लोगों की मानसिकता काफी हद तक उनकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती है.

आय के आधार पर वोट % निम्न आय (10 हजार तक)
बीजेपी 33%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

निम्न/मध्यम आय (10-20 हजार तक)
बीजेपी 33%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

उच्च आय (20 हजार ज्यादा)
बीजेपी 41%
बीएसपी 18%
सपा 26%
कांग्रेस 5%
अन्य 10%

किस व्यवसाय का मतदाता कौन सी पार्टी के साथ

व्यवसाय के आधार पर वोटरों के रुझान में कुछ फर्क जरूर है. जहां मजदूर वर्ग बीएसपी के साथ जाता दिख रहा है, वहीं किसानों की पहली पसंद बीजेपी है. नौकरी-पेशे वाले लोगों और छोटे दुकानदारों ने भी बीजेपी के हक में ही राय दी है.
व्यवसाय के आधार पर वोट%
मजदूर
वर्ग
बीजेपी 26%
बीएसपी 37%
सपा 24%
कांगेस 5%
अन्य 8%

किसान
बीजेपी 41%
बीएसपी 18%
सपा 25%
कांग्रेस 7%
अन्य 9%

नौकरीपेशा (डॉक्टर, वकील आदि)
बीजेपी 39%
बीएसपी 17%
सपा 28%
कांग्रेस 7%
अन्य 9%

छोटे व्यापारी
बीजेपी 40%
बीएसपी 18%
सपा 27%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

गांव और शहरों के अंतर का किसे मिलेगा फायदा

ग्रामीण और शहरी इलाकों के मतदाता के रुझान में एक ही फर्क है. बीजेपी दोनों जगह लोगों की पहली पसंद है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बीएसपी दूसरे नंबर पर दिख रही है. शहरी इलाकों में दूसरे नंबर पर सपा है. दोनों एक जगह एक और खास बात ये कि निर्दलीय उम्मीदवारों को कांग्रेस से ज्यादा वोट मिलते दिख रहे हैं. कांग्रेस आखिरी नंबर पर है.

भौगोलिक आधार पर वोट %

ग्रामीण
बीजेपी 33%
बीएसपी 27%
सपा 25%
कांग्रेस 6%
अन्य 9%

शहरी
बीजेपी 35%
बीएसपी 24%
सपा 27%
कांग्रेस 5%
अन्य 9%

यूपी चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा क्या है

ये सवाल जितना महत्वपूर्ण है, सर्वे में मिला इसका जवाब उतना ही रोचक है. यूपी की जनता ने माना कि उनके लिए विकास सबसे बड़ा मुद्दा है. लेकिन रोजगार उनके लिए सबसे कम महत्वपूर्ण मसला है. देश के सबसे बड़े राज्य को रोजगार की सबसे ज्यादा जरुरत है. ऐसे में वहां के लोगों की प्राथमिकताएं अलग हैं.
विकास 45%
सड़क, बिजली, पानी 18%
रोजगार 15%

क्या बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करना चाहिए

2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी जितने राज्यों में चुनाव लड़ी है, दिल्ली छोड़कर उसने किसी राज्य में अपना सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. इस साल भी पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन इस बार भी बीजेपी उसी पुरानी रणनीति पर चुनाव लड़ने जा रही है. बीजेपी नेता हर बार विकास के नाम पर चुनाव लड़ने की बात दोहराते आए हैं.
हां 69%
ना 24%
पता नहीं 7%

कैसा रहा नोटबंदी का फैसला
अच्छा 76%
बुरा 23%
पता नहीं 1%

नोटबंदी से परेशानी है
हां 58%
नहीं 42%

नोटबंदी से क्या होगा
काले धन और जाली नोट पर लगाम 51%
जनता को दिक्कत 27%
गरीब को फायदा 18%
कोई असर नहीं 3%
सिर्फ एक छोटा सा फैसला 1%

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