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अप्रैल 2015 में भूकंप से गिरा था नेपाल का धरहरा टॉवर, 8000 लोगों की मौत

उत्तर भारत और पूर्वोत्तर समेत भारत के कई हिस्से बुधवार की शाम आए 6.8 तीव्रता वाले भूकंप के तेज झटकों से हिल गए. अधिक तीव्रता के इस भूकंप ने पिछले साल नेपाल में आई उस तबाही की याद दिला दी, जिसमें करीब 8000 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

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धरहरा टॉवर की भूकंप से पहले और बाद की तस्वीर
धरहरा टॉवर की भूकंप से पहले और बाद की तस्वीर

उत्तर भारत और पूर्वोत्तर समेत भारत के कई हिस्से बुधवार की शाम आए 6.8 तीव्रता वाले भूकंप के तेज झटकों से हिल गए. अधिक तीव्रता के इस भूकंप ने पिछले साल नेपाल में आई उस तबाही की याद दिला दी, जिसमें करीब 8000 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.

25 अप्रैल की उस घटना को याद करें तो उसने नेपाल के एक इतिहास को चंद सेकंड में धराशायी कर दिया था. नेपाल में पिछले साल आए भयंकर भूकंप से 19वीं सदी का नौ मंजिला धरहरा टॉवर पूरी तरह टूट गया था. 1832 का में बना यह टावर भूकंप के भयानक झटकों के बाद मटियामेट हो गया.

'इसलिए खास था धरहरा टॉवर'
सन् 1832 में नेपाल के पहली प्रधानमंत्री भीमसेन थापा द्वारा बनवाया गया यह टॉवर एक प्रतिष्ठित स्मारक था. इसका निर्माण एक सैन्य निगरानी टॉवर के रूप में किया गया था, जो बाद में काठमांडू का एक मुख्य ऐतिहासिक स्थल बन गया. बताया जाता है कि इसे नेपाल का 'कुतुबमीनार' कहा जाता था. धरहरा को 10 साल पहले ही पर्यटकों के लिए खोला गया था.

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हजारों पर मौत बनकर टूटा था भूकंप
7.9 मैग्नीट्यूड वाले भूकंप से नेपाल में हर तरफ मौत और मातम का मंजर पसर गया था. इस भयानक प्राकृतिक आपदा में 8000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. इस तबाही के बाद नेपाल में लाखों लोग बेघर हो गए थे..


उत्तर भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में रविवार शाम को भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे. उस वक्त भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान सीमा के पास हिंदुकुश पर्वतमाला में था और रिक्टर स्केल पर उसकी तीव्रता 6.8 मापी गई थी.

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