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वसुंधरा ने जमानत पर बाहर चल रहे दो दागियों को बनाया मंत्री

शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली बीजेपी की राजस्थान इकाई ने जेल से जमानत पर बाहर आए विधायकों को मंत्री बना दिया है. सात दिनों की माथापच्ची के बाद आखिरकार दागी विधायकों को मंत्री बनाने पर पार्टी में सहमति बन गई.

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वसुंधरा राजे
वसुंधरा राजे

शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली बीजेपी की राजस्थान इकाई ने जेल से जमानत पर बाहर आए विधायकों को मंत्री बना दिया है. सात दिनों की माथापच्ची के बाद आखिरकार दागी विधायकों को मंत्री बनाने पर पार्टी में सहमति बन गई. इसके बाद वसुंधरा राजे के मंत्रिमंडल में दो दागियों समेत 12 विधायकों को शामिल कर लिया गया जिनमें से 9 को कैबिनेट मंत्री बनाया गया.

लेकिन सवाल यही है कि अगर जमानत रद्द हुई तो इन मंत्रियों का क्या होगा. वहीं दागी मंत्रियों की वजह से अकसर फंसती रही कांग्रेस अब बीजेपी को आइना दिखा रही है.

वसुंधरा के चहेते राठौड़ बने मंत्री
इन मंत्रियों में पहला नाम है राजेंद्र राठौड़ का. उनका सेंट्रल जेल जयपुर में कई बार आना-जाना हो चुका है. उन्हें सीबीआई ने अपने चार्जशीट में दारिया सिंह फर्जी एनकाउंटर का मुख्य साजिशकर्ता बनाया है. लेकिन ये मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सबसे चहेते माने जाते हैं. लिहाजा साफ-सुथरी सरकार के वादे को 'चहेतावाद' के आगे भुला दिया गया. हालांकि राजेंद्र राठौड़ खुद पर लगे आरोपों को कांग्रेस सरकार की साजिश बता रहे हैं.

फर्जी एनकाउंटर में आरोपी कटारिया भी कैबिनेट में
इसके अलावा राजस्थान बीजेपी में नंबर दो और आरएसएस का चेहरा माने-जाने वाले गुलाबचंद कटारिया भी सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले में अग्रिम जमानत पर बाहर हैं. उन्हें सीबीआई ने पिछली सरकार में राजस्थान के गृहमंत्री रहते हुए सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर में साजिश रचने का आरोपी माना है. लेकिन कटारिया कहते हैं कि वह निर्दोष साबित होकर आएंगे.

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उन्होंने कहा, 'मामले में तो कुछ है ही नहीं. मुझे अग्रिम जमानत मिली है और आज तक चल रही है. दूसरी बात मैंने धारा 227 लगाई है कि जो चार्जशीट पेश हुई वह गलत है.'

मंत्रिमंडल में जाति का संतुलन
मदेरणा से लेकर बाबूलाल नागर के इतिहास वाली कांग्रेस अब वसुंधरा सरकार के दामन पर दाग देखकर नाक-भौं सिकोड़ रही है. पार्टी की प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने इस बाबत बीजेपी पर हमला बोला.

इसके अलावा जातिगत समीकरण में संतुलन बनाने के लिए मंत्रिमंडल में ज्यादातर जातियों के नेताओं को जगह देने की कोशिश की गई है. बाकी से कहा गया है कि जो अपने लोकसभा चुनाव में पार्टी को ज्यादा वोटों से जिताएगा वह अगले मंत्रिमंडल विस्तार में जगह पाएगा. हालांकि सूबे की महिला मुख्यमंत्री ने किसी भी महिला को मंत्री नहीं बनाया है.

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