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'आप कितने भी बड़े हो, हम सीधा कर देंगे'...पंजाब नेताओं की राहुल गांधी ने क्यों लगाई क्लास

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है. यही वजह है कि समय से पहले राहुल गांधी ने पंजाब नेताओं को आपसी गुटबाजी को खत्म करने के लिए सार्वजनिक रूप से नसीहत देनी पड़ी है. इससे समझा जा सकता है कि सूबे में कांग्रेस कितने गुटों में बंटी हुई है.

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पंजाब के कांग्रेस नेताओं को राहुल गांधी ने क्यों दी कड़ी नसीहत(Photo-INC)
पंजाब के कांग्रेस नेताओं को राहुल गांधी ने क्यों दी कड़ी नसीहत(Photo-INC)

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए अभी से कवायद में जुट गई है. हरियाणा के विधानसभा चुनाव में आपसी गुटबाजी के चलते मिली हार से सबक लेते हुए कांग्रेस पंजाब में अभी से अपने नेताओं को आपसी वर्चस्व की जंग खत्म को खत्म करने की नसीहत देना शुरू कर दिया है. 

राहुल गांधी शनिवार को पंजाब के बरनाला में मनरेगा मजदूर किसान बचाओ महारैली में कांग्रेस नेताओं को साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि अब गुटबाजी को किसी भी तरह से बर्दाश्त नहीं करेंगे. राहुल गांधी ने कहा कि मैं पंजाब कांग्रेस पार्टी नेताओं की पूरी टीम, जो यहां पर बैठी है, सबको मैसेज देना चाहता हूं कि काम टीम वर्क से होता है. एक प्लेयर गेम नहीं जीत सकता है. साथ ही कहा कि मैं साफ संदेश देना चाहता हूं कि टीम प्लेयर बनो, वरना रिजर्व में बैठा देंगे. 

पंजाब कांग्रेस नेताओं को स्पष्ट तौर पर राहुल ने कहा कि आपसी गुटबाजी खत्म कर सब एक हो जाओ, नहीं तो पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में देर नहीं करेंगे. राहुल गांधी ने कहा कि चाहे आप कितने भी बडे हों, पार्टी से बडा कोई नहीं है. ऐसे में अगर टीम के साथ काम नहीं करेगा और टीम प्लेयर नहीं बनेगा तो उसे मैं और हमारे अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सीधा कर देंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि राहुल गांधी को आखिर पंजाब कांग्रेस नेताओं की क्लास क्यों लगानी पड़ी? 

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राहुल ने कांग्रेस नेताओं की लगाई क्लास
पंजाब में कांग्रेस कई गुटों में बटी हुई है. इसी गुटबाजी के चलते ही कांग्रेस 2022 के चुनाव में करारी मात खानी पड़ी है. कांग्रेस के कई नेता को पार्टी तक छोड़नी पड़ गई है. कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व की ओर से कई बार पंजाब नेताओं को दिल्ली तलब कर समझना पड़ा है. इतना ही नहीं कांग्रेस कार्यलय में कई बार तो फटकार भी लगाया, लेकिन प्रदेश नेताओं पर कोई असर नहीं हुआ. कांग्रेस जस की तस कई गुटों में बंटी रही. 

हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व के सामने बीच-बीच में पंजाब नेताओं ने एकजुटता की तस्वीर पेश करने की जरूर कोशिश करते दिखे, लेकिन समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही. अब जब पंजाब विधानसभा चुनाव में एक साल है तो कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी गुटबाजी को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाने के सार्वजनिक चेतावनी दी है. 

कांग्रेस में पहली बार है जब राहुल गांधी ने इतने स्पष्ट शब्दों में पंजाब नेताओं से कहा कि टीम के साथ मिलकर काम कीजिए, अगर अलग अपनी ढपली और अपना राग अलापने की कोशिश की तो उसे बाहर करने में जरा भी देर नहीं करेंगे.  राहुल गांधी ने सभी नेताओं से कहा कि चाहे आप कितने भी बडे हों, पार्टी से बडा कोई नहीं है. 

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राहुल को क्यों देना पड़ा सख्त संदेश
पंजाब कांग्रेस लंबे समय में कई खेमों में बंटी हुई है. 2024 के लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद, जहां कांग्रेस को 13 में से 7 सीटों पर जीत मिली थी, कांग्रेस पांच नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी को अच्छी लड़ाई दी. चार बड़े नगर निगमों में उन्हें सत्ता में काबिज होना मुश्किल कर दिया, लेकिन लुधियाना पश्चिमी उपचुनाव में पार्टी की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई. यही वजह थी कि कांग्रेस पंजाब चुनाव नहीं जीत सकी. 

लुधियाना उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच की जंग खुलकर सामने आई. इसके चलते कांग्रेस की सबसे मजबूत स्थिति वाली सीट पर आशू को हार का मुंह देखना पड़ा. कांग्रेस स्पष्ट रूप से यहां खेमों में बंटी नजर आई. 

पंजाब में कांग्रेस कितने गुटों में बटी है
पंजाब में कांग्रेस कई धड़े हैं और उनके अपने इलाके हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे नेता नजर आए तो दूसरे खेमे में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, राणा गुरजीत सिंह, परगट सिंह और भारत भूषण आशू सरीखे नेता हैं. इसके अलावा बाजवा और राज वडिंग की अपनी सियासी वर्चस्व की जंग है तो चरणजीत सिंह चन्नी का अलग ही गुट है. 

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पिछले दिनों पार्टी के एक खेमे ने विधायकों और पिछला चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से हस्ताक्षर करवाकर एक मुहिम चला दी गई, जो सीधे तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी को स्पोर्ट कर रही थी. हालांकि, चरणजीत चन्नी एक जगह मात खा गए, जहां पार्टी के अनुसूचित जाति विंग की रैली के दौरान कह दिया कि पार्टी ने अनुसूचित जातियों को कोई पद नहीं दिया हुआ है. 

चन्नी ने कहा था कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, विपक्ष का नेता, महिला विंग और यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पद पंजाब में एक ही वर्ग को दिए हैं. उनके इस बयान का खासा विरोध हुआ. राहुल गांधी और मल्ल्किार्जुन खड़गे ने पार्टी के सीनियर नेताओं को दिल्ली बुलाकर डांट लगाई और हस्ताक्षर अभियान चलाने वालों को फटकार सुननी पड़ी. अब राहुल गांधी ने मनरेगा रैली के दौरान कांग्रेस नेताओं को एकजुट रहने की सलाह ही नहीं दी बल्कि सख्त चेतावनी भी दे दी है. 


 

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