पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. इस बार राज्य में सत्ता तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है और इसकी कमान सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों में है. भाजपा नेतृत्व का मानना है कि पंजाब की राजनीति में बदलते समीकरण उसे एक बड़े अवसर की ओर ले जा सकते हैं.
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह इस महीने पंजाब बीजेपी नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने जा रहे हैं. इस बैठक में राज्य में चलाए जाने वाले ड्रग्स विरोधी अभियान को अंतिम रूप दिया जाएगा. पार्टी का मानना है कि नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति और समाज दोनों में बेहद संवेदनशील है. इसे लेकर जनसंपर्क अभियान चलाकर जनता के बीच मजबूत संदेश दिया जा सकता है.
बीजेपी ने तय कर लिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वो शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी. इस बार अकेले दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी. राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी. यह फैसला पंजाब की राजनीति में पार्टी की स्वतंत्र पहचान और संगठनात्मक ताकत को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बीजेपी ने अपनी रणनीति का केंद्र सीधे गांवों और किसानों तक पहुंचने को बनाया है. भाजपा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर संपर्क अभियान चलाएं. ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ाएं. इसके साथ ही संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए पन्ना प्रमुख अभियान पर जोर दिया जा रहा है. उनकी नियुक्ति, प्रशिक्षण और निगरानी की व्यवस्था चल रही है.
पंजाब में बीजेपी के राजनीतिक समीकरणों में केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. बीजेपी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला नहीं किया है. सूत्रों का कहना है कि वे 21 जून से पहले केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे सकते हैं. उन्हें पंजाब में उतारने की योजना है.
ये भी संभावना है कि वो आगामी विधानसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं. हालांकि पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश करने के मूड में नहीं है. इधर प्रदेश संगठन के भीतर कुछ असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ढिल्लो की नियुक्ति के बाद नाराज बताए जा रहे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली पहुंचकर गृह मंत्री से मुलाकात की थी.
हालांकि बाद में उन्होंने अपनी नाराजगी की खबरों को खारिज कर दिया. वहीं पार्टी के महासचिव डॉ. जगमोहन राजू ने इस्तीफा दे दिया है. पार्टी नेतृत्व उनसे भी लगातार बातचीत में है ताकि संगठन में किसी तरह की असहमति चुनावी तैयारियों पर असर न डाले. बीजेपी की रणनीति के पीछे लोकसभा चुनाव के आंकड़े भी बड़ी वजह हैं. बीजेपी को 18.56 फीसदी वोट मिले थे.
चुनावी विश्लेषण में सामने आया कि 23 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा पहले स्थान पर रही थी. इसके अलावा पांच सीटों पर उसकी हार का अंतर पांच हजार वोटों से कम था, जबकि दस सीटों पर वह दस हजार से कम वोटों से पीछे रही. इन आंकड़ों के आधार पर भाजपा का आंकलन है कि राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 38 सीटों पर उसने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी.
बहुमत के लिए जरूरी 59 सीटों के आंकड़े से यह केवल 21 सीटें दूर है. पार्टी नेतृत्व को इन्हीं आंकड़ों में अपनी राजनीतिक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं. भाजपा का मानना है कि पंजाब में मुकाबला लगातार बहुकोणीय होता जा रहा है. चारकोणीय मुकाबले में जीत और हार का अंतर अपेक्षाकृत कम होता है. ऐसे हालात में पार्टी मौजूदा जनाधार का विस्तार कर सकती है.