अमृतसर में ASI हरजीत सिंह की हत्या के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया पर एक एडवाइजरी वायरल हुई थी. इसमें दावा किया गया था कि पुलिसकर्मियों को घर से ड्यूटी जाते समय और ड्यूटी से घर लौटते समय सादे कपड़ों में यात्रा करनी चाहिए और वर्दी पहनने से बचना चाहिए. हालांकि, पंजाब पुलिस ने इस एडवाइजरी को फर्जी बताया है.
Punjab Police ने X पर पोस्ट कर कहा कि पंजाब पुलिस मुख्यालय या उसके अधीन किसी अन्य पुलिस कार्यालय की ओर से ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, जिसमें पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर जाते या लौटते समय वर्दी नहीं पहनने और सादे कपड़ों में यात्रा करने का निर्देश दिया गया हो.
पुलिस ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे ऐसे संदेशों को फर्जी बताया और लोगों से इन्हें नजरअंदाज करने की अपील की है. पंजाब पुलिस ने नागरिकों और पुलिसकर्मियों से कहा है कि वे प्रमाणिक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें.
विपक्ष ने साधा था निशाना
पंजाब में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर सामने आई कथित एडवाइजरी के बाद विपक्षी नेताओं ने पंजाब सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और प्रताप सिंह बाजवा के अलावा शिरोमणि अकाली दल के महासचिव बिक्रम सिंह मजीठिया ने पुलिसकर्मियों को वर्दी में यात्रा नहीं करने की खबरों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए.
पवन खेड़ा ने कहा कि पंजाब में हालात ऐसे हो गए हैं कि पुलिस प्रमुख को पुलिसकर्मियों को सुरक्षित रखने के लिए सड़कों या सार्वजनिक और निजी वाहनों में वर्दी नहीं पहनने का आदेश जारी करना पड़ा.
प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि पंजाब पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर वर्दी में यात्रा नहीं करने और पुलिस थाने पहुंचने के बाद ही वर्दी पहनने की सलाह दी जा रही है. उन्होंने इसे पंजाब में कानून-व्यवस्था और पुलिस के मनोबल से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान से सवाल किया कि पंजाब की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है.
वहीं, बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि पंजाब पुलिस कभी आतंकवाद खत्म करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जानी जाती थी, लेकिन आज उसे कथित तौर पर गैंगस्टरों के सामने बेबस बताया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों को घर से वर्दी पहनकर नहीं आने और थाने पहुंचने के बाद वर्दी पहनने का निर्देश दिया गया है.
मजीठिया ने सोशल मीडिया पर वायरल ऑडियो का भी जिक्र किया और दावा किया कि इसमें पुलिस को गैंगस्टरों के सामने बेबस बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर आम लोगों में डर का माहौल है. मजीठिया ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से कहा कि अगर वह पंजाब को संभाल नहीं सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.
आरोपी का हुआ था एनकाउंटर
ASI हरजीत सिंह की हत्या के मामले में पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की थी. अमृतसर पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में हत्या के मुख्य आरोपी दीपक सिंह को मार गिराया गया था. अमृतसर पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने इसकी पुष्टि की थी.
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी और उसके आतंकी मॉड्यूल ने हरजीत सिंह की हत्या करवाई थी. हाल ही में गृह मंत्रालय ने शहजाद भट्टी और उसके नेटवर्क को आतंकी घोषित किया था. प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहजाद भट्टी तहरीके तालिबान हिंदुस्तान (TTH) के नाम से नेटवर्क संचालित करता था. अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने X पर पोस्ट कर मामले की जानकारी दी थी. पुलिस के मुताबिक, हरजीत सिंह की हत्या 18 सितंबर को अमृतसर के गेट हकीमा थाना क्षेत्र में हुई थी. दाना मंडी में ड्यूटी के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी.
ऐसे हुई थी आरोपी की पहचान
जांच के दौरान पुलिस ने CCTV फुटेज, तकनीकी इनपुट, टावर-डंप एनालिसिस और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से आरोपी दीपक सिंह की पहचान की थी. कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल के मुताबिक, शनिवार को पुलिस ने एक नाके पर दीपक सिंह को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी. इसके बाद पुलिस ने उसका पीछा किया और इस दौरान उसने दोबारा पुलिस पर गोलीबारी की थी.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी दीपक सिंह शहजाद भट्टी और उसके मॉड्यूल के संपर्क में था. कमिश्नर ने बताया था कि पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने इन लोगों को अपने जाल में फंसाया था और उनसे आगे चिट्टे का कारोबार करने का वादा किया था. पुलिस के अनुसार, हरजीत सिंह की हत्या के बाद ये लोग दोबारा घटनास्थल पर पहुंचे थे और वीडियो बनाकर आगे भेजा था.
पुलिस ने आरोपी के पास से 30-बोर की पिस्तौल, दो मैगजीन, 8 जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल किया गया एक्टिवा स्कूटर बरामद किया था. हालांकि, अंधेरे का फायदा उठाकर एक अन्य संदिग्ध मौके से फरार हो गया था.