राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कर्नाटक सरकार के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है. कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को RSS प्रमुख मोहन भागवत को लेटर लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, फंडिंग के सोर्स, आय-व्यय और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल पूछे हैं. इसके जवाब में मोहन भागवत ने सरकार के रुख को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि RSS को रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है और पिछले 100 वर्षों में किसी भी सरकार ने इस तरह की मांग नहीं की है.
दो पन्नों की अपने लेटर में प्रियंक खड़गे ने कहा कि RSS का कर्नाटक में व्यापक नेटवर्क है और इतनी बड़ी संस्था कानूनी निगरानी और सार्वजनिक जवाबदेही से बाहर नहीं रह सकती. उन्होंने लिखा कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संगठन, चाहे वह कितना भी पुराना, बड़ा या प्रभावशाली क्यों न हो, कानून और सार्वजनिक जांच से ऊपर नहीं हो सकता. हर संस्था और संगठन को कानून के दायरे में काम करना चाहिए.
प्रियांक खड़गे ने उठाए सवाल
खड़गे ने RSS के अपने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में संगठन की 4,127 दैनिक शाखाएं, 1,389 वीकली मीटिंग और 60 मासिक मंडलियां संचालित हो रही हैं. इसके अलावा संघ ने राज्यभर में 2,194 सम्मेलन और 500 से अधिक पथ संचलन आयोजित किए हैं. उनका कहना है कि इतनी व्यापक गतिविधियों को निजी या अनौपचारिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता.
गृह मंत्री ने लेटर में सवाल उठाया कि जब कोई संगठन नियमित रूप से सार्वजनिक कार्यक्रम, गणवेशधारी पथ संचलन, सामाजिक अभियान और बड़े पैमाने पर जनसंपर्क गतिविधियां चलाता है, तो उसकी कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता, सार्वजनिक व्यवस्था और कानूनों के अनुपालन को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने RSS से अपनी संगठनात्मक संरचना, पदाधिकारियों, अधिकृत प्रतिनिधियों, दान और अन्य आय के स्रोतों का सार्वजनिक खुलासा करने को कहा है.
RSS के पास कितनी संपत्तियां, कितना देते हैं टैक्स?
इसके साथ ही खड़गे ने यह भी पूछा कि संगठन के पास कितनी संपत्तियां हैं, उसका खर्च किस प्रकार होता है और क्या वह लागू कर कानूनों के तहत टैक्स का भुगतान करता है. उन्होंने यह स्पष्ट करने की मांग की कि RSS किस कानूनी आधार पर बिना औपचारिक रजिस्ट्रेशन के इतने बड़े स्तर पर गतिविधियां संचालित कर रहा है. पत्र में सार्वजनिक कार्यक्रमों और पथ संचलनों के लिए ली जाने वाली प्रशासनिक अनुमति का विवरण भी मांगा गया है.
यह लेटर ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही प्रियंक खड़गे ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया था कि आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत RSS को पंजीकरण और सरकारी जवाबदेही से छूट मिली हुई है. उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि जरूरत पड़ी तो वे संघ मुख्यालय जाकर भी इस विषय को समझने को तैयार हैं.