कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मामले में नया मोड़ आ गया है. जिस याचिका में उनका नाम प्रतिवादी के रूप में शामिल था और जिसका उल्लेख न करने के आधार पर उनका नामांकन खारिज किया गया था, उसी याचिका को हैदराबाद की एक स्थानीय अदालत ने सुनवाई से इनकार करते हुए वापस लौटा दिया है.
स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को ए. श्रीलता नामक महिला की ओर से दायर याचिका पर कहा कि इसमें विधायक और विधान परिषद सदस्य जैसे जनप्रतिनिधियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है. ऐसे मामलों की सुनवाई नामित विशेष अदालत में होती है, इसलिए याचिकाकर्ता संबंधित अदालत का रुख करें.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक श्रीलता ने अपनी याचिका में कांग्रेस नेता कुंभम शिवा कुमार रेड्डी पर शारीरिक उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था. इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी. याचिका में मीनाक्षी नटराजन और तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ को भी प्रतिवादी बनाया गया था.
इसी मामले का उल्लेख न करने को लेकर मध्य प्रदेश में नटराजन के राज्यसभा नामांकन पर सवाल उठे थे. राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने नामांकन पत्रों की जांच के बाद कहा था कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ जमा किए गए फॉर्म-26 में एक अदालत में लंबित शिकायत का उल्लेख नहीं किया, जिससे उनका हलफनामा अधूरा माना गया.
दरअसल, भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने रिटर्निंग ऑफिसर से शिकायत कर आरोप लगाया था कि नटराजन ने तेलंगाना में दर्ज मामले की जानकारी अपने शपथपत्र में नहीं दी है. इसके बाद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया था. इसके बाद बीजेपी भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीत गए.
नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने भी शुक्रवार को मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज कर दी. साथ ही शीर्ष अदालत ने उन्हें चुनाव याचिका के माध्यम से कानूनी चुनौती देने की स्वतंत्रता दी है.