मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर द्वारा AIADMK के चार विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के फैसले पर नोटिस जारी किया है. अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष के अलावा विधानसभा सचिव, चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी और इस्तीफा देने वाले चार पूर्व विधायकों को भी नोटिस भेजा है.
मुख्य न्यायाधीश एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 जून तय की है. यह याचिका AIADMK के मुख्य सचेतक (व्हिप) एग्री एस.एस. कृष्णमूर्ति और एक जनहित याचिका के माध्यम से दायर की गई है.
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने अदालत को बताया कि 13 मई को तमिलनाडु सरकार के विश्वास मत के दौरान AIADMK के 25 विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के पक्ष में मतदान किया था.
इसके बाद AIADMK महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इन विधायकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. 25 में से 21 विधायकों ने माफी मांग ली, जिसे पार्टी ने स्वीकार कर लिया. हालांकि, बाकी चार विधायकों ने इस्तीफा दे दिया.
याचिका के अनुसार, तीन विधायकों ने 25 मई 2026 और चौथे विधायक एसाक्की सुबाया ने 26 मई 2026 को इस्तीफा दिया. विधानसभा अध्यक्ष ने दल-बदल कानून के तहत चल रही अयोग्यता (डिस्क्वालिफिकेशन) की कार्रवाई के दौरान ही उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए और सीटों को रिक्त घोषित कर दिया.
याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 190(3)(b) के तहत विधानसभा अध्यक्ष को यह जांच करनी चाहिए थी कि इस्तीफा स्वेच्छा से और वास्तविक रूप से दिया गया है या नहीं.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अध्यक्ष ने बिना किसी जांच के इस्तीफे स्वीकार कर लिए. इतना ही नहीं, इस्तीफा देने के उसी दिन चारों विधायक सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो गए, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि उन्हें किसी प्रकार का राजनीतिक या आर्थिक लाभ देने का वादा किया गया था.
AIADMK की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.आर. राजगोपाल ने अदालत में दावा किया कि पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि इन चार विधायकों के इस्तीफे से पहले 'हॉर्स ट्रेडिंग' (विधायकों की खरीद-फरोख्त) हुई थी और उन्हें लाभ का लालच दिया गया था.
क्या है सरकार का पक्ष
तमिलनाडु सरकार की ओर से महाधिवक्ता विजय नारायण ने अदालत में कहा कि इस्तीफे के पीछे की मंशा (मोटिव) महत्वपूर्ण नहीं है. उन्होंने कहा कि चारों विधायक स्वयं विधानसभा अध्यक्ष के सामने उपस्थित हुए और व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपा था, इसलिए उनके इस्तीफे स्वैच्छिक और वास्तविक थे.
अब इस मामले में 29 जून को होने वाली अगली सुनवाई में हाईकोर्ट यह तय करेगा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा चारों विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने की प्रक्रिया संविधान और कानून के अनुरूप थी या नहीं.