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जावेद अख्तर को शिवसेना का जवाब, सामना में लिखा- RSS की विचारधारा तालिबानी होती तो...

आरएसएस और तालिबान की तुलना करने पर जावेद अख्तर को शिवसेना का जवाब दिया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक लेख लिखा है जिसमें कहा है कि आरएसएस और तालिबान की तुलना करना ठीक नहीं है.

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जावेद अख्तर (फाइल फोटो) जावेद अख्तर (फाइल फोटो)
11:22
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जावेद अख्तर ने की थी तालिबान और आरएसएस की तुलना
  • शिवसेना ने सामना में लिखा- दोनों की तुलना करना ठीक नहीं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और तालिबान (Taliban) की तुलना करने पर शिवसेना (Shiv Sena) ने जावेद अख्तर (Javed Akhtar) को जवाब दिया है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना (Saamna) में लिखा है कि आरएसएस और तालिबान की तुलना करना सही नहीं है. साथ ही ये भी लिखा है कि लगातार बहुसंख्यक हिंदुओं को दबाया न जाए.

शिवसेना ने लिखा, 'अफगानिस्तान का तालिबानी शासन मतलब समाज और मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा है. पाकिस्तान, चीन जैसे राष्ट्रों ने उसका साथ दिया है. हिंदुस्थान की मानसिकता वैसी नहीं दिख रही है. हम हर तरह से जबरदस्त सहिष्णु हैं. लोकतंत्र के बुरखे की आड़ में कुछ लोग तानाशाही लाने का प्रयास कर रहे होंगे फिर भी उनकी सीमा है. इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना तालिबान से करना उचित नहीं है.'

सामना में लिखा है, 'जावेद अख्तर अपने मुखर बयानों के लिए जाने जाते हैं. देश में जब-जब धर्मांध, राष्ट्रद्रोही विकृतियां उफान पर आईं, तब जावेद अख्तर ने उन धर्मांध लोगों के मुखौटे फाड़े हैं. कट्टरपंथियों की परवाह किए बगैर उन्होंने ‘वंदे मातरम’ गाया है. फिर भी संघ की तालिबान से की गई तुलना हमें स्वीकार नहीं है.'

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हिंदू राष्ट्र निर्माण की अवधारणा सौम्य है...

'आपकी विचारधारा धर्मनिरपेक्ष है इसलिए ‘हिंदू राष्ट्र’ की संकल्पना का समर्थन करने वाले तालिबानी मानसिकता वाले हैं, ऐसा कैसे कहा जा सकता है? बर्बर तालिबानियों ने अफगानिस्तान में जो रक्तपात, हिंसाचार किया है. जो मानव जाति का पतन कर रहे हैं, वो दिल दहलाने वाला है. तालिबान के डर से लाखों लोगों ने देश छोड़ दिया है. महिलाओं पर जुल्म हो रहे हैं. अफगानिस्तान नर्क बन गया है. तालिबानियों को वहां सिर्फ शरीयत की ही सत्ता लानी है. हमारे देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रयास करने वाले जो-जो लोग या संगठन हैं, उनकी हिंदू राष्ट्र निर्माण की अवधारणा सौम्य है.'

सामना में शिवसेना ने लिखा, 'संघ या शिवसेना तालिबानी विचारों वाली होती तो इस देश में तीन तलाक के खिलाफ कानून नहीं बना होता. लाखों मुस्लिम महिलाओं को आजादी की किरण नहीं दिखी होती.'

आगे लिखा है, 'हिंदुस्थान में हिंदुत्ववादी विचार अति प्राचीन है. वजह ये है कि रामायण, महाभारत हिंदुत्व का आधार है. बाहरी हमलावरों ने हिंदू संस्कृति पर तलवार के दम पर हमला किया. अंग्रेजों के शासन में धर्मांतरण हुए. उन सभी के खिलाफ हिंदू समाज लड़ता रहा लेकिन वो कभी भी तालिबानी नहीं बना. दुनिया के हर राष्ट्र आज धर्म की बुनियाद पर खड़े हैं. चीन, श्रीलंका जैसे राष्ट्रों का अधिकृत धर्म बौद्ध, अमेरिका-यूरोपीय देश ईसाई तो शेष सभी राष्ट्र ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ के रूप में अपने धर्म की शेखी बघारते हैं. परंतु विश्व पटल पर एक भी हिंदू राष्ट्र है क्या? हिंदुस्थान में बहुसंख्यक हिंदू होने के बावजूद भी ये राष्ट्र आज भी धर्म निरपेक्षता का झंडा लहराता हुआ खड़ा है. बहुसंख्यक हिंदुओं को लगातार दबाया न जाए, यही उनकी एक वाजिब अपेक्षा है. जावेद अख्तर हम जो कह रहे हैं, वो सही है न.'

बीजेपी ने पूछा- कार्रवाई कब करोगे?

सामना में ये लेख आने के बाद सियासत भी शुरू हो गई है. बीजेपी ने शिवसेना से पूछा है कि वो कार्रवाई कब करेगी. बीजेपी विधायक राम कदम ने ट्वीट कर लिखा, 'जलेबी की तरह गोल-गोल भाषा? शिवसेना स्वीकार कर रही है कि जावेद अख्तर का बयान गलत है. हमें शिकायत करे 24 घंटे बीत गए. उसके बावजूद भी अब तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया? आपको कार्रवाई करने से किसने रोका? उन्हें घर के बाहर कब करोगे?'

 

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