पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने प्रशासन और कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है. चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को चेतावनी दी है कि चुनाव के दौरान लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उनकी ये टिप्पणी उस समय सामने आई जब चुनाव आयोग की फुल बेंच ने राज्य में तैयारियों की समीक्षा के लिए अहम बैठक की है.
इस बैठक में राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया. अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की गई. इस दौरान चुनाव आयोग ने राज्य में नारकोटिक्स एडवाइजरी कमेटी की कमी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने पुलिस से पूछा कि दूसरे राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में अब तक ऐसी कमेटी क्यों नहीं बनाई गई है.
डायरेक्टर जनरल (लॉ एंड ऑर्डर) विनीत गोयल ने जब इस पर जवाब देने की कोशिश की, तो उन्हें स्थिति में तुरंत सुधार के लिए कदम उठाने को कहा गया. एक अधिकारी ने बताया कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने सभी एजेंसियों को साफ संदेश दिया है कि चुनाव से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. किसी तरह की चूक पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी.
इस बैठक के दौरान कई एजेंसियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई. इनमें एक्साइज डिपार्टमेंट, नारकोटिक्स अथॉरिटी, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) शामिल थे. कुछ मामलों में इन एजेंसियों को भी फटकार लगाई गई और चुनाव से पहले निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए. सीमावर्ती इलाकों में शराब और अवैध सामानों की तस्करी रोकने के लिए कहा गया.
इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी चुनाव के दौरान वित्तीय लेन-देन पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए. आयोग ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि चुनाव के दौरान वोटरों को प्रभावित करने के लिए काले धन का इस्तेमाल न हो. RBI को सभी जिलों में वित्तीय गतिविधियों की निगरानी तेज करने के लिए कहा गया है ताकि बिना हिसाब-किताब वाले कैश का सर्कुलेशन रोका जा सके.
समीक्षा बैठक में अलग-अलग जिलों के जिला चुनाव अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की तैयारियों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए. इन प्रेजेंटेशन में चुनाव के दौरान आने वाली संभावित चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी दी गई. खासतौर पर उन जिलों पर ध्यान दिया गया जो दूसरे राज्यों और पड़ोसी देशों के साथ सीमा साझा करते हैं.