असम में बीजेपी की लगातार तीसरी बार सरकार बन गई है और हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है. खानपारा के पशु चिकित्सा महाविद्यालय मैदान में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन समेत एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शिरकत की.
मुख्यमंत्री हिंमता के साथ-साथ उनकी सरकार के चार विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की है. कैबिनेट के जरिए सीएम हिमंत 'जाति, माटी और भेटी' को जमीन पर उताने की रणनीति में हैं.
असम के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मंत्रियों के नामों का ऐलान किया था. शपथ लेने वाले मंत्रियों में असम गण परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा और बोडलैंड पीपुल्स फ्रंट के विधायक चरण बोरो शामिल हैं. इसके अलावा महिला चेहरे के तौर पर अजंता नेयोग और आदिवासी चेहरे रामेश्वर तेली को मंत्री बनाया गया है.
'जाति, माटी और भेटी' का प्लान
असम में बीजेपी ने सत्ता हैट्रिक लगाकर इतिहास रच दिया है और अब मुख्यमंत्री की कुर्सी हिमंता को फिर सौंप दी गई है. हिमंता का प्लान 'जाति, माटी और भेटी' (समुदाय, भूमि और आधार) के नारे को जमीन पर उतारने का है. नई कैबिनेट के गठन के साथ ही ये साफ हो गया है कि अगले पांच साल असम के लिए केवल विकास के नहीं, बल्कि 'असमिया पहचान' को सुरक्षा देने का है.
जाति, माटी और भेटी' का नारा असमिया अस्मिता की सुरक्षा का प्रतीक है. असम के मूल निवासी और जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, माटी का मतलब राज्य की भूमि पर मूल निवासियों का अधिकार से है. भेटी का मायने सियासी आधार या नींव जो अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के खतरों से असमिया समाज को बचाती है.
मंत्रिमंडल के जरिए सियासी संदेश
हिमंता बिस्वा सरमा की नई कैबिनेट में अतुल बोरा, चरण बोरो, अजंता नेओग और रामेश्वर तेली को फिलहाल शामिल किया गया है. इसके जरिए बीजेपी असम के सियासी समीकरण को साधने के साथ-साथ क्षेत्रीय बैलेंस बनाने की रणनीति है. इस तरह अहोम, मटक, मोरन और चाय जनजाति के प्रतिनिधियों को विशेष स्थान दिया गया है, ताकि कांग्रेस के पारंपरिक आधार माने जाने वाले वोटबैंक पर मजबूती से पकड़ बनाई रखी जा सके.
बीजेपी ने चार प्रमुख मंत्रियों का चयन बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया है. इन चारों चेहरों के जरिए बीजेपी का प्लान असम के अलग-अलग समुदायों, क्षेत्रों और राजनीतिक समीकरणों को साधने का है. इसके अलावा बीजेपी की प्रचंड जीत में अहम रोल अदा करने वाली महिला वोटों का ख्याल रखते हुए एक महिला विधायक को भी मंत्री बनाया गया है.
असम में सहयोगियों को साधने का प्लान
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के शपथ लेने वाले चार मत्रियों में दो मंत्री बीजेपी की सहयोगी दल से हैं. बोडलैंड पीपुल्स फ्रंट के विधायक चरण बोरो मंत्री पद की शपथ लेंगे, जो बोडो समुदाय से आते हैं. चुनाव से ऐन पहले बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) को साथ लाना एक मास्टरस्ट्रोक था. चरण बोरो के जरिए कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय ताकतों के 'बोडो वोट बैंक' पर पकड़ बनाए रखने का प्लान है.
बीजेपी सिर्फ बीपीएफ ही नहीं, बल्कि असम गढ़ परिषद को भी साधने की रणनीति है. इसीलिए असम गढ़ परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा को मंत्री बनाकर बीजेपी असमिया अस्मिता और क्षेत्रीयता के संतुलन को बनाए रखना चाहती है. वे राज्य के मूल निवासियों की आवाज माने जाते हैं. बोरा के जरिए बीजेपी यह दिखाना चाहती है कि वह क्षेत्रीय दलों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है और 'असमिया पहचान' की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है.
वोटबैंक पर पकड़ बनाए रखने का प्लान
असम में बीजेपी उसी तरह से सियासी जड़े जमाए रखना चाहती है, जैसे गुजरात में है. इसीलिए बीजेपी ने हिमंता बिस्वा सरमा सरकार में ट्राइबल समाज से आने वाले रामेश्वर तेली को मंत्री बनाकर सियासी संदेश देना चाहती है. रामेश्वर तेली 'चाय जनजाति'के कद्दावर नेता और ऊपरी असम का प्रतिनिधित्व करते हैं.
रामेश्वर तेली पूर्व में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं. उन्हें राज्य कैबिनेट में वापस लाने का मतलब है कि भाजपा चाय बागान श्रमिकों के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है. यह समुदाय असम की करीब 30-35 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है. इस तरह बीजेपी का दांव चाय बागानों पर पकड़ बनाए रखने का है.
बीजेपी असम में महिला प्रतिनिधित्व के रूप में अजंता नेओग को मंत्री बना रही है. वो असम की पहली महिला वित्त मंत्री रही हैं और 6 बार की विधायक हैं. अजंता नेओग के जरिए भाजपा महिला मतदाताओं को बड़ा संदेश दे रही है. महिला वोटर असम में काफी अहम है और बीजेपी के लिए जीत का मंत्र बन चुकी है.
कैबिनेट के जरिए BJP का 'त्रिकोणीय' लक्ष्य
असम में बीजेपी कैबिनेट के जरिए तीन समीकरण साधने की है. पहला चाय जनजाति, बोडो, और महिलाओं के प्रतिनिधियों को मुख्य धारा में रखकर 'सबका साथ' का संदेश. इसके अलावा पुराने विश्वसनीय मंत्रियों (अजंता और अतुल)को कैबिनेट में रखकर उनके राजनीतिक अनुभव का लाभ उठाना.
बीजेपी इन मंत्रियों के माध्यम से असम को दक्षिण-पूर्व एशिया का 'एक्सपोर्ट हब' बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और औद्योगीकरण पर फोकस करना. कैबिनेट में चारो नेताओं को शामिल कर भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका ध्यान केवल राजनीति पर नहीं, बल्कि "विकसित असम 2031" के रोडमैप पर है.