भारत-पाकिस्तान के बीच कथित सीजफायर पर राजनीतिक प्रवक्ताओं के बीच चर्चा हुई, जिसमें अमेरिकी हस्तक्षेप के दावे सामने आए और उनका खंडन भी किया गया. प्रवक्ताओं ने एक दूसरे पर देशहित के मुद्दों पर राजनीति करने और सेना के मनोबल को प्रभावित करने वाले बयान देने के आरोप लगाए.