त्योहारों के इस पावन अवसर पर कथावाचक मोरारी बापू ने समाज और दुनिया के सामने कई महत्वपूर्ण बातें रखी हैं. मोरारी बापू के अनुसार हर साल रावण दहन तो किया जाता है, लेकिन असली आवश्यकता अपने भीतर छिपे मोह और रावणत्व को मिटाने की है. तुलसीदास जी के अनुसार मोह ही असली रावण है और जब इंसान अपनी दसों प्रकार की वृत्तियों पर नियंत्रण पा लेता है, वही सच्चा दशहरा है.