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Light Combat Aircraft: देश की सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है LCA Tejas फाइटर जेट?

राफेल है. मिराज है. सुखोई समेत और कई फाइटर जेट्स हैं. फिर LCA Tejas की जरुरत क्यों? इसका क्या फायदा है? इसे बनाने का मकसद क्या है? क्या बाकी फाइटर जेट पर्याप्त नहीं है. तेजस फाइटर जेट की पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है. असल में इस फाइटर जेट की जरुरत क्यों पड़ी?

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LCA Tejas के स्क्वॉड्रन को फ्लाइंग डैगर कहा जाता है. यानी उड़ने वाला खंजर. (फोटोः HAL)
LCA Tejas के स्क्वॉड्रन को फ्लाइंग डैगर कहा जाता है. यानी उड़ने वाला खंजर. (फोटोः HAL)

जब भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के पास अत्याधुनिक राफेल, सुखोई जैसे फाइटर जेट्स हैं. भरोसेमंद मिराज, जगुआर और मिग लड़ाकू विमान हैं, तब तेजस (Tejas) की जरुरत क्यों? आखिर लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (Light Combat Aircraft - LCA) यानी तेजस की जरुरत क्यों है? यह फाइटर जेट भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है. पहले यह जानते हैं कि इसकी जरुरत भारत को क्यों पड़ी?

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अब तेजस-मार्क 2 फाइटर जेट बनाने में जुट गई है.
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अब तेजस-मार्क 2 फाइटर जेट बनाने में जुट गई है. 

 LCA Tejas छोटा और हल्का मल्टी-रोल सुपरसोनिक फाइटर एयरक्राफ्ट है. अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ. इसके पहले स्क्वॉड्रन को 'फ्लाइंग डैगर्स 45' (Flying Daggers 45) नाम दिया गया है. यह दुनियाभर के अन्य विमानों से सस्ता है. इसमें क्वाडरूप्लेक्स फ्लाइ बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम हैं. यानी पायलटों को उड़ाने में ज्यादा सहूलियत मिलती है. छोटा होने की वजह से दुश्मन की राडार में पकड़ में आने में दिक्कत होगी. क्योंकि इसके आकार के हिसाब से दुश्मन का राडार इसे फाइटर जेट मानेगा नहीं. इससे हमला करने में फायदा मिलेगा. 

इसका कॉकपिट कांच का है. तेजस का ग्लास कॉकपिट (Glass Cockpit) जिससे पायलट को चारों तरफ देखने में आसानी होती है. अगर इसे चीन के JF-17 से तुलना करे तो दोनों को अलग-अलग मकसदों से बनाया गया है. हालांकि दोनों बने एक समय में है. दोनों की तुलना करना सही नहीं होगा लेकिन तेजस जेएफ-17 से कई मामलों में ज्यादा बेहतर है. तेजस की वजह से वायुसेना के फ्लाइंग कॉफिन (Flying Coffin) कहे जाने वाले MiG-21 के स्क्वॉड्रन को बदला जाएगा. 

LCA Tejas दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हल्के फाइटर जेट्स में से एक है. अमेरिका ने भी माना इसका लोहा. (फोटोः HAL)
LCA Tejas दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हल्के फाइटर जेट्स में से एक है. अमेरिका ने भी माना इसका लोहा. (फोटोः HAL)

छोटी लड़ाई के लिए घातक फाइटर

LCA Tejas Mark 1 की लिमिटेड रीच है. यानी 400 किलोमीटर से थोड़ी ज्यादा. इसका मतलब ये है कि इसे क्लोज-एयर-टू-ग्राउंड ऑपरेशंस में उपयोग कर सकते हैं. अगर दुश्मन के इलाके में लंबी दूरी का कोई मिशन करना है तो राफेल, सुखोई, मिराज जैसे फाइटर जेट्स का उपयोग किया जाएगा. भारतीय वायुसेना फिलहाल तेजस फाइटर जेट के पहले वर्जन का उपयोग कर रही है. 

मार्क-2 बदलेगा बड़े लड़ाकू विमानों को

तेजस मार्क-2 (Tejas Mark 2) अपने पुराने वर्जन से ज्यादा बेहतर है. इसके आने से हमें विदेशों से मंगाए गए जगुआर, मिराज 2000 और मिग-29 को हटा दिया जाएगा. तेजस मार्क-2 की ईंधन क्षमता 3400 किलोग्राम होगी. गति मैक 2 यानी 3457 KM प्रतिघंटा. रेंज 2500 KM होगी. 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ेगा. इसमें 23 मिमी की GSH-23 गन होगी. साथ ही इसमें हवा से हवा में मार करने वाली सात मिसाइलें, हवा से जमीन पर मार करने वाली चार मिसाइलें, एक एंटी रेडिएशन मिसाइल, पांच बम लगाए जा सकते हैं.

Tejas Mark-2 के आने के बाद मिग-29, मिराज और जगुआर फाइटर प्लेन की फ्लीट को कम किया जाएगा.
Tejas Mark-2 के आने के बाद मिग-29, मिराज और जगुआर फाइटर प्लेन की फ्लीट को कम किया जाएगा. 

Mark-2 घातक मिसाइलों से किया जाएगा लैस

तेजस मार्क-2 ब्रह्मोस-एनजी मिसाइल भी लगाई जा सकती है. इसके अलावा निर्भय, स्टॉर्म शैडो, अस्त्र, मीटियोर, असराम और क्रिस्टल मेज मिसाइलें भी लग सकेंगी. इसमें प्रीसिशन गाइडेड बम, लेजर गाइडेड बम, क्लस्टर बम, अनगाइडेड बम और स्वार्म बम भी लग सकते हैं. तेजस मार्क-2 एक सेकेंड में करीब एक किलोमीटर की गति से उड़ता है. इस गति से जब तेजस मार्क-2 दुश्मन पर हमला करेगा तो उसके बचने का कोई मौका नहीं बचेगा. 

Mark-1 दुनिया का अत्याधुनिक लाइट फाइटर

अब अगर बात करें तेजस मार्क-1 (Tejas Mark-1) की तो इसे 1 या 2 पायलट उड़ाएंगे. यह 43.2 फीट लंबा औऱ 14.5 फीट ऊंचा है. इसमें 2458 किलोग्राम ईंधन स्टोर होता है. अधिकतम स्पीड 1980 किलोमीटर प्रतिघंटा है. यानी ध्वनि की गति डेढ़ गुना ज्यादा. रेंज 1850 किलोमीटर है लेकिन कॉम्बैट रेंज 500 किलोमीटर ही है. यानी पूरे हथियारों और ईंधन के साथ ये दुश्मन के इलाके में 500 किलोमीटर अंदर जाकर तबाही मचाकर आ सकता है. अधिकतमक 53 हजार किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें आठ हार्डप्वाइंट्स हैं. यानी हवा से हवा, हवा से सतह, एंटी-रेडिएशन और एंटी शिप मिसाइलें तैनात की जा सकती है. इसके अलावा कई प्रकार के बमों से लैस किया जा सकता है.  

हल्के और छोटे लड़ाकू विमान राडार की पकड़ में तुरंत नहीं आते. ये सस्ते भी होते हैं.
हल्के और छोटे लड़ाकू विमान राडार की पकड़ में तुरंत नहीं आते. ये सस्ते भी होते हैं. 

इन देशों के पास भी है हल्के फाइटर जेट

अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड, चेक गणराज्य, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, रूस, चीन, इटली और रोमानिया के पास भी हल्के फाइटर जेट्स की फ्लीट है. तुर्की भी अपने लिए हल्के फाइटर जेट्स तैयार करवा रहा है. लेकिन सबसे आधुनिक लाइल कॉम्बैट फाइटर जेट भारतीय वायुसेना का तेजस ही है. इसकी मांग अमेरिका, अर्जेंटीना, मलेशिया जैसे कई देश कर रहे हैं. भविष्य में भारत के ये लड़ाकू विमान न सिर्फ देश की सुरक्षा करेंगे बल्कि आर्थिक फायदे भी पहुंचाएंगे.  

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