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इलेक्शन कमीशन को बताया वॉट्सएप आयोग... सुप्रीम कोर्ट में क्या बोलीं ममता बनर्जी, जानिए 10 बड़ी बातें

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम हटाने का आरोप लगाया है. उन्होंने चुनाव आयोग को 'व्हाट्सऐप कमीशन' तक कह दिया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है.

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सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में SIR को लेकर अपनी बात रखी है
सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में SIR को लेकर अपनी बात रखी है

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सीएम ममता बनर्जी ने खुद अदालत में अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने कहा कि, राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं. इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ तक कह दिया. उन्होंने कहा, “इलेक्शन कमीशन… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.” 

बता दें कि 9 फरवरी सोमवार को इस मामले में फिर से सुनवाई होगी और सीएम ममता बनर्जी फिर से मौजूद रहेंगी

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने क्या-क्या कहा, 10 पॉइंट्स में जानिए बड़ी बातें

पश्चिम बंगाल को किया जा रहा टारगेट: बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने कहा कि वह न्याय के लिए अदालत आई हैं. आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को तमाम फैक्ट्स बताए थे, लेकिन उन्हें नहीं सुना गया. सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने टैगोर की स्पेलिंग में बदलावों का जिक्र करते हुए लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और राज्य में बड़े पैमाने पर वोटर्स के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं.

चुनाव आयोग पर आरोप: ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग सभी दस्तावेज स्वीकार कर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मामले में उन्हें खारिज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब त्योहार और फसल कटाई का मौसम है और बड़ी संख्या में लोग राज्य से बाहर हैं.

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चुनाव आयोग को कहा वाट्सएप आयोगः इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘व्हाट्सऐप कमीशन’ तक कह दिया. उन्होंने कहा, 'इलेक्शन कमीशन… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.”

'वकील तब लड़ते हैं... ECI के वकील ने कहा कि 'मेरी इंस्ट्रक्शन यह थी कि सिर्फ स्पेलिंग की मामूली गलती पर नोटिस जारी नहीं किया जाएगा.' इस पर सीजेआई ने कहा कि 'राज्य का एग्जीक्यूटिव हेड भी आज यहां मौजूद है. क्या यह संभव नहीं कि राज्य बंगला भाषा के विशेषज्ञ उपलब्ध कराए, जो समिति के साथ बैठकर स्थानीय उच्चारण और स्पेलिंग पर सलाह दें?'

इस पर ममता बनर्जी ने कहा 'मैं इस पर सफाई दे सकती हूं, क्योंकि मैं उसी राज्य से हूं.' इस पर CJI ने कहा कि 'इसमें कोई संदेह नहीं कि आप वहीं से हैं.' तब उन्होंने कहा कि- 'बेंच का धन्यवाद कि मुझे बोलने की अनुमति दी गई. समस्या यह है कि वकील तब लड़ते हैं, जब सब कुछ खत्म हो चुका होता है. जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय दरवाजों के पीछे रोता रहता है. मैंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया.'

सीएम ने खुद को बताया बंधुआ: ममता बनर्जी ने कहा 'मैं कोई खास व्यक्ति नहीं हूं. मैं एक बंधुआ मजदूर जैसी हूं. मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूं, मैं एक साधारण नागरिक हूं.'

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उनकी प्रक्रिया सिर्फ डिलीशन कीः ममता बनर्जी ने कहा कि 'अगर अनुमति हो तो मैं प्रमुख बंगाली अखबारों में छपी कुछ तस्वीरें दिखा सकती हूं. उनकी पूरी प्रक्रिया सिर्फ डिलीशन की है. बेटी शादी के बाद ससुराल जाती है और पति का सरनेम अपनाती है उसे ‘मिसमैच’ दिखाकर नाम हटा दिया जाता है. काम के लिए पता बदलने वालों को भी ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ बताकर हटाया जा रहा है.'

'यह डिस्क्रिपेंसी नहीं, डिस्क्रिपेंसी मैपिंग है. इस कोर्ट के आदेश से जब आधार कार्ड, डोमिसाइल सर्टिफिकेट, सरकारी हाउसिंग कार्ड स्वीकार किए गए, तो बंगाल के लोग खुश थे. लेकिन चुनाव की पूर्व संध्या पर सिर्फ बंगाल को ही टारगेट किया जा रहा है.'

अचानक क्यों किया गयाः '24 साल बाद अचानक चार महीने में यह सब करने की क्या जल्दी थी? फसल का मौसम था, पूजा का मौसम था—जब लोग शहर में नहीं थे, तब नोटिस जारी कर दिए गए.

महिलाओं के नाम काटना, एंटी वूमनः ममता बनर्जी ने कहा 'उन्होंने ERO और AERO की शक्तियां खत्म कर दी हैं. 3800 माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, अधिकतर बीजेपी शासित राज्यों से. ये लोग EC ऑफिस में बैठकर नाम काट रहे हैं. पहले चरण में 58 लाख नाम ‘मृत घोषित’ कर हटाए गए. इतनी महिलाओं के नाम कटे—यह एंटी-वूमन है.'

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बंगाल ही क्यों निशाने पर: सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 'जिस तरह से आरोप लगाए जा रहे हैं, उसमें स्पष्ट शत्रुता दिखती है.' ममता बनर्जी ने कहा कि '150 से ज्यादा लोग मरे. बंगाल को ही क्यों टारगेट किया गया? असम या नॉर्थ-ईस्ट क्यों नहीं?'

कृपया लोकतंत्र को बचाइएः ममता बनर्जी ने कहा कि 'मैं विनम्रता से अनुरोध करती हूं—कृपया लोकतंत्र को बचाइए.' जब सीजेआई ने कहा कि 'एक ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता लेखक को भी नोटिस जारी हुआ है. हर राज्य में कुछ नए मुद्दे आते हैं.' तब ममता बनर्जी ने फिर कहा कि,  'इलेक्शन कमीशन… सॉरी—व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है. लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है.'

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