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पश्चिम बंगाल में इस बार सिर्फ दो चरण में मतदान क्यों? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताई ये वजह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी. पहले चरण में 152 और दूसरे चरण में 142 सीटों पर मतदान होगा. चुनाव आयोग ने बताया कि चरणों की संख्या कम करने का फैसला विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है. राज्य में करीब 6.44 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे. चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले इस बड़े चुनावी कार्यक्रम में कुल लगभग 17.4 करोड़ मतदाता हिस्सा लेंगे.

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पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होगा. (Photo: PTI)
पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होगा. (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव इस बार दो चरणों में कराए जाएंगे. साल 2021 में राज्य में आठ चरणों में मतदान हुआ था. इस बार मतदाता 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान करेंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी. रविवार को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह फैसला आयोग के भीतर विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि राज्य में चरणों की संख्या कम करना जरूरी था और इस बारे में आयोग ने लंबी चर्चा के बाद दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि दो चरणों में चुनाव कराने का फैसला इसलिए किया गया, ताकि सबको सहूलियत हो. सबके फायदे के लिए ऐसा किया गया.

2021 के मुकाबले बड़ा बदलाव
दो चरणों में मतदान कराने का फैसला पिछले विधानसभा चुनाव से अलग है. 2021 में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ था. नया कार्यक्रम चुनाव प्रचार की अवधि को छोटा करेगा और आने वाले हफ्तों में पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है.

पश्चिम बंगाल चुनाव की मुख्य तारीखें
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा. दूसरे चरण में 29 अप्रैल को बाकी 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा.

पहले चरण के लिए अधिसूचना 30 मार्च को जारी होगी. उम्मीदवार 6 अप्रैल तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे. नामांकन पत्रों की जांच 7 अप्रैल को होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अप्रैल तय की गई है.

दूसरे चरण के लिए अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी की जाएगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 9 अप्रैल है, जबकि जांच 10 अप्रैल को होगी. उम्मीदवार 13 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकेंगे. दोनों चरणों का मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा और पूरी चुनाव प्रक्रिया 6 मई तक पूरी कर ली जाएगी.

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चुनाव आयोग ने जारी किया मैप.

क्यों कम किए गए मतदान के चरण?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस बार चुनाव दो चरणों में कराने का निर्णय लेने से पहले आयोग ने विस्तार से विचार-विमर्श किया. उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम बंगाल में चरणों की संख्या कम करना जरूरी था और सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.

पश्चिम बंगाल का चुनाव चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले बड़े चुनावी कार्यक्रम का हिस्सा है. असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. सभी जगहों की मतगणना 4 मई को की जाएगी.

कितने मतदाता और मतदान केंद्र?
चुनाव आयोग के अनुसार इन सभी चुनावों में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता भाग लेंगे. कुल 824 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा. इसके लिए करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए जाएंगे और लगभग 25 लाख चुनाव अधिकारी और कर्मचारी मतदान प्रक्रिया को संभालेंगे.

पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या
चुनाव आयोग के अनुसार 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक पश्चिम बंगाल में करीब 6.44 करोड़ मतदाता विधानसभा चुनाव में मतदान करने के पात्र हैं.

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पारदर्शिता के लिए विशेष व्यवस्था
चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान के दौरान पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर शत-प्रतिशत वेब प्रसारण किया जाएगा. डाक मतपत्रों की गिनती इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन में दर्ज मतों की गिनती से दो चरण पहले की जाएगी.

राजनीतिक गतिविधियां होंगी तेज
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही पश्चिम बंगाल और अन्य चुनाव वाले राज्यों में राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है. सत्ता की दौड़ में उतरने के लिए सभी दल अब अपने प्रचार अभियान को और तेज करेंगे.

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