भारत के अधिकांश राज्यों में इन दिनों जमकर बारिश हो रही है. दक्षिण पश्चिम मॉनसून पूरे देश में सक्रिय है, जिसकी वजह से कुछ इलाकों में अति वर्षा तो वहीं कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश देखने को मिल रही है. मौसम विभाग ने आज यानी 14 जुलाई को छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात, केरल, कर्नाटक, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, गोवा और महाराष्ट्र में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है.
दिल्ली का मौसम
देश की राजधानी दिल्ली में आज 14 जुलाई को बादल छाए रहेंगे और हल्की बरसात होने की संभावना है. हालांकि, दिल्ली में मॉनसून की बारिश के साथ दिन में उमस का दौर जारी रहने की आशंका है. IMD के मुताबिक, इस पूरे हफ्ते दिल्ली का अधिकतम तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है और न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है.
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देश के मौसम का हाल
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, अगले 24 घंटों के दौरान, कोंकण और गोवा, कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में मध्यम से भारी बारिश संभव है. वहीं उत्तराखंड, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, दक्षिण गुजरात, विदर्भ, तेलंगाना के कुछ हिस्सों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है.
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इसके अलावा लक्षद्वीप, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मराठवाड़ा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. लद्दाख, जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल के गंगीय क्षेत्र, सौराष्ट्र और कच्छ, रायलसीमा, आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, राजस्थान और दिल्ली में हल्की बारिश संभव है.
देश की मौसमी गतिविधियां
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, समुद्र तल पर मानसून मानसून की अक्षय रेखा अमृतसर, चंडीगढ़, मेरठ, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुजफ्फरपुर, आसनसोल, कृष्णानगर और फिर पूर्व दक्षिण-पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्व की ओर से गुजर रहा है. वहीं उत्तर-पूर्व असम और उसके आसपास के इलाकों में एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है.
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इसके अलावा एक द्रोणिका पूर्वोत्तर असम से लेकर उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक समुद्र तल से 0.9 किलोमीटर ऊपर फैली हुई है. एक चक्रवाती परिसंचरण उत्तरी गुजरात और उसके आसपास के इलाकों में समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर ऊपर बना हुआ है. वहीं एक द्रोणिका दक्षिण गुजरात तट से उत्तरी केरल तट तक फैली हुई है.