ब्रिटेन में रह रहे भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब उनके खुद के वकीलों ने उनका केस लड़ने से इनकार कर दिया है. वकीलों का कहना है कि विजय माल्या लंबे समय से उनके संपर्क में नहीं है.
लॉ फर्म 'खैतन एंड कंपनी' ने विजय माल्या केस को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. लॉ फर्म ने अदालत से गुहार लगाई है कि उन्हें ED से जुड़े मामलों में माल्या के वकील के तौर पर हटने की अनुमति दी जाए.
लॉ फर्म ने हाईकोर्ट को बताया कि विजय माल्या पिछले काफी समय से वकीलों के संपर्क में नहीं है. वो केस को लेकर वकीलों को कोई निर्देश भी नहीं दे रहा हैं.
वकीलों से संपर्क में नहीं विजय माल्या
अदालत में लॉ फर्म ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी एडवोकेट या लॉ फर्म को किसी ऐसे व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है, जो खुद आगे आकर निर्देश न दे रहा हो और वकीलों से संपर्क में न हो.
हालांकि लॉ फर्म की इस अर्जी का ईडी ने विरोध किया है. ईडी ने अदालत में दलील दी कि दिल्ली हाईकोर्ट के नियमों के मुताबिक, किसी भी वकील को केस से हटने से पहले अपने क्लाइंट को नोटिस भेजना जरूरी है. इसके बिना वकील को केस से आजाद नहीं किया जा सकता है.
अगस्त तक सुनवाई स्थगित
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, दिल्ली हाईकोर्ट ने माल्या के वकीलों को दिल्ली हाईकोर्ट और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमों के मुताबिक जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी है.
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये मामला 2004 के विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) की कार्यवाही से जुड़ा हुआ है. इस मामले में ईडी ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें 'यूनाइटेड ब्रुअरीज' को राहत दी गई थी.
ये मामला पिछले 22 साल से दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है. साल 2009 के बाद से इस केस में अदालत की ओर से कई तारीखें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है.