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रेंगते हुए शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के घर पहुंचे अभ्यर्थी, लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षण घोटाले का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस में सरकार की ओर से पैरवी न होने से नाराज हैं.

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उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर अभ्यर्थी सोमवार को फिर से प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदेश में 69000 शिक्षकों की भर्ती मामले में घोटाला सामने आया था. मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. इससे पहले सोमवार को छात्रों ने शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव किया. 

क्यों नाराज हैं अभ्यर्थी?
असल में छात्र और अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस में सरकार की तरफ से पैरवी नहीं होने के चलते नाराज हैं. उनका कहना है कि पैरवी न हो पाने से मामला निस्तारित नहीं हो पा रहा है. प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी रेंगते हुए, दंडवत करते हुए शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर पहुंचे. अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में लंबित केस में सरकार की तरफ से वकील खड़ा कर पैरवी करने की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि सरकार पैरवी कर मामले का निस्तारण कर भविष्य तय करे.

22 अप्रैल को भी अभ्यर्थियों ने किया था प्रदर्शन
इससे पहले 22 अप्रैल को भी अभ्यर्थियों ने लखनऊ में प्रदर्शन किया था. सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी विधानसभा का घेराव करने के लिए पहुंचे थे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने गले में झाड़ू और मटकी लटका कर प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप था कि सरकार दलित और पिछड़ों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती.  अभ्यर्थी बीते 3 सालों से 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षण महा घोटाले का आरोप लगा रहे हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जून 2020 और जनवरी 2022 की चयन सूचियों को रद्द कर दिया था. 

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साथ ही यूपी सरकार को निर्देश दिया था कि वह 2019 में हुई सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा (एटीआरई) के आधार पर 69 हजार शिक्षकों के लिए नई चयन सूची तीन महीने के भीतर जारी करे. इसको लेकर स्थिति अधर में अटकी हुई है. जिससे नाराज अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. यह मामला अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. तबसे इस मामले पर ठीक से सुनवाई नहीं हो पा रही है.

क्या है मामला?
असल में, शिक्षक भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% जगह मिली थी, जबकि एससी वर्ग के अभ्यार्थियों को 3.86% जगह मिली थी. इसमें 21% की जगह सिर्फ 16.2% आरक्षण मिला है. आरोप है कि शिक्षक भर्ती में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 का घोर उल्लंघन हुआ है.

सरकार पर आरोप!

सरकार पर आरोप है कि इस भर्ती में 19000 सीटों पर आरक्षण का घोटाला करके इस भर्ती में ऐसे 19000 अभ्यर्थियों का चयन कर लिया है, जिन्हें इस भर्ती प्रक्रिया में होना ही नहीं चाहिए था. जिन ओबीसी-एससी के अभ्यर्थियों को इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए था. वह न्याय के लिए धरना प्रदर्शन करते हुए नेताओं के यहां जाकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं. 

मंत्रियों के जनता दरबार में प्रार्थना पत्र देने, मंत्री, विधायक, सांसद आदि से मिलकर न्याय पाने की हर जुगत लगा चुके हैं. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अगस्त 2024 में ही 69000 शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को रद्द करते हुए बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का पालन करते हुए 3 माह के अंदर पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में बनाने के आदेश दिए थे.

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कैसे फंसा शिक्षक भर्ती में पेच
दरअसल, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कार्यकाल में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का विज्ञापन निकाला गया था. जिसके लिए पात्र अभ्यर्थी जिन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास किया था उन्होंने आवेदन किया. जिसके बाद मेरिट तैयार की गई और पात्रों को भर्ती कर लिया गया. लेकिन मामले में पेंच तब फस गया जब आरक्षित चयनित अभ्यर्थियों ने सूची पर आरक्षण नीति का पालन नही करने का आरोप लगाया.

जिसके बाद इस मामले को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी कोर्ट में गए. जहां पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार से सूची को बदलकर नई सूची लागू करने को आदेशित किया. तब तक सामान्य वर्ग के चयनित अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर चले गए. जहां पर सुनवाई होनी है.
 

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