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केंद्रीय मंत्री ने फॉस्टर केयर सिस्टम को मजबूत करने की वकालत, जानिए क्या होता है ये और वेस्टर्न देशों में कैसे करता काम

लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य अनाथ या परिवार के समर्थन से वंचित बच्चों को गोद लेने के बारे में जागरूकता बढ़ाना है. इसके अलावा इसका लक्ष्य लोगों को पालक देखभाल की कानूनी प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करना था.

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फॉस्टर केयर कार्यक्रम को संबोधित करती हुईं केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर
फॉस्टर केयर कार्यक्रम को संबोधित करती हुईं केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने गुरुवार को लखनऊ में आयोजित “फॉस्टर केयर और दत्तक ग्रहण के माध्यम से बड़े बच्चों का पुनर्वास” विषय पर एक विशेष संगोष्ठी को संबोधित किया.उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फॉस्टर केयर सिस्टम 6 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए एक विकल्प प्रदान करता है, जिन्हें गोद लेने वाले परिवार को खोजने में अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

फॉस्टर केयर के माध्यम से "नो विजिटेशन" सूची या "अनफिट अभिभावक/माता-पिता" वाले बच्चों के लिए अस्थायी पारिवारिक देखभाल प्रदान की जाती है. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इन बच्चों को स्थायी समाधान मिलने तक एक सुरक्षित और पोषण वाला माहौल मिले.

लखनऊ में आयोजित हुआ कार्यक्रम

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) और उत्तर प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह कार्यक्रम यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया. कार्यक्रम के दौरान ठाकुर ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से हितधारक और संभावित दत्तक माता-पिता लखनऊ में एक साथ आए हैं.

उन्होंने दत्तक माता-पिता के साथ दत्तक ग्रहण के अनुभवों पर भी चर्चा की और दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के कानूनी पहलुओं पर हितधारकों के साथ बातचीत की। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अभियान का विषय "पालक देखभाल और पालक गोद लेने के माध्यम से बड़े बच्चों का पुनर्वास" है.

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उन्होंने कहा, "इसका फोकस छह वर्ष और उससे अधिक आयु के बच्चों पर है, जिन्हें अक्सर दत्तक परिवार खोजने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे बच्चों के लिए, फॉस्टर केयर सिस्टम एक विकल्प मुहैया कराता है."

कार्यक्रम का मकसद

इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य अनाथ या परिवार के समर्थन से वंचित बच्चों को गोद लेने के बारे में जागरूकता बढ़ाना और साथ ही लोगों को पालक देखभाल की कानूनी प्रक्रिया के बारे में शिक्षित करना था. वक्ताओं ने ऐसे बच्चों के पुनर्वास और उन्हें अपनेपन की भावना प्रदान करने के लिए सामाजिक संवेदनशीलता और स्वीकृति के महत्व पर जोर दिया. सम्मेलन के दौरान, उत्तर प्रदेश की मंत्री बेबी रानी मौर्य ने जोर देकर कहा कि बाल संरक्षण योगी आदित्यनाथ सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है.

उन्होंने राज्य में सभी बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और समग्र कल्याण सुनिश्चित करने में सरकार की सक्रिय भूमिका पर भी प्रकाश डाला. उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने चुनौतियों को कम करने और अपनेपन की भावना को बढ़ावा देने के लिए बच्चों को दत्तक परिवारों में रखने के महत्व पर जोर दिया, जो एक परिचित सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक वातावरण प्रदान करते हैं.

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इस कार्यक्रम में उन दत्तक माता-पिता को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) द्वारा संचालित गोद लेने के लिए CARINGS पोर्टल के माध्यम से अपने परिवारों में बच्चों का स्वागत किया है.  

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क्या होता है फॉस्टर केयर
 फॉस्टर केयर उन बच्चों को प्रदान की जाती है जिनके परिवार अस्थायी रूप से उनकी देखभाल करने में असमर्थ होते हैं. स्थानीय सरकारों द्वारा फॉस्टर केयर की व्यवस्था करने की प्रक्रिया निर्धारित की जाती है. फॉस्टर केयर में अधिकांश बच्चे उन परिवारों से ताल्लुक रखते हैं से आते हैं जो अक्सर गरीब होते हैं या जिनके माता-पिता कम शिक्षित, एकल माता या पिता और मादक पदार्थों का सेवन करने वाले या मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे होते हैं.

वहीं यह "बाल सुधार गृह" से बिल्कुल अलग होता है. बाल सुधार गृह एक स्थान होता है जहाँ अनैतिक या गैरकानूनी गतिविधियों में पकड़े जाने वाले नाबालिग बच्चों को सुरक्षित तौर पर रखा जाता है. बाल सुधार गृहों में बच्चों को मिलने की सीमा स्थानीय नियमों और गृह के निर्देशों पर आधारित होती है.

पश्चिमी देशों में इस तरह करता है कार्य
पश्चिमी देशों में भी फॉस्टर केयर सिस्टम बच्चों को वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान करता है.सरकार द्वारा यहां चाइल्ड ब्यूरो बनाया जाता है  जो मुख्य पालन-पोषण देखभाल कार्यक्रमों की देखरेख करता है. कुछ देशों में, फॉस्टर केयर सरकारी-वित्तपोषित एजेंसियों द्वारा प्रदान की जाती है, जबकि अन्य में यह निजी संगठनों या व्यक्तियों द्वारा प्रदान की जाती है.

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