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'ये भारत का फ्यूचर-रेडी बजट...', EXCLUSIVE बातचीत में बोले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

केंद्रीय बजट पर पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार का रिफॉर्म एक्सप्रेस एजेंडा निवेश, व्यापार और उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित है. उन्होंने बताया कि बजट में मैन्युफैक्चरिंग, MSME, सर्विस सेक्टर, डेटा सेंटर और केमिकल इंडस्ट्री के लिए संरचनात्मक सुधार किए गए हैं, ताकि अर्थव्यवस्था को लंबी अवधि में मजबूती मिल सके.

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बजट पर आजतक से बातचीत में पीयूष गोयल ने मैन्युफैक्चरिंग और MSME सुधारों की जानकारी दी (Photo: PTI)
बजट पर आजतक से बातचीत में पीयूष गोयल ने मैन्युफैक्चरिंग और MSME सुधारों की जानकारी दी (Photo: PTI)

केंद्रीय बजट पर आजतक से बातचीत में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार के “रिफॉर्म एक्सप्रेस” एजेंडे और बड़े संरचनात्मक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने आर्थिक क्षेत्र में बड़े स्तर पर सुधारों को प्राथमिकता दी है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है.

पीयूष गोयल ने कहा कि “रिफॉर्म एक्सप्रेस” का मकसद देश में निवेश को बढ़ावा देना, व्यापार को सुगम बनाना और उत्पादन को तेज करना है.

आइए जानते हैं कि पीयूष गोयल से आजतक की हुई एक्सक्लूसिव बातचीत में क्या-क्या बातें हुईं.

सवाल: आपने कहा था कि यह “रिफॉर्म एक्सप्रेस” वाला बजट है. ऐसे में अगर बड़े या बिग टिकट रिफॉर्म की बात करें, तो वे कौन-से हैं?

जवाब: मैं इस बजट को फ्यूचर-रेडी भारत का बजट कहूंगा. यह भारत को विकसित भारत 2047 बनाने की दिशा में गति देने वाला बजट है. अगर रिफॉर्म्स की बात करें, तो यह केवल एक-दो नहीं बल्कि कई स्तरों पर किए गए संरचनात्मक सुधार हैं, जो अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक मजबूती देंगे.

सवाल: मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर इस बजट में क्या खास सुधार किए गए हैं?

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जवाब: मैन्युफैक्चरिंग को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सोची-समझी रणनीति अपनाई गई है. उदाहरण के तौर पर टेक्सटाइल सेक्टर को लें. अभी देश में टेक्सटाइल की वैल्यू चेन अलग-अलग जगह बिखरी हुई है – कहीं रुई बनती है, कहीं यार्न, कहीं फैब्रिक और कहीं गारमेंटिंग. इसे एकीकृत करने के लिए पहले पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क बनाए गए, जो काफी सफल रहे. अब और टेक्सटाइल पार्क बनाए जा रहे हैं, खासतौर पर मैन-मेड फाइबर पर फोकस के साथ, क्योंकि वैश्विक टेक्सटाइल व्यापार का करीब दो-तिहाई हिस्सा मैन-मेड फाइबर का है.

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सवाल: एमएसएमई सेक्टर के लिए बजट में क्या बड़े फैसले लिए गए हैं?

जवाब: एमएसएमई सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि चैंपियन एमएसएमई तैयार किए जा सकें और उन्हें बड़ा होने का मौका मिले. एक अहम सुधार यह है कि जब कोई एमएसएमई एक्सपोर्ट करता है, तो उसके एक्सपोर्ट टर्नओवर को एमएसएमई स्टेटस तय करने में नहीं गिना जाएगा. इससे एमएसएमई को बड़ा बनने और वैश्विक बाजार में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा.

सवाल: सर्विस सेक्टर को लेकर कौन-से बड़े रिफॉर्म इस बजट में दिखाई देते हैं?

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जवाब: आईटी और सर्विस सेक्टर के लिए सेफ हार्बर रूल्स बनाए गए हैं, जिससे नियम सरल होंगे और एक्सपोर्ट आसान होगा. रोजमर्रा की कई परेशानियों से छुटकारा मिलेगा. इसके साथ ही एक सर्विस कमिटी बनाई जा रही है, जो यह तय करेगी कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्विस सेक्टर की 10 प्रतिशत मार्केट कैसे कैप्चर कर सकता है.

सवाल: आपने यूरोपियन यूनियन के साथ एफटीए और सर्विस एक्सपोर्ट की संभावना का भी जिक्र किया था. इसे कैसे समझा जाए?

जवाब: यूरोपियन यूनियन के 27 देश हर साल करीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर की सर्विस इंपोर्ट करते हैं, यानी लगभग 250 लाख करोड़ रुपये। इसमें भारत का योगदान अभी बहुत छोटा है. आज भारत करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपये का सर्विस एक्सपोर्ट करता है, जो इस बड़े बाजार का लगभग डेढ़ प्रतिशत ही है. अगर हम इसे बढ़ाकर 25 लाख करोड़ रुपये तक ले जाते हैं, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि कितने युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिलेगा, खासकर साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में.

सवाल: डेटा सेंटर और विदेशी निवेश को लेकर इस बजट का क्या दृष्टिकोण है?

जवाब: सरकार चाहती है कि भारत में विश्व स्तरीय डेटा सेंटर आएं. इसके लिए विदेशी निवेश और फॉरेन कैपिटल को आकर्षित किया जाएगा. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा, लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा और चूंकि ये डेटा सेंटर ग्रीन एनर्जी से चलते हैं, इसलिए रिन्यूएबल एनर्जी – जैसे सोलर, विंड, हाइड्रो, बैटरी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया – को भी मजबूती मिलेगी.

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सवाल: केमिकल सेक्टर को लेकर पहले भी बात की थी. इस बजट में क्या नया है?

जवाब: केमिकल इंडस्ट्री में बहुत बड़ी संभावना है. इस बजट में पोर्ट के पास तीन बड़े केमिकल जोन बनाने की बात की गई है. इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत केमिकल्स में एक्सपोर्ट हब बन सकता है.

सवाल: कुल मिलाकर इस बजट को आप कैसे परिभाषित करेंगे?

जवाब: यह बजट अलग-अलग सेक्टर की जरूरतों को एक साथ एड्रेस करता है. जितनी गहराई में आप जाएंगे, उतनी ही इसकी रणनीति और संभावनाएं स्पष्ट होंगी. यह सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला बजट है.

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