संसद के बजट सत्र का दूसरा हाफ चल रहा है. दूसरे हाफ के पहले हफ्ते का पहला दिन ईरान जंग को लेकर विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया था. वहीं, इसके बाद दो दिन स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी. चौथे दिन लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अनुपूरक अनुदान मांगों का प्रस्ताव पेश किया था. अब सरकार ट्रांसजेंडर पर्सन्स (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक लेकर आई है.
शुक्रवार को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने यह बिल लोकसभा में पेश किया. इस विधेयक में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर्स की सही और स्पष्ट पहचान के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि इस शब्द की सटीक परिभाषा दी जाए. इससे मौजूदा कानून के तहत मिलने वाले लाभ वास्तव में उन्हें मिल सकें. विधेयक में एक प्राधिकरण की भी बात है.
वीरेंद्र कुमार की ओर से लोकसभा में पेश किए गए विधेयक में यह भी कहा गया है कि वर्तमान कानून के तहत दी जाने वाली सुरक्षा और लाभ काफी व्यापक हैं. इसलिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसी पहचान किसी हासिल की जा सकने वाली विशेषताओं, व्यक्तिगत पसंद या किसी व्यक्ति की खुद से घोषित पहचान के आधार पर नहीं दी जा सकती.
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इस बिल में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर की पहचान के लिए अथॉरिटी बनाई जानी चाहिए जिसे जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने का अधिकार होगा. प्रस्तावित संशोधन विधेयक में यह प्रावधान भी किया गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपने आधिकारिक दस्तावेज में जरूरी बदलाव का अधिकार होगा.
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इससे पहले, लोकसभा में विपक्षी दलों ने एलपीजी सिलेंडर की शॉर्टेज का मुद्दा उठाया और जोरदार हंगामा किया. हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पहले 12 और फिर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी,