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‘मिया मुस्लिम’ जैसे बयानों पर रोक की मांग, BJP मुख्यमंत्रियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और अन्य के मुस्लिम विरोधी बयानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई है. याचिका में ‘मिया मुस्लिम’, ‘कठमुल्ला’, ‘बाढ़ जिहाद’ जैसे विभाजनकारी शब्दों के उपयोग को संवैधानिक पदों की गरिमा के खिलाफ और सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला बताया गया है.

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मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती (Photo: ITG)
मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों की टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती (Photo: ITG)

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों द्वारा मुस्लिम विरोधी बयानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. 

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि ‘मिया मुस्लिम’, ‘कठमुल्ला’, ‘बाढ़ जिहाद’ जैसे भड़काऊ शब्दों का सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल न केवल सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला है, बल्कि ये संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों की जिम्मेदारियों के खिलाफ भी है.

याचिकाकर्ताओं ने यह भी जताया है कि ऐसे बयानों से समाज में विभाजन और डर का माहौल पैदा होता है. खासकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ‘मियां मुस्लिम’ और ‘बाढ़ जिहाद’ के बयान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कठमुल्ला’ शब्द के प्रयोग, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विवादित बयानों के साथ-साथ बीजेपी नेता नितेश राणे द्वारा मुसलमानों को ‘पाकिस्तानी पिंप’ कहने का भी विरोध किया गया है.

याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के उस बयान का भी उल्लेख है, जिसमें युवाओं को इतिहास का बदला लेने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई थी, जिसे याचिकाकर्ता समाज में अशांति फैलाने वाला मानते हैं.

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दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता जॉन दयाल, रूप रेखा वर्मा सहित 12 सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह याचिका दाखिल की है. 

उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि ऐसे विभाजनकारी भाषणों पर रोक लगाने के लिए साफ दिशा निर्देश जारी किए जाएं और संवैधानिक पदों की गरिमा तथा देश में समानता के सिद्धांतों की रक्षा की जाए. साथ ही, याचिका में मतदाता सूची से किसी धार्मिक समुदाय के सदस्यों को हटाने जैसी अवैध मांगों को भी संविधान के खिलाफ बताया गया है.

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