कोलकाता के SRFTI विवाद को लेकर अब आगे की जांच के लिए सरकार ने SIT का गठन किया है. 27 अगस्त को सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट यानी SRFTI में एक कार्यक्रम को लेकर छात्रों और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) के सदस्यों के बीच विवाद हो गया था.
ABGP ने संस्थान के मुख्य ऑडिटोरियम में कार्यक्रम रखा था. छात्रों ने कार्यक्रम का विरोध किया और देखते ही देखते कहासुनी झड़प में बदल गई. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला शुरू करने का आरोप लगाया. छात्रों का आरोप था कि कार्यक्रम में कुछ वक्ताओं की बातों का उन्होंने विरोध किया, जिसके बाद ABGP के सदस्यों ने उनके साथ मारपीट की. छात्रों ने कुछ महिला छात्रों और प्रोफेसरों के साथ बदसलूकी का भी आरोप लगाया.
दूसरी तरफ ABGP ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कार्यक्रम में बाधा डाली, पोस्टर फाड़े और उसके सदस्यों पर हमला किया. इन आरोपों की अभी तर कोई पुष्टी नहीं हुई है. SRFTI कैंपस में हुई इस घटना के बाद पंचसायर पुलिस स्टेशन में इस मामले से जुड़ी तीन FIR दर्ज की गईं. इसके बाद 28 सितंबर को भी कैंपस में तनाव और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं.
अब पश्चिम बंगाल सरकार ने 29 सितंबर को इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT गठित की है. SIT की निगरानी कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कुणाल अग्रवाल करेंगे. इस टीम में कुल पांच अधिकारी हैं. डिप्टी कमिश्नर स्पर्शा निलांगी, डिप्टी एसपी और CID पश्चिम बंगाल कौशिक घोष, ACP सलील रॉय, ACP तुषार कांति घोष और इंस्पेक्टर हीरक दलपति.
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कैसे होगी जांच और कब आएगी रिपोर्ट?
गृह सचिव संघमित्रा घोष के 29 सितंबर के आदेश के मुताबिक SIT को 1 अक्टूबर 2026 तक अपनी पहली रिपोर्ट राज्य सरकार को देनी है. जरूरत पड़ने पर टीम को कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस निदेशालय से अतिरिक्त अधिकारी और स्टाफ लेने की अनुमति भी दी गई है.
यानी अब जांच का फोकस सिर्फ झड़प के बाद के आरोपों पर नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने पर होगा. विवाद कैसे बढ़ा, झड़प किस तरह हुई और तीनों FIR में लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या है. इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे.