लद्दाख के शिक्षाविद, इंजीनियर और विज्ञान की दुनिया में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीते 20 दिनों से अनशन पर हैं. शनिवार को सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस के जवान जंतर मंतर पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल ले गए, जहां उनका मेडिकल चेकअप किया जाएगा. पिछले कुछ वर्षों में वांग्चुक ने बार-बार अनशन को अपने सबसे प्रभावी लोकतांत्रिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है. लेकिन यह उनका पहला भूख हड़ताल आंदोलन नहीं है.
सत्ता का ध्यान खींचने के लिए महात्मा गांधी के इस अहिंसक हथियार को सोनम वांगचुक चार से पांच बार इस्तेमाल कर चुके हैं. भले ही उनकी सभी मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हों, लेकिन इतना जरूर है कि उनके आंदोलनों ने सरकार और प्रशासन को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया है. भले ही मुद्दे बदलते रहे हों लेकिन विरोध के उनके मुख्य तरीकों में भूख हड़ताल हमेशा शामिल रहा है.
आइए जानते 20 दिन से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक ने कब-कब भूख हड़ताल से जन-जागृति लाने की कोशिश की और इन अनशनों का नतीजा क्या रहा?
जनवरी 2023: 5 दिनों की भूख हड़ताल
स्थान- लद्दाख. मुद्दा- लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग. जनवरी 2023 की कड़कड़ाती ठंड में सोनम वांगचुक 5 दिनों के अनशन पर बैठे.
इस विरोध प्रदर्शन में केंद्र शासित प्रदेश में प्रस्तावित माइनिंग और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई गई और संवैधानिक सुरक्षा की मांग फिर से उठाई गई. लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के साथ मिलकर उन्होंने चार मुख्य मांगों का समर्थन किया. लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाए. लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए. युवाओं के लिए
एक अलग पब्लिक सर्विस कमीशन की मांग.
नतीजा क्या हुआ?
इस विरोध-प्रदर्शन ने लद्दाख की पर्यावरण संबंधी चिंताओं की ओर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया और केंद्र सरकार के साथ बातचीत को फिर से शुरू कराया. केंद्र सरकार ने LAB और KDA के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने के लिए गृह मंत्रालय के तहत एक हाई-पावर्ड कमिटी बनाई. कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन आंदोलन की मुख्य मांगों पर कोई सहमति नहीं बन पाई.
मार्च 2024: 21 दिनों की भूख हड़ताल
6 मार्च 2024 को वांगचुक ने लेह में 21 दिन की भूख हड़ताल शुरू की, जिसे उन्होंने "क्लाइमेट फास्ट" का नाम दिया.
उन्होंने कहा कि इस विरोध का मकसद लद्दाख के नाज़ुक इकोसिस्टम की ओर केंद्र का ध्यान खींचना था. साथ ही उन्होंने कहा था कि वे लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांगों को दोहराना चाहते हैं, इस बार भी उन्होंने लद्दाख को 'छठी अनुसूची' में शामिल करने की मांग रखी थी. यह भूख हड़ताल लद्दाखी प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी किसी समझौते पर न पहुंच पाने के कारण शुरू किया गया था.
अनशन का नतीजा क्या रहा?
वांगचुक ने 26 मार्च 2024 को 21 दिन का उपवास पूरा किया. उन्होंने घोषणा की कि क्रमिक भूख हड़ताल और अन्य शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे. और बाद में अपनी मांगों पर ध्यान बनाए रखने के लिए दिल्ली तक मार्च करने का आह्वान किया. केंद्र सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रही.
सितंबर-अक्टूबर 2024: दिल्ली चलो का नारा
सितंबर 2024 में वांगचुक और 100 से ज़्यादा समर्थकों ने लद्दाख से दिल्ली तक लगभग 1,000 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की.
इस यात्रा का मकसद लद्दाख के संवैधानिक दर्जे और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी उन्हीं चार मांगों पर ज़ोर देना था. जब यह समूह 1 अक्टूबर को दिल्ली की सीमा पर पहुंची तो दिल्ली पुलिस ने राजधानी में लागू निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए वांगचुक और कई अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.
हिरासत में लिए जाने के बाद भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के ज़रिए आंदोलन जारी रहा. केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत फिर से शुरू हुई, लेकिन मुख्य मांगें अनसुलझी ही रहीं.
सितंबर 2025: लद्दाख में फिर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भूख हड़ताल
10 सितंबर 2025 को केंद्र के साथ बातचीत में आंदोलन की मांगों का समाधान न निकलने के बाद लेह एपेक्स बॉडी ने 35 दिन की भूख हड़ताल शुरू की. वांगचुक भी दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ इस भूख हड़ताल में शामिल हुए.
जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन आगे बढ़ा. कुछ प्रतिभागियों की तबीयत बिगड़ने लगी. जिसके कारण बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और लेह में शटडाउन की स्थिति बन गई.
क्या रहे नतीजे?
महीने के आखिर में अशांति और बढ़ गई. वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया. आंदोलनकर्ताओं ने केंद्र के साथ तय बातचीत से अस्थायी रूप से खुद को अलग कर लिया. NSA का आदेश रद्द होने के बाद मार्च 2026 में उन्हें रिहा कर दिया गया और लद्दाखी प्रतिनिधियों तथा सरकार के बीच बातचीत फिर से शुरू हुई.
जून 2026: NEET अनियमितताएं को भूख हड़ताल
28 जून 2026 को वांगचुक ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. ये अनशन युवाओं के उस आंदोलन के समर्थन में है जो कथित परीक्षा अनियमितताओं के लिए जवाबदेही की मांग कर रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है.
उनके आंदोलनों का इतिहास बताता है कि भले ही हर बार उन्हें ठोस नीतिगत जीत न मिली हो, लेकिन वे मुद्दे जरूर राष्ट्रव्यापी बन गए.