पीएम मोदी की कैबिनेट से रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से रवनीत सिंह का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है. यह निर्णय भारतीय संविधान के आर्टिकल 75(2) के तहत लिया गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.बता दें रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को ही समाप्त हो गया था.
भाजपा ने 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव में रवनीत बिट्टू को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया था. इसके बावजूद बिट्टू से अब तक इस्तीफा नहीं मांगा गया था. अब शुक्रवार को रवनीत बिट्टू का इ्स्तीफा मंजूर कर लिया गया है. लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस नेता केसी. वेणुगोपाल के राज्यसभा सीट छोड़ने से रिक्त हुई राजस्थान की सीट पर बिट्टू को शेष कार्यकाल के लिए राज्यसभा भेजा गया था.
रवनीत सिंह बिट्टू ने X पर लिखा पोस्ट
इस्तीफा मंजूरी के बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने X पर एक पोस्ट में लिखा कि, 'मैं भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मुझे भारत सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में देश की सेवा करने का अवसर दिया. भारत की जनता, विशेषकर मेरे प्रिय पंजाब की सेवा करना मेरे लिए अत्यंत सम्मान और गर्व की बात रही है. मैं सेवा, राष्ट्रवाद और पीएम मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के संकल्प के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रतिबद्ध हूं. जनसेवा का मेरा यह सफर अब नए उत्साह, नई ऊर्जा और और भी अधिक समर्पण के साथ आगे जारी रहेगा.'
कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू?
रवनीत सिंह बिट्टू 24 मार्च 2024 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे. उन्होंने पहले 11 मार्च 2021 से 18 जुलाई 2021 तक लोकसभा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता के रूप में कार्य किया. बिट्टू 2014, 2019 के भारतीय आम चुनावों में लुधियाना से और इससे पहले 2009 में आनंदपुर साहिब से भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा के लिए चुने गए थे. वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं. 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री बनें.
जनवरी 2021 में, 'जन संसद' कार्यक्रम के दौरान सिंघू सीमा पर उन पर हमला किया गया था. उन्हें लोकसभा में पार्टी का सचेतक नियुक्त किया गया. मार्च 2021 में जब मौजूदा कांग्रेस के लोकसभा नेता अधीर रंजन चौधरी 2021 के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार में व्यस्त थे, उन्हें कुछ समय के लिए लोकसभा में कांग्रेस का नेता नियुक्त किया गया था.