राज्यसभा में बुधवार को मार्च से जून महीने तक रिटायर हो रहे 59 सदस्यों को विदाई दी गई. डिप्टी चेयरमैन हरिवंश, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत रिटायर हो रहे हैं. इन सदस्यों की विदाई के मौके पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे. पीएम मोदी ने सभी सदस्यों के योगदान की तारीफ की और कहा कि राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीवन में या सार्वजनिक जीवन में, जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय करना होता है. तब परिवार के लोग बैठकर मन बना लेते हैं कि हमें क्या करना है. फिर भी कहते हैं कि ऐसा करो, उनसे जरा पूछ लेते हैं. एक सेकंड ओपिनियन ले लेते हैं.
उन्होंने कहा कि जब घर में कोई नहीं हो, तो मोहल्ले में कहते हैं देखो भाई. वह काफी अनुभवी हैं, उनसे जरा पूछ लेते हैं कि उनका मन क्या कहता है. पीएम मोदी ने कहा कि अगर कोई बीमार है, तो भी कहते हैं यार ऐसा करो भाई, एक और डॉक्टर से जरा ओपिनियन ले लो. सेकंड ओपिनियन का बड़ा महत्व है. उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं, हमारी संसदीय प्रणाली में इस सेकंड ओपिनियन की बहुत बड़ी ताकत रही है.
पीएम मोदी ने कहा कि एक सदन में कुछ निर्णय होता है, दूसरे सदन में फिर आता है सेकंड ओपिनियन के लिए. अगर इस सदन में होता है, तो वह उस सदन में जाता है सेकंड ओपिनियन के लिए. उन्होंने कहा कि ये सेकंड ओपिनियन उस सारी बहस को, उस सारी निर्णय प्रक्रिया को एक नया आयाम दे देता है. वह हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करता है. पीएम मोदी ने कहा कि इससे सदन में जो सदस्य रहते हैं, उनके लिए भी एक खुलापन रहता है कि चलो. इस सदन में नहीं तो उस सदन में एक अच्छा ओपिनियन आएगा. उस सदन में नहीं तो इस सदन में एक नया ओपिनियन आएगा.
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उन्होंने कहा कि ये सेकंड ओपिनियन हमारे लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा योगदान है. इस विरासत को हमें संभालना है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे सांसद जो विदाई ले रहे हैं, उनका तो योगदान रहा ही है. इसके लिए भी उनका साधुवाद करता हूं. ये सांसद ऐसे हैं, जिनको पुरानी संसद के भवन में भी बैठने का मौका मिला और नए भवन में भी बैठने का मौका मिला. इनको दोनों इमारतों में राष्ट्र के निर्माण के लिए अपना योगदान देने का अवसर मिला. उन्होंने कहा कि ये सदन अपने आप में एक बहुत बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है.
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पीएम मोदी ने कहा कि एक प्रकार से यहां हमारी शिक्षा भी होती है, हमारी दीक्षा भी होती है. छह साल जो यहां रहने को मिलता है, वह अपने जीवन को गढ़ने का भी एक अमूल्य अवसर होता है. उन्होंने कहा कि सदस्य जब आते हैं, उस समय की उनकी जो भी सोच-समझ और क्षमता है. जब जाते हैं, तब अनेक गुना उसका विस्तार होता है. जाने के बाद भी उनके अनुभव उपयोगी साबित हों.