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अब भी मुंबई तट के पास खड़े हैं तीन ऑयल टैंकर, इंडियन कोस्ट गार्ड ने किया था जब्त

भारतीय तटरक्षक बल ने 4 फरवरी को तेल तस्करी के आरोप में जिन तीन ऑयल टैंकर को जब्त किया था, वे अब भी मुंबई तट के पास खड़े हैं. जांच में सामने आया कि इन जहाजों ने भारत के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में जाली दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से करीब 30 मीट्रिक टन हेवी फ्यूल ऑयल ट्रांसफर किया था.

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इंडियन कोस्ट गार्ड ने 4 फरवरी, 2026 को तेल तस्करी के आरोप में तीन जहाजों को अरब सागर में जब्त किया था. (Photo: X/@IndiaCoastGuard)
इंडियन कोस्ट गार्ड ने 4 फरवरी, 2026 को तेल तस्करी के आरोप में तीन जहाजों को अरब सागर में जब्त किया था. (Photo: X/@IndiaCoastGuard)

भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 4 फरवरी को तेल तस्करी के आरोप में तीन ऑयल टैंकर जब्त किए थे. ये तीनों ऑयल टैंकर शैडो फ्लीट (अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल होने वाले टैंकर) का हिस्सा बताए जा रहे हैं, जो अब भी मुंबई तट के पास खड़े हैं. येलो गेट पुलिस स्टेशन के सूत्रों के मुताबिक इन जहाजों की जांच चल रही है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये ऑयल टैंकर किस देश से जुड़े हैं.

अरब सागर में 4 फरवरी को एमटी एस्फाल्ट स्टार (IMO 9463528), एमटी अल जाफजिया (IMO 9171498) और एमटी स्टेलर रूबी (IMO 9555199) नाम के तीन ऑयल टैंकर्स ने भारतीय समुद्री क्षेत्र के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में बिना किसी इंडियन अथॉरिटी को सूचित किए जाली दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से करीब 30 मीट्रिक टन हेवी फ्यूल ऑयल (HFO) का ट्रांसफर किया था.

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भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्र में काफी अंदर तक ऑपरेशन चलाकर इन जहाजों को पकड़ा और बाद में जब्त कर लिया. इस मामले में मुंबई के येलो गेट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), कस्टम्स एक्ट, पेट्रोलियम एक्ट की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है. इससे पहले 5-6 फरवरी 2026 को भारतीय तटरक्षक बल ने एक अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया था.

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इस ऑपरेशन के दौरान मुंबई से लगभग 100 नॉटिकल मील पश्चिम में तीन संदिग्ध जहाजों को रोका गया था. इन जहाजों की तलाशी, इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच और चालक दल से पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से सस्ता तेल लाता था और अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक जहाज से दूसरी जहाज में ट्रांसफर कर देता था. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि तस्करी नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ है और जहाज अक्सर अपनी पहचान बदलकर समुद्री सुरक्षा एजेंसियों से बचने की कोशिश करते थे.

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