उत्तर भारत में जून की शुरुआत इस बार भीषण गर्मी के बजाय राहत भरे मौसम के साथ हुई है. कई राज्यों में बारिश, बादलों की आवाजाही और तेज हवाओं के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून की शुरुआती सक्रियता की वजह से यह मौसम बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका असर आने वाले कई दिनों तक बना रह सकता है.
दिल्ली-एनसीआर में इस बार जून की शुरुआत पिछले तीन सालों में सबसे ठंडी रही. सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जबकि कई इलाकों में बादल छाए रहने से दिनभर मौसम सुहावना बना रहा. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 2 और 3 जून को राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में हल्की और बिखरी हुई बारिश या गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, हालांकि ये गतिविधियां सीमित समय और क्षेत्र में ही रहेंगी.
इसके बाद 4 जून से 6 जून के बीच मौसम में स्पष्ट बदलाव की संभावना जताई गई है. इस दौरान दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के साथ-साथ बिजली गिरने, धूल भरी आंधी और तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं. इन गतिविधियों का असर 7 जून तक भी बना रह सकता है. इसके बाद 8 जून से मौसम के साफ होने और आसमान में आंशिक सुधार की उम्मीद है.
IMD के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और अगले दो से तीन दिनों में केरल पहुंच सकता है. इसके बाद मॉनसून अरब सागर, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों में फैलने की स्थिति में रहेगा, जिससे देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं.
उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 7 डिग्री सेल्सियस तक नीचे रहा है. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे मौसम में ठंडक बनी रही. राजस्थान में भी कई स्थानों पर बारिश और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि देखने को मिली, जबकि पश्चिमी राजस्थान में धूल भरी आंधी का अलर्ट जारी किया गया है.
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में मौसम और अधिक सक्रिय बना हुआ है. यहां कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की जा रही हैं. मौसम विभाग ने 3 से 5 जून के बीच इन राज्यों में यात्रा और पर्यटन से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इस दौरान बारिश, ओलावृष्टि और भूस्खलन जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राहत की बात यह है कि जून के पहले 10 दिनों तक दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में लू या हीटवेव जैसी स्थिति बनने की संभावना नहीं है. हालांकि 8 जून के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होगा और तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो सकती है, जिससे गर्मी फिर से असर दिखा सकती है.