प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यूपी के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का औपचारिक उद्घाटन कर दिया है. अब नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने यहां से कमर्शियल ऑपरेशन पूरी तरह शुरू होने को लेकर बड़ी जानकारी दी है. उनका कहना है कि एएसपी से सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू हो जाएंगी. इस एयरपोर्ट में बेहतरीन कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी. कार्गो हब और एमआरओ सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, जिससे स्थानीय उद्योगों को लाभ मिलेगा.
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के अनुसार, अगले 45 से 60 दिनों में सुरक्षा मंजूरी (ASP) मिलने के बाद यहां से कमर्शियल ऑपरेशन पूरी तरह शुरू हो जाएगा.
नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) द्वारा एयरपोर्ट सुरक्षा कार्यक्रम (ASP) जारी करने के बाद ही कमर्शियल उड़ानें शुरू हो सकेगी. नोडल अधिकारी ने पुष्टि की है कि अगले 45 दिनों में संचालन शुरू करने की तैयारी है. एईपी (एयरपोर्ट एंट्री पास) प्राप्त करना अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसके बाद ही सभी स्टेकहोल्डर काम शुरू कर पाएंगे. 25 साल पहले बनी इस फाइल का सपना अब हकीकत में बदलने जा रहा है.
मेट्रो शहरों को प्राथमिकता
अधिकारी ने बताया कि एयरपोर्ट से शुरुआती परिचालन में मेट्रो शहरों को प्राथमिकता दी जाएगी, उसके बाद टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए उड़ानें शुरू की जाएगी. वहीं, एनआईए से इंटरनेशनल परिचालन शुरू होने में अधिक वक्त लगेगा, क्योंकि इसमें आव्रजन और सीमा शुल्क की समीक्षा और मंजूरी की जरूरत होती है. मंजूरी मिलते ही इंडिगो जैसी एयरलाइन कंपनियां इंटरनेशनल परिचालन शुरू करने के लिए तैयार है.
एयरपोर्ट को लगभग 6200 हेक्टेयर भूमि पर पांच चरणों में विकसित किया जा रहा है. पहले चरण का निर्माण 11,200 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर पूरा हुआ है. फिलहाल एक रनवे से घरेलू और कार्गो उड़ानों का संचालन शुरू होगा, जबकि इंटरनेशनल उड़ानों का संचालन बाद में शुरू किया जाएगा.
बेहतरीन कनेक्टिविटी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोएडा एयरपोर्ट को सड़क रेल और मेट्रो के जरिए बेहतरीन कनेक्टिविटी प्रदान की गई है. एयरपोर्ट की यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट कनेक्टिविटी है. एयरपोर्ट के आसपास फिल्म सिटी, अपैरल पार्क, टॉय पार्क और सेमीकंडक्टर पार्क के साथ कई बड़े औद्योगिक यूनिट विकसित किए जा रहे हैं, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. इस प्रोजेक्ट से करीब 50,000 से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है, जबकि लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे.
कार्गो हब
एयरपोर्ट के पहले चरण में 3900 मीटर लंबा रनवे तैयार किया गया है जो आधुनिक नेविगेशन सिस्टम और ऑल-वेदर ऑपरेशन की सुविधा से लैस है. भविष्य में यहां कुल 8 रनवे बनाने की योजना है. एयरपोर्ट पर 40 एकड़ में एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सुविधा बनाई गई है, जहां विमानों की मरम्मत हो सकेगी. शुरुआती कार्गो क्षमता 2.5 लाख टन है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 18 लाख टन तक किया जा सकता है. इससे कार्गो टर्मिनल से आसपास में विकसित औद्योगिक यूनिट्स को बड़ा फायदा होगा.
एयरपोर्ट का डिजाइन बनारस के घाट और हवेली जैसी भारतीय वास्तुकला से प्रेरित है. इसके शुरू होने से पश्चिमी यूपी के किसानों के फल, सब्जी और डेयरी उत्पाद सीधे इंटरनेशनल बाजार तक पहुंच सकेंगे. 'फार्म टू ग्लोबल मार्केट' मॉडल से राज्य के करीब 1 करोड़ MSME उद्योगों को वैश्विक बाजार से जुड़ने में मदद मिलेगी. पहले चरण में ये एयरपोर्ट हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को सेवा देने की क्षमता रखता है, जिसे आगे बढ़ाया जाएगा.