बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने सत्ता से बेदखल होने से पहले एक बड़ी बात कही थी. शेख हसीना ने एक 'व्हाइट मैन' की साजिशों की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को मिलाकर बंगाल की खाड़ी में एक 'क्रिश्चयन स्टेट' बनाना चाहती हैं. उन्होंने दावा किया कि यह प्रपोजल एक 'व्हाइट मैन' की तरफ से आया था.
तब शेख हसीना राजनीतिक चुनौतियों में घिरी हुई थीं और उनके इस खुलासे पर किसी ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी थी. ये बात मई 2024 की थी. लेकिन दो वर्ष बाद भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के आरोप में एक अमेरिकी भाड़े के सैनिक और छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा विशेषज्ञों के कान खड़े कर दिए हैं. अब सुरक्षा एक्सपर्ट सभी घटनाओं का लिंक आपस में जोड़ रहे हैं.
पिछले हफ़्ते एक गुपचुप ऑपरेशन में NIA ने तीन हवाई अड्डों से कुछ विदेशी नागरिकों को गिरफ़्तार किया. इनमें अमेरिकी भाड़े का सैनिक मैथ्यू वैनडाइक भी शामिल है. मैथ्यू वैनडाइक कथित तौर पर खुद को भाड़े का सैनिक कहता है. ये शख्स दुनिया भर में होने वाले सशस्त्र संघर्षों में पहुंच जाता है.
NIA ने बताया कि ये विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन मिज़ोरम में अवैध रूप से घुसने के बाद वे राजनीतिक रूप से अशांत म्यांमार चले गए. विदेशियों को मिजोरम में घुसने के लिए 'प्रोटेक्टेड एरिया परमिट' (PAP) की जरूरत होती है.
अमेरिकी भाड़े के सैनिक की गिरफ़्तारी पर NIA ने क्या कहा?
NIA ने बताया कि म्यांमार में इन लोगों ने 'एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स' (EAGs) को हथियारों की ट्रेनिंग दी. ये ग्रुप्स भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में सक्रिय विद्रोही संगठनों का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा, NIA को पता चला है कि इन आरोपियों ने यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप मंगवाई थी और इसे सशस्त्र समूहों और मिजोरम में सक्रिय कुछ अन्य गुटों तक पहुंचाया था. इन आरोपियों को 11 दिनों के लिए NIA की हिरासत में भेज दिया गया है.
इस घटनाक्रम ने उन अफवाहों को फिर से हवा दे दी है कि अमेरिका और दूसरी विदेशी ताकतें म्यांमार में जुंटा-विरोधी ताकतों को मदद दे रही थीं. म्यांमार में 2021 में एक तख्तापलट के जरिए जुंटा यानी कि वहां की सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद म्यांमार गृहयुद्ध की चपेट में आ गया था. भू-राजनीतिक विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने इस बात पर जोर दिया कि 'अमेरिका का प्रॉक्सी युद्ध' अब भारत के पूर्वोत्तर तक पहुंच गया है.
मैथ्यू वैनडाइक कौन है?
NIA के जाल में फंसी बड़ी मछली अमेरिकी नागरिक वैनडाइक है. ये शख्स पहले लीबिया और सीरिया में हुए सशस्त्र संघर्षों का हिस्सा रह चुका है. ये दो ऐसे देश हैं जहां के नेताओं को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. 2011 में लीबिया में मुअम्मर गद्दाफ़ी की सरकार द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मैथ्यू वैनडाइक युद्धबंदी भी रह चुका है.
मैथ्यू वैनडाइक को भारत में लोग अमेरिकी 'डीप स्टेट'का हिस्सा मान रहे हैं. गौरतलब है कि वैनडाइक 'सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' (SOLI) का संस्थापक है; यह एक सिक्योरिटी फर्म है जो तानाशाही सरकारों के खिलाफ लड़ने वाले समूहों को प्रशिक्षण देती है.
2019 में वैनडाइक के SOLI ने भारत में कथित तौर पर "ईसाइयों पर हो रहे अत्याचार" की ओर इशारा किया था. इसकी रिपोर्ट Fox News ने की थी.
इन बातों ने विशेषज्ञों को अलग अलग तथ्यों को आपस में जोड़ने और यह संकेत देने के लिए प्रेरित किया है कि वैनडाइक उस समूह का हिस्सा हो सकते हैं, जिसके बारे में हसीना ने 2024 में चेतावनी दी थी.
हसीना की 'ईसाई देश' वाली चेतावनी
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने दावा किया था कि 2024 के बांग्लादेश चुनावों से पहले एक "व्हाइट मैन" ने उनसे मुलाकात की थी. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उस "व्हाइट मैन" ने उन्हें सत्ता में वापस लाने में मदद करने का भरोसा दिया था, बशर्ते वह किसी विदेशी राष्ट्र को बांग्लादेश की जमीन पर एक एयरबेस बनाने की इजाजत दे दें.
हसीना ने एक पार्टी बैठक में कहा, "ईस्ट तिमोर की तरह... वे बांग्लादेश (चटगांव) और म्यांमार के कुछ हिस्सों को मिलाकर, बंगाल की खाड़ी में एक बेस के साथ एक ईसाई देश बनाने की योजना बना रहे हैं."
हालांकि हसीना ने उस देश का नाम नहीं लिया लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीति का असर दूसरी "क्षेत्रीय ताकतों" पर भी पड़ेगा.
हसीना की चेतावनी की चर्चा करते हुए सुरक्षा विश्लेषक ग्रुप कैप्टन उत्तम देवनाथ (रिटायर्ड) ने स्पूतनिक इंडिया को बताया कि अमेरिका की नजर लंबे समय से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों पर थी, ताकि वहां एक "ईसाई राज्य" बनाया जा सके.
IAF के इस पूर्व अधिकारी ने कहा कि अमेरिका इसका इस्तेमाल चीन पर नजर रखने और जासूसी अभियानों के लिए करता. देवनाथ ने कहा, "यह पूरी तरह मुमकिन है कि NIA द्वारा गिरफ़्तार किए गए यूक्रेनियों और अमेरिकी नागरिकों का यह समूह उसी नापाक गिरोह का हिस्सा है, जो एक ईसाई राज्य बनाने की दिशा में काम कर रहा है."
सुप्रीम कोर्ट के वकील और राजनीतिक टिप्पणीकार शशांक शेखर झा ने भी इस पर अपनी राय दी, "क्या पूर्वोत्तर में ईसाई राज्य बनाने के लिए सत्ता परिवर्तन की साजिश रची जा रही है?" हालाकि NIA या केंद्र सरकार की ओर से इस पहलू पर अभी तक कुछ भी नहीं कहा गया है."
वैनडाइक और दूसरे विदेशी नागरिकों की गिरफ़्तारी से यह बात साफ होती है कि भारत के पड़ोस में विदेशी ताकतें कितनी सक्रिय हैं.
मार्च 2025 में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने राज्य विधानसभा को बताया कि उन्हें ऐसी खुफिया जानकारी मिली है कि "यूक्रेन युद्ध के अनुभवी सैनिक" मिजोरम के रास्ते म्यांमार के चिन राज्य जाकर विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग दे रहे हैं.
आंकड़े पेश करते हुए लालदुहोमा ने बताया कि जून से दिसंबर 2024 के बीच 2,000 विदेशियों ने आइजोल का दौरा किया, लेकिन सड़कों पर उनमें से बहुत कम ही लोग दिखाई दिए.
इससे इस अटकल को और बल मिला कि मिजोरम और म्यांमार के बीच की खुली सीमा वैनडाइक जैसे भाड़े के सैनिकों के लिए एक अहम रास्ता बन गई है. हाल के घटनाक्रमों ने पहले से ही अशांत इस इलाके में रहस्य की एक नई परत जोड़ दी है. फिलहाल प्रश्न यही बना हुआ है: क्या ये अलग-थलग घटनाएं किसी बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा हैं?